लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 17वां दिन है। उनकी बिगड़ती सेहत लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनम वांगचुक का शरीर कमजोर हो रहा है और उनकी मांसपेशियों में दर्द है। वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है, उनका ब्लड प्रेशर 109/70 है। उनके हजारों समर्थक अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, हालांकि वह अपने फैसले पर अडिग हैं।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: भूख हड़ताल से शरीर को क्या-क्या खतरे? डॉक्टर से जानें मेडिकल रिस्क
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल एक बार फिर चर्चा में है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर लंबे समय तक बिना भोजन के रहने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
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भूख हड़ताल का सेहत पर क्या असर होता है?
मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक भूख हड़ताल या लगातार भोजन न करने की स्थिति में शरीर पहले ग्लूकोज, फिर ग्लाइकोजन और उसके बाद ऊर्जा के लिए फैट तथा मांसपेशियों का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है।
- समय बढ़ने के साथ डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लो ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या के साथ मांसपेशियों में कमी और कई अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
- इतना ही नहीं यदि पर्याप्त पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स या चिकित्सकीय निगरानी न हो तो स्थिति जानलेवा भी बन सकती है।
हालांकि, भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। यह व्यक्ति की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के सेवन तथा मेडिकल मॉनिटरिंग जैसी कई बातों पर निर्भर करता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन के कारण होने वाली दिक्कतें
लंबे समय तक भोजन न करने पर शरीर में केवल कैलोरी की कमी नहीं होती, बल्कि सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर भी प्रभावित होने लगता है।
- ये तत्व दिल की धड़कन, मांसपेशियों के संकुचन, नसों के काम और दिमाग के सामान्य कार्य के लिए बेहद जरूरी हैं।
- जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन, बेहोशी और गंभीर मामलों में दिल की धड़कन अनियमित तक हो सकती है।
- लंबे उपवास के बाद अचानक सामान्य भोजन शुरू करने पर रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा भी बढ़ जाता है।
अंगों की कार्यक्षमता हो जाती है कम
भोजन बंद होने के शुरुआती 24 घंटे के भीतर शरीर पहले ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। इसके बाद ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल बढ़ता है।
- लेकिन जब उपवास लंबा हो जाता है, तब केवल फैट पर्याप्त नहीं रहती और शरीर अपनी मांसपेशियों के प्रोटीन को तोड़कर ग्लूकोज बनाना शुरू कर देता है। इसे कैटाबोलिज्म कहा जाता है।
- लंबे समय तक प्रोटीन की कमी से सांस लेने वाली मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं।
- शरीर की इम्युनिटी घटने लगती है। घाव भरने की क्षमता कम हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लड शुगर-ब्लड प्रेशर पर असर
- लंबे उपवास के दौरान शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। यदि आप पर्याप्त मात्रा में तरल नहीं लेते हैं तो इससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है जो ब्लड प्रेशर लो कर सकता है। बीपी लो होने के कारण चक्कर आते हैं, बेहोशी हो सकती है।
- ज्यादा देर तक भूखे रहने से ब्लड शुगर भी लो हो सकता है। लो ब्लड शुगर से पसीना आने, घबराहट, भ्रम, बोलने में कठिनाई और गंभीर मामलों में बेहोशी तक हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।