हाल के वर्षों में कई प्रकार की घातक बीमारियों का खतरा बच्चों में भी तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है। मेडिकल साइंस की प्रगति और प्रभावी उपचारों के चलते पहले की तुलना में अब बाल मृत्यु दर में कमी तो आई है पर कुछ बीमारियां अब भी गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। बच्चों में निमोनिया की समस्या उनमें से एक है।
World Pneumonia Day 2025: हर साल लाखों मासूमों की जान ले रही है निमोनिया, इन लक्षणों पर दें गंभीरता से ध्यान
- मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक निमोनिया दुनियाभर में बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है। रोकथाम और उपचार की उपलब्धता के बावजूद यह हर साल किसी भी अन्य संक्रामक रोग की तुलना में सबसे ज्यादा बच्चों की जान लेता है।
- निमोनिया फेफड़ों का गंभीर संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से होता है। इससे बच्चे को तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, और सीने में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं।
बच्चों में निमोनिया का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल दुनिया भर में 50 लाख से अधिक बच्चे पांच वर्ष की आयु से पहले ही बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण निमोनिया है। भारत भी इस चिंता से अछूता नहीं है।
डॉक्टर कहते हैं, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे संक्रमणों का शिकार जल्दी बन जाते हैं। बदलती जलवायु, बढ़ता वायु प्रदूषण, असंतुलित आहार और अस्वच्छ वातावरण इस समस्या को और गहरा रहे हैं। बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर बच्चों के फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक साबित हो रहा है।
बच्चों में निमोनिया और इसका जोखिम
निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस तीनों के कारण हो सकता है। इससे बच्चे को तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, और सीने में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह ऑक्सीजन की कमी और फेफड़ों के फेल होने का कारण बन सकता है।
डॉक्टर्स का कहना है कि ठंड के मौसम में निमोनिया के मामले सबसे ज्यादा बढ़ते हैं। छोटे बच्चे, कुपोषित बच्चे या जिनकी इम्युनिटी कमजोर है, उनमें यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। भारत में अभी भी कई परिवार ऐसे हैं जहां बच्चे का टीकाकरण अधूरा रहता है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
निमोनिया के लक्षणों के बारे में जानिए
निमोनिया के लक्षण, संक्रमण के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में तेज सांस लेने या घरघराहट की दिक्कत हो सकती है। चूंकि यह फेफड़ों को प्रभावित करने वाली स्थिति है ऐसे में इसमें सांस की दिक्कत होना सबसे आम लक्षण है।
- बलगम के साथ खांसी और बुखार की दिक्कत।
- सांस की तकलीफ जो सामान्य गतिविधियों को करते समय अधिक होती है।
- सीने में दर्द जो सांस लेने या खांसने पर और बढ़ जाता है।
- थकान और भूख कम लगना।
- मतली या उल्टी।
निमोनिया का इलाज और बचाव के तरीके
निमोनिया के लक्षणों की स्थिति में ब्लड टेस्ट, छाती के एक्स-रे की मदद से इसकी पुष्टि की जाती है। निमोनिया के कारणों के आधार पर इसका इलाज होता है। अगर यह बैक्टीरियल संक्रमण के कारण है तो इसमें एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा निमोनिया के लक्षणों को कम करने के लिए कुछ घरेलू उपचार विधियों जैसे गरारे, गुनगुना पानी पीने से भी लाभ मिल सकता है।
निमोनिया से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं। इसके अलावा जीवनशैली को ठीक रखकर भी आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं। बच्चे को साफ-सुथरा और प्रदूषण से मुक्त वातावरण में रखना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को स्तनपान कराती रहें जिससे उनके शरीर को पौष्टिक तत्व प्राप्त हों। ठंड के दिनों में बच्चों को सुरक्षित रखना और भी जरूरी हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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