यशा माथुर
आजकल बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है। फल, सब्जियां, दूध, अंडे और अनाज भी इससे अछूते नहीं है। सभी में मिलावट और रसायन शामिल हैं, जो शरीर में जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स की पूर्ति ही नहीं होने देते। इस कारण आप और आपके परिवार के अन्य सदस्य बार-बार बीमार पड़ते रहते हैं। बच्चों की नजर कम उम्र में ही कमजोर हो रही है। एनीमिया, थकान, कमजोरी, हड्डियों की समस्याएं, त्वचा रोग और तंत्रिका संबंधी विकार होने लगे हैं। आप डॉक्टर से बात करती हैं। वह शरीर में पोषक तत्वों की कमी को इसका कारण बताते हैं और आपको सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। लेकिन बच्चों और आपको सप्लीमेंट लेना पसंद नहीं। ऐसे में आप विटामिन पैच का उपयोग कर सकती हैं।
बेहतर विकल्प
विटामिन पैच शरीर में विटामिन, कैल्शियम और अन्य मिनरल पहुंचाने का बेहतर माध्यम है। यदि आपके शरीर में विटामिन की कमी जांची गई है और आप डाइट से इस कमी को पूरी नहीं कर पा रही हैं, यानी कि आपका शरीर खाने से पर्याप्त मात्रा में विटामिन अवशोषित नहीं कर पा रहा है तो आपको विटामिन सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन सप्लीमेंट्स आपको रास नहीं आते। हफ्ते भर आप इसका सेवन करती हैं और फिर छोड़ देती हैं, जिस वजह से यह कमी ऐसे ही बनी रहती है। ऐसे में आप विटामिन पैच का इस्तेमाल करें। विटामिन पैच के जरिए डाइट में मामूली बदलाव करने के साथ ही शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सकती है।
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विटामिन पैच
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कैसे करता है काम
विटामिन पैच आपको आवश्यक पोषक तत्व देते हैं, लेकिन प्रश्न है कि यह काम कैसे करते हैं? असल में, विटामिन पैच एक खास मैकेनिज्म के जरिए काम करते हैं, जिसे ट्रांसडर्मल ड्रग डिलीवरी सिस्टम कहा जाता है। यह एक तरह का ट्रांसडर्मल पैच यानी त्वचा के माध्यम से पोषण पहुंचाने वाला सप्लीमेंट है, जिन्हें त्वचा पर लगाने के लिए ही तैयार किया गया है। इन पैचेज द्वारा नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से विटामिन त्वचा के छिद्रों के जरिए शरीर में पहुंचाए जाते हैं। यह दिखने में बैंडेज जैसे होते हैं। इस पैच के चिपकने वाली परत पर विटामिन्स, मिनरल्स और हर्बल तत्व लगे रहते हैं।
जब यह परत त्वचा पर चिपक जाती है तो शरीर की गर्मी से सक्रिय होकर पोषक तत्वों का स्राव करने लगती है। इन तत्वों को त्वचा अवशोषित करती है और शरीर की सबसे छोटी रक्त नलिकाओं तक पहुंचा देती है। जब इनका संचरण बड़ी रक्त नलिकाओं तक हो जाता है तो इन्हें शरीर के उस हिस्से में पहुंचा दिया जाता है, जहां इनकी जरूरत है। इस प्रकार शरीर के उस हिस्से में विटामिन्स और मिनरल्स की कमी की भरपाई कर दी जाती है और वह हिस्सा स्वस्थ हो जाता है।
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बच्चों को पसंद
जिन बच्चों में किसी विशेष विटामिन की कमी है, उनके लिए विटामिन पैच एक अच्छा विकल्प हो सकता है। असल में बच्चे गोली या सिरप लेने में बहुत आनाकानी करते हैं। आप जब जबरदस्ती उन्हें गोली या सिरप देती हैं तो वे उल्टी कर देते हैं। इस सूरत में यह उनके लिए विशेष रूप से एक प्रभावी उपाय साबित हो सकता है। इससे उनमें नियंत्रित मात्रा में पोषण आपूर्ति होती रहेगी। लेकिन ध्यान रखना होगा कि बच्चों की त्वचा पतली होती है, इसलिए पैच में लगे चिपकने वाले पदार्थ बच्चों को एलर्जी न करें। बच्चों पर विटामिन पैच लगाते समय सतर्कता बरतें। आप इसे त्वचा के ऐसे हिस्से पर लगाएं, जहां से बच्चा इसे बार-बार छू न पाए और मुंह में न ले। बच्चा कोई सप्लीमेंट ले रहा है तो डॉक्टर की सलाह पर ही पैच का इस्तेमाल करें।
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सावधानी की जरूरत
यह तो आप जान ही गई कि विटामिन पैच से विटामिन्स, फोलेट, मैग्नीशियम, आयरन और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर-सपोर्टिंग तत्व निकलते हैं। एक बार विटामिन पैच लगाने के बाद खून में पोषक तत्वों के घुलने की प्रक्रिया बहुत ही धीरे-धीरे और लगातार होती रहती है, लेकिन इनका उपयोग क्या कोई मुश्किल भी पैदा कर सकता है? क्या इन्हें उपयोग करने से पहले सावधानियां बरतने की जरूरत है?
