दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से रफ्तार पकड़ रहे हैं। हाल ही में सामने आए कोरोना के नए और सबसे खतरनाक माने जा रहे साउथ अफ्रीकन वैरिएंट बी.1.1.1.529 ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस नए वैरिएंट को 'ओमिक्रॉन' नाम दिया गया है। वैसे तो अभी दुनियाभर में ओमिक्रॉन वैरिएंट के केस काफी कम हैं, हालांकि अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट कोरोना का अब तक का सबसे संक्रामक और घातक वैरिएंट हो सकता है। रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट में करीब 32 म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं। इससे पहले कोरोना के लैम्बडा वैरिएंट में सबसे अधिक 7 म्यूटेशनों के बारे में पता चला था।
कोरोना संकट: लैम्बडा और डेल्टा से भी संक्रामक है ओमिक्रॉन वैरिएंट, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके
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ओमिक्रॉन वैरिएंट बी.1.1.1.529
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सबसे पहले साउथ अफ्रीका के बोत्सवाना में सामने आए इस वैरिएंट के मामले तीन और देशों में सामने आ चुके हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वैरिएंट की प्रकृति ऐसी है जो संक्रमितों में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। सबसे गंभीर बात इसमें देखे गए 32 म्यूटेशन हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी वैरिएंट में जितने अधिक म्यूटेशन होते हैं, वायरस के प्रतिरक्षा से बचने की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाती है। ओमिक्रॉन वैरिएंट में K417N, E484A, P681H और N679K जैसे म्यूटेशनों का पता चला है जो इसे आसानी से प्रतिरक्षा को चकमा देने के योग्य बनाते हैं।
लैम्बडा वैरिएंट में देखे गए थे 7 म्यूटेशन
ओमिक्रॉन वैरिएंट से पहले कोरोना के लैम्बडा वैरिएंट में सबसे अधिक सात म्यूटेशनों के बारे में पता चला था। सबसे पहले पेरू में सामने आए कोरोना के इस वैरिएंट में सामने आए सात म्यूटेशनों ने वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए थे। वैज्ञानिकों का कहना था कि लैम्बडा वैरिएंट में देखे गए सात म्यूटेशन इसे डेल्टा वैरिएंट से भी घातक बनाते हैं। म्यूटेशनों की अधिक संख्या किसी भी वायरस की संक्रमकता दर को भी काफी बढ़ा देती है।
डेल्टा वैरिएंट की तबाही
ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले सामने आने से पहले कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को सबसे घातक और संक्रामक माना जा रहा था। भारत में कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही के लिए भी कोरोना के इसी वैरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (बी.1.617.2) के मामले भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में देखने को मिले। अध्ययनों के मुताबिक यह वैरिएंट संक्रमितों के फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंचाता है, यही कारण है कि इससे संक्रमित लोगों में मृत्युदर भी काफी अधिक देखने को मिला था।
कोरोना का म्यू वैरिएंट
सितंबर के महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपने साप्ताहिक महामारी बुलेटिन में कोरोना के म्यू वैरिएंट के बारे बताया था। इस वैरिएंट को लेकर हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह वैक्सीन से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने में सफल हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना का म्यू वैरिएंट, वैक्सीनेटेड लोगों में भी संक्रमण का कारण बन सकता है।

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