Medically Reviewed by Ms. Priya Pandey
डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- बी.एस.सी. (मानव पोषण)
अनुभव- 8 वर्ष
भारत में अधिकतर लोग किसी न किसी रूप में चने का सेवन करते हैं। कोई भीगा हुआ चना खाता है तो किसी को भुना हुआ चना पसंद होता है। भारत के गांवों में रहने वाले लोग ज्यादातर भुना हुआ चना खाना पसंद करते हैं। यह उनके सबसे लोकप्रिय अल्पाहार (स्नैक्स) में से एक है। यह सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, खनिज, फोलेट और फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें कैलोरी भी बहुत कम होती है। ऐसे में नियमित रूप से भुने हुए चने के सेवन से वजन और मोटापा कम करने में काफी मदद मिलती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि रोजाना एक मुट्ठी भुना हुआ चना खाने से लगभग 50 कैलोरी शरीर में जाती है। इस तरह यह कैलोरी की समस्या भी दूर करता है और भूख को भी मिटाता है। आइए जानते हैं भुना चना खाने के अन्य फायदों के बारे में...
आज का हेल्थ टिप्स: वजन कम करना हो या इम्यूनिटी मजबूत, भुना चना देता है गजब के फायदे
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इम्यूनिटी को करता है मजबूत
- भुने हुए चने में मैंगनीज, थायामिन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे खनिज पाए जाते हैं और ये खनिज प्रतिरक्षा तंत्र यानी इम्यूनिटी को मजबूत करने और बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। रोजाना इसके सेवन से शरीर को पूरा दिन सक्रिय रखने में मदद मिलती है।
डायबिटीज में भी है लाभकारी
- काले चने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और विशेषज्ञ कहते हैं कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स खून में ग्लूकोज के स्राव के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में नियमित रूप से भुने हुए चने के सेवन से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिलती है।
एनीमिया से करता है बचाव
- भुने काले चने आयरन के अच्छे स्रोत होते हैं। इसके सेवन से एनीमिया से बचाव करने में मदद मिलती है, क्योंकि यह बीमारी आयरन की कमी से होती है। इसलिए गर्भवती और मासिक धर्म के दौर से गुजर रही महिलाओं को भुने हुए चने खाने की सलाह दी जाती है।
दिल को भी रखता है स्वस्थ
- भुने हुए चने के नियमित सेवन से हृदय को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। चूंकि इसमें फोलेट और मैग्नीशियम की भरपूर मात्रा होती है, जिससे रक्त नलिकाओं को मजबूत करने में मदद मिलती है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं।
नोट: प्रिया पांडेय योग्य और अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।