तो जिनकी त्वचा अधिक संवेदनशील होती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही इसका उपयोग करना चाहिए। साथ ही जब भी इनका उपयोग करें तो त्वचा साफ और सूखी होनी चाहिए। पसीने वाली जगह पर भी पैच न लगाएं, वरना जलन हो सकती है, त्वचा में खुजली हो सकती है, लाल पड़ सकती है या कोई एलर्जी भी हो सकती है। बहुत लंबे या बहुत कम समय तक पैच न लगाएं। अगर बहुत ज्यादा पैच इस्तेमाल किए जाएं तो ओवरडोज का खतरा हो सकता है, वहीं यदि जल्दी हटा देंगी तो प्रभाव कम रहेगा। साथ ही अगर आपकी त्वचा पर बाल अधिक हैं और आपने इसे उसी जगह पर लगा दिया है तो आपको इसे हटाते हुए परेशानी होगी। इसलिए इन्हें ऐसी जगह लगाएं, जहां बाल न हों।
वहीं आपकी त्वचा का हाइड्रेटेड होना भी जरूरी है। शरीर को अच्छी तरह मॉइश्चराइज करें, ताकि विटामिन पैच ठीक से काम कर सके। कुछ पैच बहुत ज्यादा चिपकने वाले होते हैं, जिससे त्वचा पर ग्लू के निशान रह सकते हैं और हटाने पर त्वचा पर हल्की सूजन भी दिख सकती है, जिसे अर्टिकेरिया कहते हैं। विटामिन पैच को आप ठंडी और सूखी जगह ही स्टोर करें। यदि पैकिंग से पैचेज निकाल लिए गए हैं तो हवा बंद डिब्बे में रखें। इन्हें हर दिन या कुछ अंतराल पर लगाया जा सकता है, लेकिन डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है, ताकि अधिकतम सुरक्षा और प्रभाव मिल सके। ध्यान रहे, इनकी एक्सपायरी डेट होती है। इसका ध्यान रखें और एक्सपायर होने पर उपयोग न करें।
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पौष्टिक आहार जरूरी
दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसिन की निदेशक-प्रोफेसर डाॅ. जुगल किशोर कहते हैं, पैच के रूप में आजकल मल्टीविटामिन, विटामिन बी12 और विटामिन डी के पैच ज्यादा उपयोग किए जा रहे हैं। ये कुछ लोगों के लिए काफी उपयोगी भी सिद्ध हो रहे हैं, लेकिन विटामिन पैच से त्वचा के जरिए जो विटामिन अवशोषण होता है, उसकी मात्रा काफी कम होती है। वहीं यह पैच कितना उपयोगी है, इस पर रिसर्च जारी है। इसलिए अगर आपके शरीर में विटामिन की कमी है तो उस कमी की पूर्ति के लिए केवल पैच पर निर्भर न रहें, बल्कि उपयुक्त खुराक और पौष्टिक आहार से इस कमी को पूरा करें।
आजकल बच्चों से लेकर हर उम्र की महिलाओं में विटामिन की कमी हो रही है। इसलिए डॉक्टर शरीर में विटामिन की कमी को देखते हुए दवा और इंजेक्शन देते हैं, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की अच्छी डोज चली जाती है और आप स्वस्थ महसूस करने लगती हैं। इसलिए अगर आपको किसी भी पोषक तत्व की कमी महसूस हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई कदम उठाएं।
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