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मां बनने के बाद डिप्रेशन में जा सकती हैं ऐसी महिलाएं, जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 05 Apr 2021 04:33 PM IST
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Study says exposure to harmful chemicals increases risk of postpartum depression
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

गर्भावस्था के दौरान सेहत का ध्यान रखना, गर्भवती और शिशु दोनों कि लिए बहुत जरूरी होता है। इस दौरान की गई कोई भी चूक दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसी से संबंधित हाल ही में हुए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि जो महिलाएं प्लास्टिक में पाए जाने वाले एंडोक्राइन-डिस्रप्टिंग रसायनों के संपर्क में ज्यादा रहती हैं उन्हें प्रसव के बाद डिप्रेशन का खतरा बहुत ज्यादा होता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ये हानिकारक रसायन गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव को प्रभावित कर सकते हैं। आइए जानते हैं कहीं आप भी तो ऐसे रसायनों के संपर्क में नहीं हैं? जिससे भविष्य में आपको इस तरह की समस्याओं का खतरा होने की आशंका हो सकती है।

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Study says exposure to harmful chemicals increases risk of postpartum depression
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एंडोक्राइन सोसाइटी के जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि दुनिया के तमाम देशों में प्रसवोत्तर अवसाद के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रसवोत्तर अवसाद एक गंभीर मनोरोग है, प्रसव के बाद हर 5 में से एक महिला में इसके लक्षण देखने को मिल रहे हैं। 

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Study says exposure to harmful chemicals increases risk of postpartum depression
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

प्रसवोत्तर अवसाद के कारणों को अब तक अच्छी तरह से समझा नहीं जा सका है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तनों को इसका एक महत्वपूर्ण कारक पाया गया है। प्लास्टिक और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों में पाए जाने वाले बिसफेनोल्स और थैलेट जैसे हानिकारक रसायन आपके सेक्स हार्मोन को प्रभावित कर सकते हैं। 

Study says exposure to harmful chemicals increases risk of postpartum depression
Depression

न्यूयॉर्क में एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर के प्रोफेसर और अध्ययन से जुड़े एनवाई जैकबसन का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान थैलेट के संपर्क में आने के कारण प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। प्रोजेस्टेरोन एक प्रकार का हार्मोन है जो महिलाओं में मासिक धर्म को जारी रखने और गर्भाशय को गर्भधारण के लिए तैयार करता है। डॉ जैकबसन कहते हैं कि यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वातावरण में थैलेट रसायन की मात्रा तेजी से बढ़ी है। दुनिया की ज्यादातर महिलाएं इसकी शिकार हो सकती हैं।

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Depression

शोधकर्ताओं ने 139 गर्भवती महिलाओं के मूत्र के सैंपल में बिसफेनोल्स और थैलेट रसायन जबकि रक्त के सैंपल में सेक्स हार्मोन के स्तर को मापने की कोशिश की। अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि जिन महिलाओं के मूत्र के सैंपल में थैलेट की मात्रा अधिक थी उनमें प्रसवोत्तर अवसाद की आशंका भी अधिक पाई गई। 

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