कविवर रहीम ने कहा था- ‘बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय। रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।’
Mental Health & Anger: क्या आपको भी गुस्से पर नहीं रहता काबू? ‘90 सेकंड रूल’ बदल सकता है आपकी जिंदगी
गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे कैसे संभालना है, यही आपकी समझदारी और रिश्तों की परीक्षा होती है। जब भी किसी बात पर गुस्सा आए, खुद को याद दिलाएं कि यह भावना स्थायी नहीं है। आप धीरे-धीरे गहरी सांस लें और शरीर और दिमाग दोनों शांत करें।
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क्या है यह नियम?
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की न्यूरोएनाटॉमिस्ट, डॉ. जिल बोल्ट टेलर के अनुसार, जब हमें गुस्सा आता है, दुख होता है या कोई बात दिल को ठेस पहुंचाती है, तब हमारे मस्तिष्क में एक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।
- इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और भावनाएं अधिक तीव्र महसूस होने लगती हैं।
- डॉ. टेलर के मुताबिक यह रासायनिक प्रतिक्रिया केवल 90 सेकंड तक रहती है।
- यदि आप इस दौरान खुद को शांत रखें और तुरंत प्रतिक्रिया न दें, तो गुस्से की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
- लेकिन यदि इसके बाद भी वही भावना बनी रहती है, तो उसका कारण उस बात को बार-बार मन में दोहराना हो सकता है।
भावनात्मक संतुलन का रखें खास ध्यान
अक्सर रिश्ते किसी बड़ी वजह से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों पर दिए गए तीखे जवाबों के कारण टूटते हैं।
पति-पत्नी, दोस्ती या प्रेम संबंध, हर रिश्ते में भावनात्मक संतुलन बेहद जरूरी होता है। मान लीजिए, किसी करीबी ने आपसे ऐसी बात कह दी जिससे आपको ठेस पहुंची। यदि आप उसी समय गुस्से में प्रतिक्रिया देती हैं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
लेकिन यदि आप 90 सेकंड तक शांत रहकर गहरी सांस लें, पानी पीएं या कुछ देर चुप रहें, तो आपका दिमाग धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है। इससे आप अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ अपनी बात रख पाती हैं।
गुस्सा आए तो क्या करें?
जब भी किसी बात पर गुस्सा आए, खुद को याद दिलाएं कि यह भावना स्थायी नहीं है। आप धीरे-धीरे गहरी सांस लें और शरीर और दिमाग दोनों शांत करें। यह तनाव को कम करने में मदद करेगा।
- चाहें तो उस समय मोबाइल, संगीत या थोड़ी वॉक का सहारा लें। इससे दिमाग नकारात्मक विचारों से बाहर आता है।
- इसके बाद अपनी बात समझाने के लिए शब्दों का सही चयन करें।
- इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि धीरे-धीरे यह आदत आपको अधिक धैर्यवान और समझदार बना देती है।
क्या है विशेषज्ञ की सलाह?
रिलेशनशिप काउंसलर स्नेहा मिश्रा कहती हैं, गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे कैसे संभालना है, यही आपकी समझदारी और रिश्तों की परीक्षा होती है। हर रिश्ता प्यार, धैर्य और समझ से चलता है। ऐसे में केवल 90 सेकंड यानी डेढ़ मिनट का धैर्य कई साल पुराने रिश्ते को टूटने से बचा सकता है। इसलिए अगली बार जब भावनाएं हावी हों, तो बस 90 सेकंड रुकिए, संभव है आपका रिश्ता और भी मजबूत हो जाए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।