Chandipura Virus: चांदीपुरा वायरस ने बढ़ाई चिंता! जानिए कैसे फैलता है संक्रमण और किन बच्चों को है ज्यादा खतरा
Symptoms of Chandipura Virus: मानसून आते ही गुजरात में चांदीपुरा वायरस ने अपना आतंक मचाना शुरू कर दिया है। अभी तक 22 बच्चों की मौत के मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में अब डॉक्टर्स ने इस मामले में चेतावनी जारी की है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं।
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चांदीपुरा वायरस रैबडोविरिडे परिवार का एक वायरस है। इसकी पहचान सबसे पहले 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया। यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है।
सरकार ने भेजी टीम
गुजरात की राज्य सरकार के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक 184 संदिग्ध मामलों में से 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसी को देखते हुए अब केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए गुजरात और राजस्थान में नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) तैनात की है। इस टीम को संक्रमण की स्थिति का आकलन करने और बीमारी से निपटने के लिए राज्य सरकारों की मदद करने के उद्देश्य से भेजा गया है।
इसके साथ ही इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के तहत बीमारी की निगरानी भी लगातार की जा रही है। यह निगरानी नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) राज्य निगरानी इकाइयों के साथ मिलकर संचालित कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन सभी प्रयासों का मकसद वायरस के फैलने के तरीके, संक्रमण के कारण, मरीजों में दिखने वाले लक्षणों, बीमारी के पैटर्न और संभावित इलाज के विकल्पों को बेहतर तरीके से समझना है। इस जानकारी के आधार पर संक्रमण को रोकने और नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित रणनीति तैयार की जाएगी।
- यह वायरस मुख्य रूप से रेत मक्खी के काटने से फैलता माना जाता है।
- कुछ शोधों में मच्छरों और अन्य कीटों की संभावित भूमिका पर भी अध्ययन किए गए हैं, लेकिन प्रमुख वाहक रेतीली मक्खी मानी जाती है।
- यह वायरस सामान्य संपर्क, साथ बैठने, हाथ मिलाने या भोजन साझा करने से फैलने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है।
- तेज बुखार
- तेज सिरदर्द
- उल्टी
- शरीर में कमजोरी
- दौरे
- बेहोशी या भ्रम की स्थिति
- मस्तिष्क में सूजन
चांदीपुरा वायरस तेजी से असर करने वाला संक्रमण हो सकता है। गंभीर मामलों में कुछ बच्चों की हालत 24–48 घंटे के भीतर बिगड़ सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर जटिलताएं बढ़ सकती हैं, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी है।