सिख समाज के लिए प्रकाश पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें गुरु हैं। उनकी जयंती को प्रकाश पर्व के तौर पर मनाया जाता है। इस बार 9 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह की जयंती है। गुरु गोबिंद सिंह के पिता सिख समाज के नवें गुरु तेगबहादुर थे, जिनकी औरंगजेब ने हत्या करवा दी थी। उसके बाद मात्र 9 साल की उम्र में गोबिंद सिंह गुरु बन गए। बाद में उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को सबसे बड़ा गुरु घोषित किया और खालसा पंथ की स्थापना की। गुरु गोबिंद सिंह बचपन से ही समाज सेवा और सिख धर्म की रक्षा में जुटे रहें। महज 42 साल की उम्र में धोखे से उनकी हत्या कर दी गई। लेकिन अपने जीवनकाल में गुरु गोबिंद सिंह ने कई अनमोल वचन और अपने विचारों को सिख अनुयायियों के सामने रखा, जो लोगों के नजरिए को बदलकर उनके जीवन का आसान और सफल बना सकते हैं।
Guru Gobind Singh Jayanti 2022: गुरु गोबिंद सिंह के ये पांच अनमोल विचार, बदल देंगे आपकी जिंदगी
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गुरु गोविंद सिंह के अनमोल वचन
पहला वचन- 'किसी दि निंदा, अतै इर्खा नै करना'
इसका अर्थ है कि व्यक्ति को कभी भी किसी दूसरे की चुगली या निंदा नहीं करना चाहिए। किसी से भी ईर्ष्या करने के बजाए परिश्रम करना ज्यादा फायदेमंद होता है।
दूसरा वचन - 'बचन करकै पालना'
यानी अगर आपने किसी को कोई वचन दिया है तो हर कीमत पर उस वचन को निभाना चाहिए। कमिटमेंट नहीं तोड़ना चाहिए।
तीसरा वचन- 'कम करन विच दरीदार नहीं करना'
इसका मतलब होता है कि व्यक्ति को अपने काम में खूब मेहनत करनी चाहिए। काम को लेकर कोताही कभी भी नहीं बरतनी चाहिए।
चौथा वचन- 'गुरुबानी कंट करनी'
गुरु गोबिंद सिंह के इस वचन का अर्थ है कि गुरुबानी को कंठस्थ कर लें।