Heatwaves Tips: भारत में इस वक्त गर्मी का कहर अपने चरम पर है, और कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर चुका है। सूरज की तपिश और लू के थपेड़े जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग ने जुलाई तक एक लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव की चेतावनी दी है, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थिति और भी गंभीर होने की आशंका है।
Heatwave Safety Tips: 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा, इस भीषण गर्मी में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां
गर्मी के मौसम में अक्सर लोग कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। उत्तर भारत में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है, ऐसे में आइए इस लेख में जानते हैं कि किन गलतियों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
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गहरे रंग के टाइट कपड़े पहनना
गहरे रंग के कपड़े, जैसे काला या नीला, सूरज की गर्मी को ज्यादा अवशोषित करते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ता है। टाइट कपड़े पसीने को सूखने से रोकते हैं और त्वचा को सांस लेने में दिक्कत होती है, जिससे घबराहट महसूस हो सकती है। ऐसे में हल्के रंग के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें, जो हवा को पास होने दें।
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पानी कम पीना
गर्मी में पसीने के कारण शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से निकलते हैं। कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और किडनी की समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में कम से कम दिनभर में 8-10 गिलास पानी पिएं। साथ ही नारियल पानी, नींबू पानी, लस्सी या ORS जैसे पेय को अपनी डाइट में शामिल करें।
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दोपहर में बाहर घूमना
दोपहर 12 से 3 बजे तक सूरज की किरणें सबसे तीव्र होती हैं, जिससे हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। ऐसी भीषण गर्मी में अक्सर गर्मी के कारण बेहोश होने की खबरें आती हैं। इसलिए दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें।
तले हुए और मसालेदार भोजन शरीर की गर्मी बढ़ाते हैं और पाचन को धीमा करते हैं, जिससे असहजता होती है। भीषण गर्मी के मौसम में भारी भोजन से बचना चाहिए। हल्का और पानी से भरपूर भोजन, जैसे खीरा, तरबूज, दही और सलाद, को डाइट में शामिल करना चाहिए। छोटे-छोटे अंतराल में भोजन करें और ताजा फलों का रस पिएं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।