अधिक वजन या मोटापे की स्थिति मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गई है। भारत में इसका खतरा और भी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 1 अरब से ज्यादा लोग मोटापे के साथ जी रहे हैं। लगभग हर देश के लिए मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनकर उभरता हुआ देखा जा रहा है।
Health Alert: भारत में 'साइलेंट महामारी' बढ़ा रही है सेहत की मुश्किलें, 2050 तक हालात और भी बिगड़ने की चेतावनी
obesity in india: भारत में मोटापा और अधिक वजन वाले लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 में पाया गया कि हर चार में से एक पुरुष या महिला मोटापे का शिकार है, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट है।
बढ़ रही है मोटापे की महामारी
द लैंसेट रीजनल हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेट की चर्बी या विसरल फैट का खतरा महिलाओं में 40% और पुरुषों में 12% पाया गया।
- नतीजों से पता चलता है कि 30-49 साल की उम्र की 10 में से 5-6 महिलाएं पेट पर जमा चर्बी की समस्या से पीड़ित हैं।
- अध्ययनों में पेट पर या आंतों के आसपास जमी चर्बी को सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक बताया जाता रहा है।
अमर उजाला से बातचीत में एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ अशरफ हुसैन कहते हैं, मोटापे की समस्या एक तेजी से फैलती महामारी के रूप में बढ़ती जा रही है। शहरों, कस्बों के साथ ये दिक्कत अब गांवों में भी देखी जा रही है, जो देश के स्वास्थ्य परिदृश्य को बदल रही है। जिसे कभी "अमीरों की बीमारी" माना जाता था, वह मोटापा अब हर आय वर्ग में देखा जा रहा है। गड़बड़ खान-पान और सुस्त जीवनशैली के कारण आया यह बदलाव भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
साल 2050 तक हर तीन में से एक भारतीय में मोटापे का संकट
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2021 का अनुमान है कि साल 2050 तक वयस्कों में अधिक वजन और मोटापे में 54% की और बढ़ोतरी हो सकती है। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो लगभग हर तीन में से एक भारतीय वयस्क मोटापे का शिकार हो सकता है।
- बच्चों और किशोरों में बढ़ती मोटापे की समस्या और भी गंभीर चिंता बनकर उभर रही है।
- यूनिसेफ की नॉरिशिंग साउथ एशिया रिपोर्ट 2024 बताती है कि दुनिया भर में अधिक वजन वाले बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या भारत में है।
- बढ़ता स्क्रीन टाइम, मीठे ड्रिंक्स, पैक्ड स्नैक्स और बाहरी खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने बचपन में ही मोटापे के खतरे को बढ़ा दिया है।
- कम उम्र में मोटापे की स्थिति युवावस्था से पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के संकट का कारण बन सकती है।
बच्चे-महिलाएं सभी में बढ़ रहा है खतरा
हाल ही में प्रकाशित हुई अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन 2026 की रिपोर्ट में दिल की बीमारी, स्ट्रोक और कार्डियोवैस्कुलर रोगों के बढ़ते खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि मोटापा और डायबिटीज के मामले बढ़ने के कारण अब लगभग आधे वयस्क दिल की बीमारी के जोखिमों के साथ जी रहे हैं।
- भारत में 30 से 49 साल की आधी से ज्यादा महिलाएं बेली फैट की समस्या का शिकार हैं।
- ये न सिर्फ उनमें गंभीर क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाली स्थिति है साथ ही इसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
- इसके अलावा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि 2030 तक भारत में 27 मिलियन से ज्यादा बच्चे और किशोर (5 से 19 साल) मोटापे की चपेट में आ सकते हैं। यह ग्लोबल बोझ का 11 प्रतिशत होगा।
मोटापा घट रहा है दिमागी क्षमता
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि विशेषज्ञों ने चेताया है कि बढ़ते मोटापे की स्थिति किस तरह से हमारी दिमागी क्षमता के लिए खतरा हो सकती है। दुनिया के जाने-माने एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ज्यादा वजन होने से डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ जाता है।
मोटापा की स्थिति आपके दिमागी क्षमता को कम करने वाली हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को पहले से ही सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर समय रहते वजन कम कर लिया जाए और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर लेते हैं तो दुनियाभर में डिमेंशिया के लाखों मामलों को रोका जा सकता है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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स्रोत
Abdominal obesity in India: analysis of the National Family Health Survey-5 (2019–2021) data
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