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महिलाओं में इस बीमारी के कारण मां बनने में आती है समस्या, रहता है गर्भपात का खतरा

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Fri, 25 Sep 2020 05:56 PM IST
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period problem in Women can not become pregnant due to PCOS, risk of miscarriage, Know how to care sexual life
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

महिलाओं में पीरियड यानी मासिक धर्म का अनियमित होना कई तरह की समस्या पैदा कर सकता है। यह कई कारणों से होता है, लेकिन अक्सर ऐसा हो तो नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह पीसीओएस यानी पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का भी लक्षण हो सकता है। पीसीओएस महिलाओं में होने वाला एक कॉमन डिसऑर्डर है। पीसीओएस सोसाइटी ऑफ इंडिया के मुताबिक हर पांच में से एक महिला पीसीओएस से पीड़ित होती है। अगर समय रहते हुए इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह बुरी अवस्था में पहुंच सकती है। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात की समस्या भी होती है। हालांकि केवल 15 से 20 फीसदी महिलाओं को प्रेग्नेंट होने के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट की जरुरत होती है क्योंकि उनमे से ज्यादातर औरतें ओव्यूलेशन इंडक्शन और वजन कम करके प्रेग्नेंट हो सकती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में बहुत शारीरिक बदलाव होते हैं। पीरियड्स नहीं आना या अनियमित होना इसका सबसे बड़ा लक्षण होता है। नोवा आईवीएफ की फर्टिलिटी कंसल्टेंट डॉ. अस्वती नायर बताती हैं कि शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण ऐसा होता है। आम तौर पर सेक्स हार्मोन एक स्थिर पल्स रेट पर निकलते हैं। पीसीओएस वाली महिलाओं में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) तेजी से पल्स में स्रावित होता है। यह बदले में अंडाशय को पुरुष हार्मोन के हाई लेवल को पंप करने के लिए संकेत भेजता है, जैसे कि टेस्टोस्टेरोन। नतीजतन बहुत ज्यादा  एलएच और टेस्टोस्टेरोन अन्य सेक्स हार्मोन के लेवल को त्याग दिए जाते हैं जो आपके मासिक धर्म चक्र (मेंस्ट्रुअल साइकिल) को नियंत्रित करने के लिए काम करता है और ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

डॉ. अस्वती के मुताबिक, कोई महिला जब पीसीओएस से पीड़ित होती है, तो फॉलिकल बहुत मुश्किल से परिपक्व (मैच्योर) होता है और कभी-कभी अंडाशय से अंडा नहीं निकलता है। इन फॉलिकल को अल्सर कहा जाता है, हालांकि वे अंडाशय में होने वाली दूसरे प्रकार के सिस्ट से अलग होते हैं। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात होना कॉमन होता है क्योंकि इससे सेक्स हार्मोन असंतुलित होता है और बॉडी में इंसुलिन की मात्रा ज्यादा होती है। 

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गर्भधारण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

इस समस्या से उबरने के लिए प्राथमिक उपाय जीवनशैली में सुधार करना होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे-छोटे बदलाव प्रेग्नेंट होने के लिए महिलाओं के शरीर में हार्मोन को रेगुलेट करने में कारगर होते हैं। ऐसा करना अंडाणु की गुणवत्ता और ओवुलेशन में भी सुधार करता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ाता है। पीसीओएस से पीड़ित ज्यादा वजन वाली महिलाएं पांच फीसदी वजन कम कर भी अपनी फर्टिलिटी में सुधार कर सकती हैं। पीड़ित महिलाओं को डाइट, एक्सरसाइज, स्ट्रेस लेवल और नींद की क्वॉलिटी में सुधार करने की भी सलाह दी जाती है। 

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डाइट

डाइट 

  • पीसीओएस के लिए सबसे अच्छी डाइट में से एक एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर डाइट होती है जो अनप्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को मॉडरेट करता है। कुछ कार्बोहाइड्रेट को पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं की डाइट में ओवरऑल हेल्थ को बनाये रखने के लिए शामिल करने की जरुरत होती है। अपनी डाइट में फल, सब्जियां, बीन्स, दाल और अनाज जैसे क्विनोआ और ओट्स शामिल करें।
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