विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान शरीर का तापमान सामान्य दिनों से थोड़ा अधिक रहता है। ऐसे में तेज धूप, गर्म हवाएं और शरीर में पानी की कमी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। सही खानपान, पर्याप्त तरल पदार्थ और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर आप हीटवेव के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बच सकती हैं और अपने होने वाले शिशु को पूरी तरह सुरक्षित रख सकती हैं।
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Heatwave Alert: गर्भवती महिलाओं के लिए लू से बचाव के जरूरी उपाय, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:57 PM IST
सार
Heatwave Alert: गर्मी में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस का खतरा दोगुना हो जाता है, ऐसे में होने वाली माताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
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गर्भवती महिलाओं के लिए लू से बचाव के जरूरी उपाय
- फोटो : AI
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देश के कई हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव (लू) का प्रकोप जारी है। इससे प्रभावित लोगों में बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग और महिलाएं सभी शामिल हैं। मगर डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में सबसे ज्यादा संवेदनशील वर्गों में गर्भवती महिलाएं आती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान शरीर का तापमान सामान्य दिनों से थोड़ा अधिक रहता है। ऐसे में तेज धूप, गर्म हवाएं और शरीर में पानी की कमी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। सही खानपान, पर्याप्त तरल पदार्थ और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर आप हीटवेव के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बच सकती हैं और अपने होने वाले शिशु को पूरी तरह सुरक्षित रख सकती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान शरीर का तापमान सामान्य दिनों से थोड़ा अधिक रहता है। ऐसे में तेज धूप, गर्म हवाएं और शरीर में पानी की कमी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। सही खानपान, पर्याप्त तरल पदार्थ और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर आप हीटवेव के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बच सकती हैं और अपने होने वाले शिशु को पूरी तरह सुरक्षित रख सकती हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए लू से बचाव के जरूरी उपाय
- फोटो : Freepik.com
बॉडी को रखें हाइड्रेटेड
प्यास लगने का इंतजार न करें: गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी पीना चाहिए। शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें,
नेचुरल ड्रिंक्स: सादे पानी के साथ-साथ नारियल पानी, नींबू पानी, गन्ने का रस और छाछ को अपनी डेली डाइट में शामिल करें।
ओआरएस का घोल: ज्यादा थकावट या पसीना आने पर डॉक्टर की सलाह से ओआरएस का सेवन करें।
लक्षणों को पहचानें: शरीर में पानी की कमी होने के संकेतों को नजरअंदाज न करें, जैसे— अचानक चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी और थकान।
गोल्डन रूल: प्यास लगने का इंतजार किए बिना, हर आधे या एक घंटे के नियमित अंतराल पर लिक्विड डाइट लेती रहें।
प्यास लगने का इंतजार न करें: गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी पीना चाहिए। शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें,
नेचुरल ड्रिंक्स: सादे पानी के साथ-साथ नारियल पानी, नींबू पानी, गन्ने का रस और छाछ को अपनी डेली डाइट में शामिल करें।
ओआरएस का घोल: ज्यादा थकावट या पसीना आने पर डॉक्टर की सलाह से ओआरएस का सेवन करें।
लक्षणों को पहचानें: शरीर में पानी की कमी होने के संकेतों को नजरअंदाज न करें, जैसे— अचानक चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी और थकान।
गोल्डन रूल: प्यास लगने का इंतजार किए बिना, हर आधे या एक घंटे के नियमित अंतराल पर लिक्विड डाइट लेती रहें।
गर्भवती महिलाओं के लिए लू से बचाव के जरूरी उपाय
- फोटो : Adobe Stock
दोपहर की तीखी धूप से बनाएं दूरी
