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Dental Care Tips: क्या सचमुच में दांत में कीड़ा लगता है? जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके
Tue, 14 Jul 2026 04:03 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 14 Jul 2026 04:03 PM IST
सार
Signs of Cavity in Teeth: आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि दांत में कीड़ा लग गया है। ये कीड़ा कैसे लगता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसके बचाव के क्या तरीके हैं, आइए इस लेख में जानते हैं।
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दांतों की सड़न के ये संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- फोटो : AI
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Signs of Cavity in Teeth: बचपन से हम अक्सर सुनते आए हैं कि ज्यादा मिठाई खाने से दांतों में कीड़ा लग जाता है। लेकिन क्या वास्तव में दांतों में कोई कीड़ा होता है? यह समस्या तब होती है, जब मुंह में मौजूद बैक्टीरिया भोजन में मौजूद शुगर और स्टार्च को एसिड में बदल देते हैं। यह एसिड धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) को नुकसान पहुंचाता है और कैविटी बनने लगती है।
दांतों की सड़न के ये संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- फोटो : AI
पहले जान लें कि क्या सचमुच दांत में कीड़ा लगता है?
बहुत से लोग मानते हैं कि दांत में कोई कीड़ा घुस जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होता। दांतों में दिखाई देने वाला काला गड्ढा या सड़न वास्तव में बैक्टीरिया द्वारा पैदा की गई कैविटी होती है। जब मुंह की सफाई ठीक से नहीं होती, तो बैक्टीरिया दांतों पर प्लाक बनाते हैं। यही प्लाक एसिड बनाकर दांतों की परत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। सिंपल भाषा में समझें तो दांतों में "कीड़ा लगना" एक आम बोलचाल का शब्द है, जबकि मेडिकल भाषा में इसे डेंटल कैविटी या टूथ डीके कहा जाता है।
बहुत से लोग मानते हैं कि दांत में कोई कीड़ा घुस जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होता। दांतों में दिखाई देने वाला काला गड्ढा या सड़न वास्तव में बैक्टीरिया द्वारा पैदा की गई कैविटी होती है। जब मुंह की सफाई ठीक से नहीं होती, तो बैक्टीरिया दांतों पर प्लाक बनाते हैं। यही प्लाक एसिड बनाकर दांतों की परत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। सिंपल भाषा में समझें तो दांतों में "कीड़ा लगना" एक आम बोलचाल का शब्द है, जबकि मेडिकल भाषा में इसे डेंटल कैविटी या टूथ डीके कहा जाता है।
दांतों की सड़न के ये संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- फोटो : freepik
दांतों में कैविटी होने के प्रमुख लक्षण
- बिना किसी कारण दांत में दर्द होना या कुछ खाते-पीते समय दर्द महसूस होना कैविटी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
- अगर ठंडी या गर्म चीजें खाने-पीने पर दांतों में झनझनाहट या तेज दर्द महसूस होता है, तो यह दांतों की सड़न का संकेत हो सकता है।
- दांत पर काला, भूरा या सफेद दाग दिखाई देना कैविटी की शुरुआत हो सकती है।
- अगर दांत में छोटा या बड़ा छेद नजर आने लगे, तो यह कैविटी बढ़ने का संकेत है और तुरंत डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए।
- कैविटी के कारण दांतों में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जिससे लगातार सांसों से बदबू आने की समस्या हो सकती है।
- अगर मिठाई, चॉकलेट या मीठे पेय पदार्थ लेने पर दांत में दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।
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दांतों की सड़न के ये संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- फोटो : AI
दांतों में कैविटी क्यों होती है?
- दिन में दो बार ब्रश न करना।
- ज्यादा मीठा और चिपचिपा भोजन खाना।
- बार-बार मीठे पेय पदार्थ पीना।
- दांतों की नियमित सफाई न करना।
- फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल न करना।
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दांतों की सड़न के ये संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- फोटो : AI
कैविटी से बचने के आसान तरीके
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
- सुबह और रात में कम से कम दो बार ब्रश करें।
- रोजाना फ्लॉस का इस्तेमाल करें।
- मीठी चीजों का सेवन सीमित करें।
- फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करें।
- हर 6 महीने में एक बार डेंटिस्ट से दांतों की जांच कराएं।
- खाना खाने के बाद कुल्ला करने की आदत डालें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।