कैंसर दुनियाभर के लिए मौजूदा समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है। ये बीमारी न केवल मरीज के शरीर को प्रभावित करती है, बल्कि उसके परिवार, समाज और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गहरा असर डालती है। इतना ही नहीं कैंसर को वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक माना जाता है, हर साल ये बीमारी लाखों लोगों की जान ले रही है। अकेले साल 2022 में इस बीमारी के कारण 97 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई।
World Cancer Day 2026: समय रहते करा लिए कैंसर के ये पांच टेस्ट तो बच सकती है जान, टल सकती है बड़ी अनहोनी
Cancer Ke Liye Kaun Se Test Karvayen: स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर का समय रहते पता चल जाए तो बड़े खतरे को टाला जा सकता है।आम तौर पर लोग जिन टेस्ट को टालते रहते हैं, वे असल में आपकी जान बचा सकते हैं।
स्क्रीनिंग बढ़ाकर कम कर सकते हैं कैंसर का खतरा
भारतीय आबादी में भी कैंसर के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। 2024 में, भारत में 15 लाख से ज्यादा कैंसर के नए मामले सामने आए। 2019 में 13.5 लाख से बढ़कर 2024 में इसके नए मरीजों की संख्या 15.3 लाख हो गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कैंसर हमारे लिए कितनी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर की स्क्रीनिंग बढ़ाकर इस रोग के कारण होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। आम तौर पर लोग जिन टेस्ट को टालते रहते हैं, वे असल में आपकी जान बचा सकते हैं।
आइए जान लेते हैं कि कैंसर को रोकथाम के लिए सभी लोगों को कौन-कोन से टेस्ट जरूर कराते रहने चाहिए।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से एक बातचीत में वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ हिमांशु पवार बताते हैं, देश में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण ये है कि ज्यादातर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी काफी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है और कैंसर काफी फैल चुका होता है। यहां से इलाज के सफल होने और मरीज के जान बचने की संभावना काफी कम हो जाती है।
अगर नियमित रूप से कुछ जांच की आदत बना ली जाए तो कैंसर की समय पर पहचान हो सकेगी, शरीर में बढ़ने से इसे रोका जा सकेगा साथ ही रोगी की जान बचने की संभावना भी काफी बढ़ जाएगी। जिन लोगों में कैंसर का जोखिम है जैसे अगर परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा है, आप धूम्रपान-शराब का सेवन अधिक करते हैं, रसायनों के संपर्क में रहते हैं तो डॉक्टर की सलाह पर कुछ जांच नियमित रूप से कराते रहें। सुरक्षात्मक रूप से भी सभी लोगों को कुछ टेस्ट जरूर कराते रहने चाहिए।
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- महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए मैमोग्राफी टेस्ट जरूरी है। यह एक विशेष प्रकार का एक्स-रे टेस्ट होता है, जिससे स्तन कोशिकाओं में गांठ या असामान्य बदलावों का पता लगाया जा सकता है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित अंतराल पर मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। यदि परिवार में स्तन कैंसर के पहले से मरीज रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- महिलाओं के लिए पैप स्मीयर टेस्ट भी बहुत जरूरी है, इससे सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है। गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों को इससे पहचानना आसान होता है। 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को नियमित रूप से यह टेस्ट कराना चाहिए। समय पर पहचान होने पर सर्वाइकल कैंसर लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है।
- पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की पहचान के लिए प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट जरूरी है। यह एक ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें खून में पीएसए नामक प्रोटीन के स्तर को मापा जाता है। आमतौर पर इस कैंसर के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन पीएसए लेवल बढ़ना खतरे का संकेत हो सकता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों या जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास हो, उन्हें यह टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।
- कोलन यानी बड़ी आंत के कैंसर की जांच के लिए कोलोनोस्कोपी टेस्ट जरूरी है। इस टेस्ट में एक पतली कैमरा युक्त ट्यूब के जरिए आंत के अंदर की जांच की जाती है। 45 वर्ष के बाद या जिन लोगों में लंबे समय से कब्ज, खून की समस्या या कैंसर की फैमिली हिस्ट्री हो, उन्हें यह जांच करानी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- कैंसर की पुष्टि का सबसे पुख्ता तरीका है बायोप्सी टेस्ट। इसमें संदिग्ध गांठ या टिश्यू का छोटा सा हिस्सा निकालकर लैब में जांच की जाती है। बायोप्सी से यह तय किया जा सकता है कि ट्यूमर कैंसर वाला है या नहीं। इससे यह भी पता चलता है कि कैंसर का प्रकार क्या है और वह कितनी तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर की जांच या इलाज के दौरान डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह देते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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