क्या आपके माता-पिता को भी अब किताब पढ़ने में दिक्कत होती है, रात में गाड़ी चलाते समय सामने की लाइटें चुभती हैं या बार-बार चश्मा बदलने के बाद भी नजर साफ नहीं हो रही है? तो हो सकता है कि ये मोतियाबिंद का शुरुआती संकेत हो।
Cataract Problem: क्या केवल ऑपरेशन ही है मोतियाबिंद का इलाज? जानिए क्यों होती है आंखों की ये बीमारी
मोतियाबिंद दुनिया में अंधेपन के सबसे बड़े कारणों में से एक है, लेकिन अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही इलाज से अधिकांश लोगों की रोशनी वापस लाई जा सकती है।
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मोतियाबिंद का बढ़ता खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि डायबिटीज, आंख में चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड के इस्तेमाल और धूम्रपान के कारण भी मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है। मोतियाबिंद की अब तक कोई दवा या आई ड्रॉप नहीं है जो इसे पूरी तरह से ठीक कर सके। शुरुआती अवस्था में चश्मे से देखने में आराम मिल सकता है, हालांकि जब धुंधलापन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तब डॉक्टर इसकी सर्जरी कराने की सलाह देते हैं।
आइए जानते हैं कि मोतियाबिंद क्यों होता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और क्या बिना ऑपरेशन के भी इसका इलाज हो सकता है?
क्यों हो जाती है मोतियाबिंद की समस्या?
आंखों के प्राकृतिक लेंस के धीरे-धीरे धुंधला हो जाने की स्थिति को मोतियाबिंद कहा जाता है। सामान्य स्थिति में यह लेंस पारदर्शी होता है और प्रकाश को रेटिना तक पहुंचाता है।
- उम्र बढ़ने के साथ लेंस में बदलाव होने लगते हैं, जिससे पारदर्शिता चली जाती है। इससे आपको धुंधला दिखाई देता है।
- कुछ बच्चों में जन्मजात मोतियाबिंद भी पाया जाता है, जो गर्भावस्था के दौरान संक्रमण या आनुवंशिक कारणों से हो सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सकता है, लेकिन उम्र से जुड़ा मोतियाबिंद पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।
कैसे करें इसकी पहचान?
मोतियाबिंद धीरे-धीरे विकसित होता है, इसलिए शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं।
- धुंधला दिखना, रात में देखने में परेशानी, सामने की तेज रोशनी से चकाचौंध होना, रंग फीके दिखाई देना, बार-बार चश्मे का नंबर बदलना इसके सामान्य संकेत हैं।
- यदि ये लक्षण बढ़ रहे हों, तो आंखों की जांच करानी चाहिए।
- शुरुआती पहचान और सही समय पर इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है।
क्या मोतियाबिंद का ऑपरेशन ही सबसे प्रभावी इलाज है?
बीमारी की शुरुआत में चश्मे का नंबर बदलने, बेहतर रोशनी का उपयोग करने से कुछ समय तक देखने में आराम मिल सकता है, लेकिन इससे मोतियाबिंद समाप्त नहीं होता।
- मोतियाबिंद की वजह से पढ़ने, गाड़ी चलाने और रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी होने लगती है, ऐसे में सर्जरी सबसे प्रभावी इलाज होती है।
- ऑपरेशन के दौरान धुंधले प्राकृतिक लेंस को निकालकर उसकी जगह कृत्रिम इंट्राऑक्युलर लेंस लगाया जाता है।
- अगर मोतियाबिंद बहुत अधिक पक जाए, तो ऑपरेशन कठिन हो सकता है।
60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, डायबिटीज के मरीजों और जिनके परिवार में मोतियाबिंद पहले से रहा हो, उन्हें नियमित आंखों की जांच करानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।