मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बनी हुई हैं। ब्रेन ट्यूमर ऐसी ही एक गंभीर समस्या है जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है।
World Brain Tumor Day: हर साल 2.5 लाख लोगों की जान ले लेता है ब्रेन ट्यूमर, समय पर इसकी पहचान कैसे करें?
- ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही सभी के मन में पहला ख्याल आता है कि ये कैंसर है। हालांकि हर बार ट्यूमर कैंसरकारक हो ये जरूरी नहीं है।
- ब्रेन ट्यूमर और उसकी चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 8 जून को वर्ल्ड ट्यूमर डे मनाया जाता है।
ब्रेन में ट्यूमर की समस्या
ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही सभी के मन में पहला ख्याल आता है कि ये कैंसर है। हालांकि हर बार ट्यूमर कैंसरकारक हो ये जरूरी नहीं है।
कल्पना कीजिए कि कोई दुश्मन आपके ही तंत्रिकाओं के जाल के के भीतर चुपचाप अपनी सेना बढ़ा रहा हो। ब्रेन ट्यूमर ठीक ऐसा ही है जो न्यूरॉन्स के बीच कोशिकाओं के बढ़ने के कारण होता है। आमतौर पर ये ट्यूमर कैंसर वाले नहीं होते हैं पर कुछ स्थितियों में इससे कैंसर का जोखिम हो भी सकता है।
ब्रेन ट्यूमर जो मस्तिष्क में शुरू होते हैं उन्हें प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। कभी-कभी, कैंसर शरीर के अन्य भागों से भी मस्तिष्क में फैलता है, ये ट्यूमर सेकेंडरी ब्रेन ट्यूमर होते हैं। मस्तिष्क में ट्यूमर का आकार बहुत छोटे से लेकर बड़ा तक होता है। इसकी समय पर पहचान हो जाए तो सर्जरी और अन्य इलाज के माध्यम से ट्यूमर को निकाला जा सकता है और रोगी की जान बचाई जा सकती है।
अक्सर लोगों को शुरुआती स्थिति में ब्रेन ट्यूमर होने पर कोई लक्षण नहीं दिखते, खासकर अगर यह बहुत छोटा हो। हालांकि जब ये बड़ा होने लगता है तो इसके कारण कई दिक्कतें हो सकती हैं।
- इसमें तेज सिरदर्द होना सबसे प्रमुख है, जो सुबह में अधिक गंभीर हो सकता है।
- दौरे पड़ने, सोचने-बोलने या भाषा समझने में कठिनाई।
- व्यक्तित्व में बदलाव की समस्या।
- आपके शरीर के एक हिस्से या एक तरफ कमजोरी या लकवा जैसी समस्या।
- संतुलन बनाने में कठिनाई या चक्कर आना।
- दृष्टि संबंधी समस्याएं और सुनने में दिक्कत।
- चेहरे का सुन्न होना या झुनझुनी।
- अक्सर मतली या उल्टी लगना, भ्रम की समस्या बने रहना।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
रांची रिम्स में न्यूरोसर्जन डॉ विकास कुमार बताते हैं, वैसे तो सिरदर्द आम समस्या है, लेकिन कुछ तरह के सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए अक्सर बने रहने वाली इस समस्या को बिल्कुल अनदेखा नहीं करना चाहिए। हर बार पेनकिलर लेना सही समाधान नहीं है, इसकी जांच कराना और समस्या के कारणों को समझना जरूरी है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार केवल एक तिहाई ब्रेन ट्यूमर ही कैंसर का कारण बनते हैं, लेकिन चाहे वे कैंसरयुक्त हों या नहीं, ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के कामकाज और आपके स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित कर सकते हैं। ट्यूमर जब बडे़ हो जाते हैं तो इसके कारण आस-पास की नसों, रक्त वाहिकाओं और ऊतकों पर असर पड़ने लगता है, यही कारण है कि इसका समय पर निदान और इलाज जरूरी हो जाता है।
इससे कैसे बचें?
डॉक्टर कहते हैं, ब्रेन ट्यूमर को रोकने का कोई तरीका नहीं है। अगर आपको ब्रेन ट्यूमर हो जाता है, तो इसका समय रहते उपचार किया जाना जरूरी हो जाता है। ब्रेन ट्यूमर का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर कैंसरकारक है या नहीं। इसमें दवाओं के साथ सर्जरी जैसे उपायों की मदद ली जा सकती है।
अगर आपके परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास है तो आपमें भी इसका खतरा हो सकता है। इस बारे में डॉक्टर से बचाव और सावधानियों के बारे में जानकारी लें। लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखकर कैंसर के जोखिमों को कम किया जा सकता है। पौष्टिक और एंटी-कैंसर वाले खाद्य पदार्थों को आहार का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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