अनियमित जीवनशैली, कभी पढ़ाई या काम का दबाव तो कभी रिश्तों में दरार, व्यक्ति के जीवन में तनाव होना आम है। कई बार हम बहुत चाहते हुए भी इससे बच नहीं पातें। कई बार तो हमें पता भी नहीं चल पाता कि हम किन वजहों से तनाव में होते हैं। दरअसल, शरीर में बदलाव की प्रतिक्रिया को तनाव कहते हैं। शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तरीके से शरीर प्रतिक्रिया करता है। आइए इस बारे में और ज्यादा जानते हैं फिजियोथेरेपी, नेचुरोपैथी और एक्यूप्रेशर कंसलटेंट डॉ. राजेश राणा से:
इस हार्मोन के कारण बढ़ता है तनाव, इससे बचना है तो वर्तमान में जीना है जरूरी, करें ये उपाय
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डॉ. राणा बताते हैं कि तनाव तब नकारात्मक हो जाता है जब किसी मनुष्य को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। तनाव के कारण सामान्य सांस की प्रक्रिया भी बदल जाती है, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है। शरीर के लचीलापन पर बुरा असर पड़ता है। तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे स्पाइन के आसपास की मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव आने लगता है। कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने पर मांसपेशियों की सघनता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तनाव से बचना है तो हमेशा वर्तमान में जीने की कोशिश करें।
फिजियोथेरेपी, नेचुरोपैथी और एक्यूप्रेशर कंसलटेंट डॉ. राजेश राणा बताते हैं तनाव से उत्पन्न दर्द के उपचार का पहला सिद्धांत तनाव का कारण जानना और रोगी को तनाव मुक्त करना है। तनावग्रस्त रोगी की जीवनशैली में बदलाव बेहद अहम हो जाता है। कई बार विटामिन डी की कमी से भी रोगी में चिड़चिड़ा बढ़ जाता है। वह तनाव में रहने लगता है।
लक्षण
- तनाव से सिर में दर्द होता है।
- पेट की समस्याएं लगातार बनी रहती हैं।
- अच्छी नींद नहीं आती है।
- छाती में भी दर्द हो सकता है।
- गर्दन व कमर का दर्द भी तनाव से हो सकता है।
डॉ. राणा के अनुसार, इसके उपचार में एक्यूप्रेशर और फिजियोथेरेपी काफी कारगर है। फिजियोथेरेपी की तमाम आधुनिक मशीनें आ चुकी हैं, जिससे शरीर की ऐंठन व दर्द को खत्म किया जा सकता है। व्यायाम से भी खोई हुई मांसपेशियों को प्राप्त किया जा सकता है, जिससे कि दर्द की पुनरावृत्ति न हो।