देश में मानसून की शुरुआत होते ही मच्छरजनित रोगों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। इन बीमारियों के चलते हर साल हजारों लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, बड़ी संख्या में इससे मौत के मामले भी देखे जाते रहे हैं। डेंगू ऐसी ही गंभीर बीमारी है। साल 2025 में भारत में आधिकारिक तौर पर डेंगू से 131 मौतें और 121,824 संक्रमण के मामले दर्ज किए गए। बेहतर निगरानी और इंटीग्रेटेड वेक्टर मैनेजमेंट की वजह से पिछले वर्षों की तुलना में इसमें काफी कमी आई। कई राज्यों ने मृत्यु दर को शून्य या कम बनाए रखने में सफलता हासिल की।
World Dengue Day: ये चीजें डेंगू को बना देती हैं खतरनाक, मानसून में बुखार के साथ इन लक्षणों को न लें हल्के में
विश्व डेंगू दिवस 2026- यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर डेंगू को इतना खतरनाक क्यों मानते हैं विशेषज्ञ, कौन-सी परिस्थितियां मरीज की जान को खतरे में डाल सकती हैं?
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डेंगू हो सकता है खतरनाक
डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के मामलों में सबसे खतरनाक चीज है इसकी दूर से पहचान। अक्सर लोग डेंगू को सिर्फ बुखार समझने की गलती कर बैठते हैं। शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द और कमजोरी, त्वचा पर रैशेज और शौच में खून आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
समय पर रोग का पता न चल पाने से प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं और शरीर के अंदर रक्तस्राव शुरू हो जाता है। इससे मरीज शॉक की स्थिति में पहुंच सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर डेंगू को कभी भी हल्के में लेने की सलाह नहीं देते।
आइए समझते हैं कि किन सी चीजें इस बीमारी को खतरनाक बना देती हैं?
प्लेटलेट्स डाउन होना खतरनाक
डेंगू की बीमारी में लो प्लेटलेट्स की आपने भी काफी चर्चा सुनी होगी।
- प्लेटलेट्स खून को जमाने में मदद करती है। सामान्य तौर पर इनकी संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलिटर होती है।
- डेंगू वायरस, बोन मैरो को प्रभावित कर प्लेटलेट्स के उत्पादन को कम कर देता है।
- जब प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाती है तो शरीर में रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है।
- यही वजह है कि मरीजों के नाक, मसूड़ों या शौच में खून आने लगता है।
डेंगू हेमोरेजिक फीवर और शॉक सिंड्रोम
डेंगू का गंभीर रूप डेंगू हेमोरेजिक फीवर कहलाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाओं की दीवारें कमजोर हो जाती हैं और शरीर में खून तथा प्लाज्मा का रिसाव शुरू हो सकता है।
- इस वजह से मरीज के शरीर में गंभीर रक्तस्राव, पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- जब शरीर से प्लाज्मा का अत्यधिक रिसाव होने लगता है तो ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है। इस स्थिति को डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है।
- इसमें मरीज के हाथ-पैर ठंडे पड़ सकते हैं, बेचैनी बढ़ सकती है और बेहोशी हो जाती है। यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है।
इन खतरों को भी जानिए
- दूसरी बार होने वाला डेंगू कई मामलों में अधिक गंभीर हो सकता है। जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है, उन्हें भी सावधानी बरतनी चाहिए।
- डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी रोग और लिवर की समस्याओं से पीड़ित लोगों में डेंगू का जोखिम अधिक गंभीर हो सकता है।
- बच्चों और बुजुर्गों की इम्युनिटी कमजोर होती है। इनमें डेंगू अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
- डेंगू के दौरान तेज बुखार, उल्टी और भूख कम लगने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन के कारण समस्या और बढ़ जाती है।
- डेंगू का देर से पता चलना दिक्कतें बढ़ा सकता है, देर से पता चलने पर जटिलताओं को कंट्रोल करना कठिन हो सकता है।
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स्रोत:
Dengue
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