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Sleep Disorder: कहीं आप भी तो नहीं हैं स्लीप एपनिया का शिकार? ये दिक्कतें हैं तो जाएं डॉक्टर के पास

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 24 Jun 2026 08:18 PM IST
सार

 स्लीप एपनिया से पीड़ित बहुत से लोगों को खुद पता ही नहीं होता कि वे इस समस्या का सामना कर रहे हैं। अक्सर परिवार के सदस्य बताते हैं कि रात में सांस रुकती है या बहुत तेज खर्राटे आते हैं। 

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स्लीप एप्निया की समस्या - फोटो : Adobe Stock

शरीर स्वस्थ रहे, इसके लिए खानपान और लाइफस्टाइल को ठीक रखना तो जरूरी है ही, साथ ही जरूरी है आप रोजाना रात में अच्छी नींद भी लेते रहें। क्या आप रोज 7-9 घंटे सो पा रहे हैं? अगर नहीं, तो सावधान हो जाइए। इसका शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।



स्ट्रेस, देर से डिनर, शराब जैसी कई आदतें नींद को बाधित करने वाली हो सकती हैं। इसके अलावा जिन लोगों को स्लीप एपनिया की समस्या होती है उनकी भी नींद पूरी नहीं हो पाती।

स्लीप एपनिया नींद संबंधी विकार है जिसमें सोते समय सांस कुछ सेकंड के लिए बार-बार रुक जाती है। इससे ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है और नींद बार-बार टूटती है। कई लोगों को इसका एहसास नहीं होता, लेकिन शरीर लगातार तनाव की स्थिति में रहता है।

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स्लीप एप्निया की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock

स्लीप एपनिया की समस्या

बहुत से लोग यह मानकर चलते हैं कि तेज खर्राटे लेना अच्छी नींद का संकेत है, जबकि कई मामलों में यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या का इशारा हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति की नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती और फिर शुरू होती है। इससे शरीर और मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। 

 

  • ऐसी स्थिति में सुबह उठने पर सिरदर्द, पूरे दिन थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और दीर्घकालिक स्थितियों में हार्ट डिजीज तथा हाई ब्लड प्रेशर जैसी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
  • स्लीप एपनिया से पीड़ित बहुत से लोगों को खुद पता ही नहीं होता कि वे इस समस्या का सामना कर रहे हैं। अक्सर परिवार के सदस्य बताते हैं कि रात में सांस रुकती है या बहुत तेज खर्राटे आते हैं। 
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मोटापा के शिकार लोगों में स्लीप एपनिया का खतरा - फोटो : Adobe stock photos

क्यों होता है ये समस्या?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई स्थितियां  स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
 

  • धूम्रपान के अलावा, मोटापा, गले की संकरी वायुनली, बढ़े हुए टॉन्सिल, शराब का सेवन और कुछ हार्मोनल समस्याएं जोखिम बढ़ा सकती हैं। 
  • गर्दन पर अतिरिक्त चर्बी भी सांस की नली पर दबाव डाल सकती है।


यदि आपके परिवार में कोई सदस्य रात में सांस रुकने की बात बताए या लगातार तेज खर्राटे आएं, तो डॉक्टर से परामर्श लें। 

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स्लीप एप्निया - फोटो : Adobe Stock

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

कई स्थितियां  स्लीप एपनिया के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है अधिक वजन वाले लोग, 40 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क, हाई बीपी या डायबिटीज से पीड़ित लोगों में जोखिम अधिक देखा जाता है।
 

  • लंबे समय तक अगर इस समस्या का पता न चले या उपचार न हो पाए तो स्लीप एपनिया के कारण हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित धड़कन, स्ट्रोक, हार्ट अटैक और याददाश्त संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
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समय पर लें डॉक्टर की सलाह - फोटो : freepik

कैसे पाएं आराम?

डॉक्टर कहते हैं,  स्लीप एपनिया से बचने के लिए वजन कम करना, नियमित व्यायाम, शराब और धूम्रपान से दूरी, पीठ के बजाय करवट लेकर सोना और पर्याप्त नींद लेना आपके लिए मददगार हो सकता है। जिन लोगों को स्लीप एपनिया की समस्या होती है उन्हें डॉक्टर कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) मशीन देते हैं। ये सोते समय वायुमार्ग खुला रखने में मदद करती है।

यदि रोज तेज खर्राटे आते हों, नींद में सांस रुकती हो, दिनभर अत्यधिक नींद आए या सुबह बार-बार सिरदर्द हो, तो समय रहते इसकी जांच कराएं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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