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Cancer Alert: कहीं अगला शिकार आप तो नहीं? कैंसर एक्सपर्ट ने खोला बढ़ते पैंक्रियाटिक कैंसर का राज

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 06 Apr 2026 12:52 PM IST
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सार

पैंक्रियाटिक कैंसर के लगभग आधे मामले 75 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होते हैं, लेकिन इस बात के बढ़ते सबूत मिल रहे हैं कि कम उम्र के लोगों खासकर महिलाओं में इसका खतरा बढ़ गया है। कई सेलिब्रिटी भी इस जानलेवा कैंसर का शिकार रहे चुके हैं।

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पैंक्रियाटिक कैंसर के आखिर क्यों बढ़ रहे हैं मामले? - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति प्रिंस फिलिप का साल 2021 में निधन हुआ। साल 2009 में हॉलीवुड के एक्शन हीरो पैट्रिक स्वेज और साल 2016 में 'हैरी पॉटर' फिल्म के स्टार एलन रिकमैन की मौत हो गई। इन सेलिब्रिटीज की मौत पैंक्रियाटिक कैंसर की वजह से हुई। सेलिब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक ये जानलेवा कैंसर काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। 

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आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि पैंक्रियाटिक कैंसर एक बेहद जानलेवा बीमारी है, जिससे दुनियाभर में हर साल 5 लाख से ज्यादा मौतें हो जाती हैं। यह कैंसर से होने वाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक है। चिंताजनक बात ये भी है कि किसी में इस कैंसर का पता चलने के बाद उसमें जीवित रहने की दर बहुत कम होती है, यही वजह है कि इस कैंसर से मौतों की संख्या लगभग, इसके केस की संख्या के बराबर ही होती है। 
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डॉक्टर अक्सर इसे सबसे बेरहम बीमारियों में से एक बताते हैं। इसका पता लगाना मुश्किल होता है, यह तेजी से बढ़ता है और बड़ी संख्या में इसके कारण लोगों की जान चली जाती है। अब सवाल ये है कि  पैंक्रियाटिक कैंसर होता क्यों है और कहीं आप भी इसका शिकार न हो जाएं?

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पैंक्रियाटिक कैंसर और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com

पैंक्रियाज, पेट में छिपी हुई एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो पाचन और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि इसको लेकर चिंताजनक स्थिति ये है कि इसमें बनने वाले ट्यूमर कई महीनों या कई वर्षों तक बिना कोई स्पष्ट लक्षण प्रकट किए बढ़ते रहते हैं।
 
जब तक इसके कुछ लक्षण जैसे वजन कम होना, पेट में दर्द या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक कैंसर शरीर में फैल चुका होता है। यहां से इसके पूरी तरह ठीक होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं।

तो आखिर वह कौन सी वजह है, जो इस बीमारी को जन्म देती है और किन लोगों को इससे सबसे ज्यादा खतरा होता है? कैंसर एक्सपर्ट ने इसे समझाया है।


पैंक्रियाटिक कैंसर का बढ़ता जोखिम

वैश्विक स्तर पर इस कैंसर के बढ़ते मामलों की वजह क्या है, इसे लेकर लगातार शोध किए जा रहे हैं। इस बारे में पैंक्रियाटिक कैंसर के कंसल्टेंट सर्जन डॉ नेविल मेनेजेस कहते हैं, जब मैंने मेडिकल पेशे में काम शुरू किया था, तब से अब तक पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चलने के बाद से इससे जीवित रहने की दर में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है। 
 

  • हालांकि 10 प्रतिशत से भी कम मरीज सर्जरी से भी ठीक नहीं हो पाते हैं, क्योंकि इस बीमारी का पता बहुत देर से चलता है।
  • इसके जोखिम कारकों को समझना और जिन कारकों को हम बदल सकते हैं, उसमें सुधार किया जाना जरूरी है।

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शराब-धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com

धूम्रपान और शराब इस कैंसर की सबसे बड़ी वजह

डॉक्टर कहते हैं, पैंक्रियाटिक कैंसर के हर पांच मामलों में से एक का संबंध धूम्रपान से होता है। सिगरेट और तंबाकू कई प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण है। 
 

  • पैंक्रियाटिक कैंसर एक्शन के डॉक्टर एडे विलियम्स कहते हैं, हम जानते हैं कि धूम्रपान कई तरह के कैंसर का एक रिस्क फैक्टर है।
  • धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों को पैंक्रियाटिक कैंसर होने का खतरा लगभग दोगुना होता है।
  • धूम्रपान का संबंध अक्सर शराब के सेवन से भी होता है। ये दोनों इस कैंसर के खतरे को और भी बढ़ाने वाले हो सकते हैं। 


डॉ विलियम्ल कहते हैं, धूम्रपान और शराब पीना अक्सर साथ-साथ चलते हैं, जिससे पैंक्रियास में सूजन आ जाती है और समय के साथ इस अंग को खतरनाक तरीके से क्षति पहुंच सकती है।

शराब सीधे तौर पर भी पैंक्रियास को नुकसान पहुंचा सकती है। यह पाचन एंजाइमों को समय से पहले सक्रिय कर सकती है, जिससे पैंक्रियास अपने ही ऊतकों को पचाना शुरू कर देता है। समय के साथ, इससे क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस हो सकता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।


स्नस (खैनी) ने भी बढ़ा दिया है खतरा

अब निकोटीन के नए उत्पादों, विशेष रूप से स्नस (देसी भाषा में खैनी) को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्नस छोटे-छोटे पाउच होते हैं जिन्हें होंठ के नीचे रखा जाता है और ये युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
 

  • स्वीडन के निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों पर साल 2007 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि तंबाकू का सेवन न करने वालों की तुलना में स्नस का इस्तेमाल करने वालों को पैंक्रियाटिक कैंसर होने का खतरा लगभग दोगुना था। 
  • वहीं, 2005 में नॉर्वे में की गई एक स्टडी में गया गया कि स्नस का इस्तेमाल करने वालों में कैंसर का खतरा 67 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

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कैंसर से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock

इस कैंसर से बचा कैसे जाए?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में बड़ी संख्या में वयस्क या तो अधिक वजन वाले हैं या मोटापे से जूझ रहे हैं। अधिक वजन की समस्या क्रॉनिक बीमारियों का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। इससे टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और कुछ तरह के कैंसर (जिनमें पैंक्रियाटिक कैंसर भी शामिल है) का कारण बनता है।
 

  • विशेषज्ञों का कहना है कि वजन को कंट्रोल में बनाए रखने, शराब-सिगरेट और तंबाकू से दूरी आपकी सेहत में विशेष सुधार लाने वाली हो सकती है। 
  • पैंक्रियाटिक कैंसर से बचने लिए शराब-सिगरेट से दूरी बनाने के साथ संतुलित डाइट भी जरूरी है।
  • संतुलित डाइट जिसमें भरपूर मात्रा में फल-सब्जियां, फाइबर और प्रोटीन शामिल हों, ये आपके वजन को कंट्रोल रखने में मदद करती हैं।
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, मीठे ड्रिंक्स और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम किया जाए। खराब डाइट से ब्लड शुगर का लेवल अचानक बढ़ सकता है, जिससे पैंक्रियास को इंसुलिन बनाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे भी आप गंभीर समस्याओं और कैंसर का खतरा बढ़ा लेते हैं। 





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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