क्रिटिकल टाइम: दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक की धूप सबसे अधिक तीखी और नुकसानदेह होती है। इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें और हीट इंडेक्स चरम पर होता है।
बाहर जाने से बचें: कोशिश करें कि इस समय घर से बाहर न निकलना पड़े।
सुरक्षा कवच: यदि किसी इमरजेंसी या डॉक्टर के पास जाने के लिए बाहर निकलना ही पड़े, तो छाता, सनग्लासेस, चौड़ी टोपी या सूती स्कार्फ का उपयोग करें। अपने शरीर को पूरी तरह ढककर ही बाहर जाएं और धूप में लगातार खड़े रहने से बचें।
क्रिटिकल टाइम: दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक की धूप सबसे अधिक तीखी और नुकसानदेह होती है। इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें और हीट इंडेक्स चरम पर होता है।
बाहर जाने से बचें: कोशिश करें कि इस समय घर से बाहर न निकलना पड़े।
सुरक्षा कवच: यदि किसी इमरजेंसी या डॉक्टर के पास जाने के लिए बाहर निकलना ही पड़े, तो छाता, सनग्लासेस, चौड़ी टोपी या सूती स्कार्फ का उपयोग करें। अपने शरीर को पूरी तरह ढककर ही बाहर जाएं और धूप में लगातार खड़े रहने से बचें।
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गर्भवती महिलाओं के लिए लू से बचाव के जरूरी उपाय
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समर-फ्रेंडली कपड़ों का करें चुनाव
गर्मियों में कपड़ों का सही चयन आपको हीट स्ट्रोक से बचा सकता है:
सिर्फ सूती (Cotton) पहनें: गर्मी के मौसम में कॉटन के कपड़े सबसे बेहतर होते हैं। ये त्वचा को सांस लेने की जगह देते हैं और बॉडी टेम्परेचर को मेंटेन रखते हैं।
लाइट कलर्स: सफेद, क्रीम, हल्का नीला, बेबी पिंक या अन्य हल्के रंगों के कपड़े पहनें। ये रंग सूरज की गर्मी को कम अवशोषित (Absorb) करते हैं, जिससे शरीर ठंडा रहता है।
ढीले-ढाले कपड़े: प्रेग्नेंसी के दौरान टाइट कपड़े पहनने से घबराहट और असहजता बढ़ सकती है। ढीले कपड़े पहनने से हवा का फ्लो अच्छा रहता है।
सिंथेटिक को कहें 'नो': पॉलिएस्टर या नायलॉन जैसे कपड़े गर्मी को अंदर ही रोक लेते हैं और पसीना नहीं सोख पाते। इससे स्किन रैशेज, खुजली और घमौरियों का खतरा बढ़ जाता है।
गर्मियों में कपड़ों का सही चयन आपको हीट स्ट्रोक से बचा सकता है:
सिर्फ सूती (Cotton) पहनें: गर्मी के मौसम में कॉटन के कपड़े सबसे बेहतर होते हैं। ये त्वचा को सांस लेने की जगह देते हैं और बॉडी टेम्परेचर को मेंटेन रखते हैं।
लाइट कलर्स: सफेद, क्रीम, हल्का नीला, बेबी पिंक या अन्य हल्के रंगों के कपड़े पहनें। ये रंग सूरज की गर्मी को कम अवशोषित (Absorb) करते हैं, जिससे शरीर ठंडा रहता है।
ढीले-ढाले कपड़े: प्रेग्नेंसी के दौरान टाइट कपड़े पहनने से घबराहट और असहजता बढ़ सकती है। ढीले कपड़े पहनने से हवा का फ्लो अच्छा रहता है।
सिंथेटिक को कहें 'नो': पॉलिएस्टर या नायलॉन जैसे कपड़े गर्मी को अंदर ही रोक लेते हैं और पसीना नहीं सोख पाते। इससे स्किन रैशेज, खुजली और घमौरियों का खतरा बढ़ जाता है।
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गर्भवती महिलाओं के लिए लू से बचाव के जरूरी उपाय
- फोटो : Freepik.com
डाइट में शामिल करें ताजे फल और पौष्टिक भोजन
गर्मी में हैवी और ऑयली खाने से पाचन तंत्र बिगड़ सकता है इसलिए,
पानी से भरपूर फल: अपनी थाली में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा और मौसमी जैसे रसीले फलों को जगह दें।
संतुलित आहार: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और प्रोटीन युक्त चीजें नियमित रूप से खाएं।
इनसे बचें: बहुत ज्यादा तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, जंक फूड और बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
गर्मी में हैवी और ऑयली खाने से पाचन तंत्र बिगड़ सकता है इसलिए,
पानी से भरपूर फल: अपनी थाली में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा और मौसमी जैसे रसीले फलों को जगह दें।
संतुलित आहार: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और प्रोटीन युक्त चीजें नियमित रूप से खाएं।
इनसे बचें: बहुत ज्यादा तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, जंक फूड और बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।