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अध्ययन: शराब न पीने के बावजूद लिवर की इस समस्या के शिकार हैं 40% भारतीय, जानें लक्षण और बचाव के तरीके

Tue, 05 Jul 2022 07:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 05 Jul 2022 07:39 PM IST
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लिवर की बीमारी - फोटो : Istock

शराब के सेवन को शरीर में कई तरह की बीमारियों को बढ़ाने वाला कारक माना जाता है। इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव शरीर को सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक लिवर पर देखने को मिलता है। अधिक शराब पीने वालों में लिवर की कमजोरी, लिवर में सूजन, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर की समस्या तक देखने को मिलती है। पर क्या आप जानते हैं कि लिवर की कुछ बीमारियां शराब न पीने वाले लोगों में भी हो सकती हैं। विशेषरूप से नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) ऐसी ही तेजी से बढ़ती एक समस्या है, जिससे शराब न पीने वाले लोग भी काफी परेशान देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं आंकड़े बताते हैं कि शराब न पीने के बाद भी 40 फीसदी भारतीय लोग इस समस्या के शिकार हैं।



एनएएफएलडी की समस्या किसी को भी हो सकती है, इसके कारण पेट में दर्द से लेकर पाचन से संबंधित कई तरह की समस्याएं बने रहने का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के इस समस्या के लक्षणों के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे स्थिति का समय रहते निदान किया जा सके। आइए इस बीमारी के बारे में विस्तार से समझते हैं।

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फैटी लिवर का खतरा - फोटो : iStock

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के बारे में जानिए

अमेरिकन लिवर फाउंडेशन के विशेषज्ञों के मुताबिक एनएएफएलडी लिवर कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा के निर्माण की स्थिति है, यह शराब पीने या न पीने वाले दोनों लोगों में हो सकता है। लिवर में वसा का होना सामान्य है, हालांकि, यदि वसा की मात्रा लिवर के वजन का 5-10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो इसे फैटी लीवर (स्टीटोसिस) कहा जाता है। आहार और जीवनशैली के कई कारण इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज - फोटो : Pixabay

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज क्यों होता है?

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के मुख्य कारणों के बारे में विशेषज्ञों का पता नहीं है, हालांकि माना जाता रहा है कि कुछ स्थितियां इसके जोखिमों को बढ़ा देती हैं जिसके बारे में सभी लोगों को विशेष सतर्कता बरतती रहनी चाहिए। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें  एनएएफएलडी विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा खून में ट्राइग्लिसराइड्स या एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल की अधिकता, मधुमेह या हाई ब्लड प्रेशर के कारण भी एनएएफएलडी का जोखिम बढ़ जाता है। 

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लिवर की बीमारियों को बढ़ाने वाले कारक - फोटो : iStock

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज की पहचान कैसे करें?

विशेषज्ञ कहते हैं फैटी लीवर की समस्या बिना किसी लक्षण के भी हो सकती है। आमतौर पर इसका निदान नियमित रक्त परीक्षण की स्थिति में ही हो पाता है। हालांकि कुछ लोगों में इस स्थित में संकेतों के आधार पर समस्या की पहचान की जा सकती है। 

  • पेट में दर्द बना रहना।
  • थकान-कमज़ोरी महसूस होना।
  • वजन घटना।
  • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना।
  • त्वचा पर मकड़ी जैसी रक्त वाहिकाएं नजर आना। 
  • पेट से संबंधित दिक्कतों का बढ़ना।
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लिवर की समस्याओं का इलाज - फोटो : istock

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का इलाज और बचाव

सामान्यतौर पर एनएएफएलडी की स्थिति में यदि आपमें लक्षण नहीं हैं तो किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती है हालांकि जीवनशैली में बदलाव करने से आपके लिवर में वसा के निर्माण को नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार और बचाव के रूप में सबसे पहले वजन को कम करने स्वस्थ आहार और व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाता है। यदि आपको पहले से ही किसी प्रकार की समस्या है तो कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स, रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए दवा दी जा सकती है।

रोगियों को वजन कम करने, नियमित व्यायाम, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को नियंत्रित करने जैसे उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। दिनचर्या के ये उपाय स्थिति को सुधारने में काफी मददगार हो सकते हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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