उत्तर भारत इन दिनों मौसम में तेजी से बदलाव का अनुभव कर रहा है। कभी बारिश, कभी गर्मी और शाम होते ही तापमान में हल्की सी कमी, पिछले कुछ समय से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में यही हाल बना हुआ है। शुक्रवार को राजधानी दिल्ली-नोए़डा में हल्की बारिश हुई, जबकि शनिवार को दोबारा तेज धूप और गर्मी का अनुभव किया गया। इस तरह से बदलता मौसम आपको बीमार करने वाला हो सकता है।
World Health Day: सीजनल फ्लू का खतरा, अब ठीक होने में क्यों लगता है ज्यादा वक्त? डॉक्टर ने दिए जरूरी टिप्स
मौसम बदलने के साथ इंफ्लूएंजा (फ्लू) के मामले बढ़ने लग जाते हैं। ये हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करता है। पहले जहां लोग सामान्य दवाओं से 3-4 दिनों में ठीक हो जाया करते थे वहीं अब न केवल लोगों को ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है।
इंफ्लूएंजा वायरस और इसका खतरा
जब मौसम ठंडा या शुष्क होता है, तो इंफ्लूएंजा वायरस हवा में अधिक समय तक जीवित रह सकता है। फ्लू वायरस खांसने, छींकने या संक्रमित सतह को छूने से फैलता है। अध्ययनों से पता चलता है कि तापमान और आर्द्रता में कमी वायरस के प्रसार को आसान बनाते हैं। यही कारण है कि सर्दियों या मौसम परिवर्तन के दौरान फ्लू के मामलों में उछाल देखा जाता है।
पिछले एक-दो वर्षों में फ्लू वायरस की प्रकृति में व्यापक बदलाव भी देखने को मिला है, जिसने इसकी जटिलाएं काफी बढ़ा दी हैं।
फ्लू के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई थी चिंता
साल 2025 में अमेरिका और कनाडा सहित कई अन्य देशों में फ्लू के नए वैरिएंट के कारण फैली बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टेंशन बढ़ा दी थी। वैज्ञानिकों ने पाया था कि वायरस में कई ऐसे परिवर्तन देखे गए हैं जो इसकी संक्रामकता दर को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, हर साल इन्फ्लूएंजा वायरस के जो सबवेरिएंट सबसे ज्यादा फैलते हैं, उनमें थोड़ा बदलाव देखा जाता रहा है।
- सबसे ज्यादा फैलने वाला वेरिएंट सबक्लेड-के (Subclade-K) है, जो इन्फ्लूएंजा ए3एन2 का एक सबटाइप है।
- सबक्लेड-के को पहली बार जुलाई 2025 में ऑस्ट्रेलिया में पाया गया था।
- यह अमेरिका में 91.5% तक संक्रमण के लिए जिम्मेदार पाया गया था। कनाडा में भी मामलों में बढ़ोतरी के लिए यही जिम्मेदार था।
सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाना जरूरी
मौसम में बदलाव के साथ फिर से फ्लू संक्रमण के बढ़ने का खतरा जताया जा रहा है। राजधानी दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में एचओडी, इंटरनल मेडिसिन डॉ. विरेंद्र अग्रवाल कहते हैं, धीरे-धीरे मौसम बदल रहा है। ऐसे में फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं।
इसमें सबसे उच्च जोखिम वाले समूह जैसे 65 वर्ष की आयु से अधिक के लोग, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं (प्रसव के 2 सप्ताह बाद तक), अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), कैंसर रोगी एचआईवी के मरीज, मधुमेह, हृदय रोग और गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को खास सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
पर्सनल हाइजीन का भी रखें ध्यान
फ्लू से अस्पताल में भर्ती होने वाले 90 प्रतिशत मरीजों में कम से कम एक अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या होती है। इसलिए इन समूहों के लिए वार्षिक टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीमारियों से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बहुत जरूरी है।
- हाथों को 20 सेकंड तक साबुन से धोएं।
- अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
- आंख, नाक, मुंह को गंदे हाथों से न छुएं।
- खांसते व छींकते समय टिश्यू या कोहनी का प्रयोग करें।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
- बीमार व्यक्तियों से कम से कम छह फीट की दूरी बनाए रखें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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