शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहना ही काफी नहीं है, मेंटल हेल्थ को लेकर भी सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं आज के समय में तेजी से बढ़ रही हैं। स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्या हर उम्र के लोगों में आम हो गई है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के अलावा काम का दबाव, आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक कलह जैसी विपरीत परिस्थितियों के कारण मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
Mental Health: अंदर ही अंदर टूट रहे हैं? मेंटल हेल्थ के इन रेड फ्लैग्स को पहचानिए, वरना बढ़ सकती है दिक्कत
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आज के समय में तेजी से बढ़ रही हैं। तनाव और अवसादइसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। लंबे समय तक काम का दबाव, आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक कलह, सोशल मीडिया का अधिक उपयोग और अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार हर सात में से एक व्यक्ति किसी न किसी तरह की मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी माहौल, करियर की असुरक्षा, सोशल मीडिया दूसरों से अपनी तुलना करना और पारिवारिक तनाव आपके मानसिक स्वास्थ्य को दिक्कत पहुंचा सकती है।
- लोगों में बढ़े अकेलेपन और स्क्रीन टाइम का भी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है।
- अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि जो लोग अकेलेपन का शिकार हैं, उनमें कैंसर जैसी समस्याओं तक का खतरा हो सकता है।
क्यों बढ़ती जा रही है ये दिक्कत
मेंटल हेल्थ की समस्याओं के लिए अध्यययनों में दिमाग में कुछ प्रकार के न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोंन्स में गड़बड़ी को भी बड़ा कारण माना जाता है। दिमाग में सेरोटोनिन, डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन डिप्रेशन और एंग्जायटी को बढ़ा सकता है।
- सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करने की आदत आत्मसम्मान को कम कर सकती है, जिससे अवसाद का खतरा बढ़ता है।
- नींद की कमी और अनियमित जीवनशैली हार्मोनल असंतुलन पैदा कर मानसिक स्थिति को बिगाड़ सकती है।
- नशे का सेवन, विशेषकर शराब और ड्रग्स, दिमाग की कार्यप्रणाली पर असर डालकर मानसिक समस्याओं को गंभीर बना सकता है।
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मेंटल हेल्थ समस्याओं के रेड फ्लैग्स को जानिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मेंटल हेल्थ समस्याओं के कुछ रेड फ्लैग्स बताए हैं जिनपर ध्यान देते रहना जरूरी है।
- लगातार उदासी या खालीपन महसूस करना।
- पहले जिन चीजों में रुचि थी, उनमें अचानक दिलचस्पी खत्म हो जाना।
- नींद के पैटर्न में बदला, बहुत ज्यादा सोना या अनिद्रा की समस्या।
- भूख कम लगना। अचानक वजन बढ़ना या कम होना।
- चिड़चिड़ापन, गुस्सा या छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक प्रतिक्रिया देना।
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और पढ़ाई या काम में गिरावट।
- सामाजिक दूरी बनाना, दोस्तों और परिवार से अलग-थलग रहना।
- बिना किसी शारीरिक कारण के थकान और ऊर्जा में कमी रहना।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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