आजकल फिट रहने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करने के लिए बड़ी संख्या में लोग विटामिन, मिनरल्स और हर्बल सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया, इंटरनेट और दोस्तों की सलाह पर बिना किसी जांच या चिकित्सकीय परामर्श के सप्लीमेंट्स लेना एक आम चलन बन चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लीमेंट हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता।
Nutrition Tips: सप्लीमेंट्स लेते हैं तो जान लीजिए ये बातें, फायदे की जगह कहीं बढ़ा न दे आपकी मुश्किलें
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की निश्चित मात्रा में आवश्यकता होती है। यदि इनका सेवन जरूरत से ज्यादा किया जाए, तो फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।
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विटामिन-डी और कैल्शियम भी पहुंचा सकते हैं नुकसान
विटामिन डी और कैल्शियम मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी हैं। हालांकि, जरूरत से अधिक मात्रा में इनका सेवन शरीर में कैल्शियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ा सकता है।
- इससे किडनी स्टोन, पेट दर्द, मतली, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- गंभीर मामलों में अतिरिक्त कैल्शियम धमनियों में जमा होने लगता है, जिससे रक्त संचार प्रभावित हो सकता है और भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
आयरन, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 भी सीमित मात्रा में सेवन करें
बहुत से लोग बिना जांच कराए आयरन सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं, जबकि शरीर में आयरन की अधिकता भी नुकसानदायक हो सकती है। अतिरिक्त आयरन दिल, लिवर और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
- इसी तरह, जरूरत से ज्यादा मैग्नीशियम लेने से लो ब्लड प्रेशर, मतली, कमजोरी और किडनी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों की किडनी पहले से कमजोर है, उनमें यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड को दिल के लिए लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसकी अत्यधिक मात्रा खून को जरूरत से ज्यादा पतला कर सकती है।
- इससे ब्लीडिंग और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है, विशेष रूप से उन लोगों में जो पहले से खून को पतला करने की दवाएं ले रहे हैं।
संतुलित आहार है सबसे सुरक्षित विकल्प
अधिकांश लोगों की पोषण संबंधी जरूरतें संतुलित और पौष्टिक भोजन से पूरी हो सकती हैं। मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, दूध, मेवे और बीज शरीर को विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट प्रदान करते हैं।
इसी वजह से चिकित्सक अक्सर सप्लीमेंट्स शुरू करने से पहले खान-पान सुधारने की सलाह देते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए उतना ही जरूरी है। केवल सप्लीमेंट्स के भरोसे बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जाने-माने चिकित्सक डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि आजकल कई लोग सोशल मीडिया या इंटरनेट पर जानकारी देखकर खुद ही सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि विटामिन या हर्बल उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, जबकि इनकी अधिक मात्रा शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में सप्लीमेंट्स लेना बेहद जरूरी होता है।
उदाहरण के लिए विटामिन डी की कमी, आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया, गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड की जरूरत या ऐसे मरीज, जिनके शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण सही तरीके से नहीं हो पाता। ऐसी सभी स्थितियों में चिकित्सक की सलाह और निगरानी में ही सप्लीमेंट्स लेने चाहिए। सप्लीमेंट्स दवा की तरह होते हैं, इसलिए इन्हें बिना जरूरत और बिना चिकित्सकीय सलाह के लेना सुरक्षित नहीं माना जाता।
यदि आपको लगता है कि शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी है, तो पहले जांच कराएं और विशेषज्ञ से परामर्श लें। सही मात्रा, सही समय और सही सलाह के साथ लिया गया सप्लीमेंट ही लाभ पहुंचाता है, जबकि बिना सलाह लिया गया सप्लीमेंट फायदे के बजाय नुकसान का कारण बन सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।