रक्तदान को महादान माना जाता है, आपका ये दान किसी की जिंदगी बचाने वाला हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित और सुरक्षित तरीके से किया गया रक्तदान डोनर की सेहत के लिए भी कई तरीके से फायदेमंद होता है। भारत में हर दिन लगभग 12,000 मरीज समय पर रक्त न मिल पाने के कारण मर जाते हैं। देश में रक्तदान के डिमांड और सप्लाई में काफी अंतर है। यही कारण है कि लोगों से समय-समय पर रक्तदान करने की अपील की जाती रही है।
World Blood Donor Day 2026: कितने दिनों के अंतराल में कर सकते हैं रक्तदान? एक बार में कितना खून निकाला जाता है
रक्तदान करने वाले व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच और वजन कम से कम 45-50 किलोग्राम होना चाहिए। रक्तदान से पहले हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर और सामान्य स्वास्थ्य की जांच भी की जाती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या रक्तदान से कमजोर हो जाता है शरीर?
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि ट्रांसजेंडर-समलैंगिक रक्तदान कर सकते हैं या नहीं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, रक्तदान सिर्फ किसी की जान बचाने का जरिया नहीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद आदत हो सकती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि ब्लड डोनेट करने से शरीर कमजोर हो जाता है, लेकिन सच्चाई ये है कि स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित अंतराल पर रक्तदान करना सुरक्षित माना जाता है।
रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही हफ्तों में नए रक्त कोशिकाओं का निर्माण शुरू कर देता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन और शरीर की कई प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। यही वजह है कि दुनियाभर में लाखों लोग स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं।
कितने दिन के अंतराल पर कर सकते हैं ब्लड डोनेशन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत में आमतौर पर स्वस्थ पुरुष और महिलाएं हर 3 महीने (90 दिन) के अंतराल पर रक्तदान कर सकती हैं।
- हर दिन या हर महीने रक्तदान नहीं किया जा सकता।
- रक्तदान के लिए एक तय समय-सीमा और स्वास्थ्य मानक होते हैं। रक्तदान करने वाले का हीमोग्लोबिन, वजन और स्वास्थ्य सामान्य होना चाहिए।
ये बातें भी जान लीजिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एक बार ब्लड डोनेशन के बाद शरीर को खोई हुई लाल रक्त कोशिकाओं और आयरन की भरपाई के लिए समय चाहिए होता है।
- एक बार के डोनेशन में किसी व्यक्ति से 1 यूनिट (350-450 मिली) रक्त लिया जाता है।
- ब्लड सेल्स और आयरन की कमी पूरा होने में आमतौर पर 90 दिनों का समय पर्याप्त माना जाता है। इसके बाद दोबारा डोनेशन किया जा सकता है।
- रक्तदान करने वाले व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच और वजन कम से कम 45-50 किलोग्राम होना चाहिए।
- डोनर को डायबिटीज, एचआईवी या फिर कोई संक्रामक बीमारी नहीं होनी चाहिए।
रक्तदान के क्या फायदे हैं?
नियमित रक्तदान को अध्ययनों में कई प्रकार से फायदेमंद बताया गया है।
- नियमित रक्तदान रक्त की चिपचिपाहट यानी ब्लड खून का गाढ़ापन को कम करने में मदद कर सकता है। इससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव कम पड़ सकता है।
- हर रक्तदाता की रक्तदान से पहले कई जरूरी स्वास्थ्य जांच की जाती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन स्तर, ब्लड प्रेशर, शरीर का तापमान और नाड़ी की जांच शामिल होती है। इससे व्यक्ति को अपनी किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं।
- रक्तदान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे किसी जरूरतमंद की जान बच सकती है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि दूसरों की मदद करने से मानसिक संतुष्टि बढ़ती है और सकारात्मक भावनाएं विकसित होती हैं।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।