जाने-माने ओडिया संगीतकार अभिजीत मजूमदार का रविवार (25 जनवरी) को 54 साल की उम्र में एम्स भुवनेश्वर में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कुछ समय से वेंटिलेटर पर भी थे। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार मशहूर संगीतकार को हाइपरटेंशन, हाइपोथायरायडिज्म और क्रोनिक लिवर डिजीज जैसी कई बीमारियां थीं। उन्हें 4 सितंबर, 2025 को भर्ती कराया गया था। उनमें ऑस्मोटिक डेमाइलिनेशन सिंड्रोम का पता चला था, जिसमें पोंटाइन और एक्स्ट्रापोंटाइन दोनों हिस्से शामिल थे। वह कोमा में भी चले गए थे।
Abhijit Majumdar: जानिए क्या है ऑस्मोटिक डेमाइलिनेशन सिंड्रोम की समस्या, जिससे जूझ रहे थे अभिजीत मजूमदार
ओडिया संगीतकार अभिजीत मजूमदार का रविवार को निधन हो गया, वह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार थे। उन्हें ऑस्मोटिक डिमायलिनेशन सिंड्रोम की भी समस्या थी जो मुख्य रूप से शरीर में ब्लड सोडियम लेवल में तेजी से बदलाव आने के कारण होती है।
ऑस्मोटिक डेमाइलिनेशन सिंड्रोम
ऑस्मोटिक डेमाइलिनेशन सिंड्रोम (ओडीएस) एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो नर्व सेल्स की मायलिन शीथ को नष्ट करके ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचाता है। माइलिन शीथ एक फैटी, सुरक्षात्मक कवर है जो नर्व्स के चारों ओर लिपटा होता है। यह आमतौर पर खून में सोडियम की मात्रा को तेजी से ठीक करने के कारण होता है। इस समस्या के कारण क्वाड्रिपेरेसिस (अंगों में कमजोरी), भ्रम और न्यूरोकॉग्निटिव बदलाव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
क्यों होती है ये दिकक्त?
ऑस्मोटिक डेमाइलिनेशन सिंड्रोम की समस्या के लिए मुख्य रूप से शरीर में ब्लड सोडियम लेवल में तेजी से बदलाव आने को कारण माना जाता है। ऐसा अक्सर तब होता है लो ब्लड सोडियम के इलाज के दौरान सोडियम का स्तर बहुत तेजी से बढ़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर मामलों में यह दूसरी बीमारियों के इलाज की वजह से हो सकता है।
लिवर की बीमारी, शराब की लत, हाइपोकैलिमिया (पोटेशियम की कमी), गंभीर कुपोषण और गंभीर हाइपोनेट्रेमिया (सोडियम का स्तर सामान्य से बहुत कम) जैसी स्थितियां भी इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
क्या है इस बीमारी का इलाज?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऑस्मोटिक डेमाइलिनेशन सिंड्रोम एक आपातकालीन स्थिति है जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है। हालांकि इस बीमारी वाले ज्यादातर लोग पहले से ही किसी दूसरी समस्या के लिए हॉस्पिटल में होते हैं। सेंट्रल पोंटाइन मायलिनोलिसिस का कोई इलाज नहीं है, इसके इलाज में लक्षणों को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। बांहों और पैरों में मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में फिजिकल थेरेपी मददगार हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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