Hindi Diwas 2023 Learn Hindi Easily: 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। हिंदी भारत की राजभाषा है। हिंदी ने आधे से ज्यादा देश को भाषीय माध्यम से जोड़ रखा है। देश के कई हिस्सों में हिंदी बोले जाने के कारण यह अधिकतर नागरिकों की मातृभाषा भी है। हिंदी की भूमिका केवल भारत तक ही नहीं विदेशों तक फैली है। विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक पहचान भाषा है। वह हिंदी भाषा के माध्यम से भारत से जुड़ाव महसूस करते हैं।
हिंदी दिवस 2023: हिंदी को आसानी से समझने के लिए रखें इन बातों का ध्यान, नहीं आएगी भाषा सीखने में कठिनाई
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जैसी हिंदी बोलें, वैसी ही लिखें
हिंदी की खासियत है कि इस भाषा को जैसे बोलते हैं, उसी तरह से लिखते हैं। अंग्रेजी की तरह इसमें अक्षर साइलेंट नहीं होते और न ही एक अक्षर से दो ध्वनि निकलती हैं। हालांकि प्रांतीय स्तर पर भाषा और बोलियों के असर के कारण हिंदी बोलने और लिखने में त्रुटियां हो सकती हैं। जैसे बांग्ला में पानी को खाने का अनुरोध करते हैं। जबकि शुद्ध हिंदी में पानी पिया जाता है। दक्षिण भारतीय भाषाओं में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग के शब्द, हिंदी में बदलते समय असमंजस में आ जाते हैं। ऐसे में सही हिंदी लिखने के लिए सही उच्चारण करना चाहिए।
हिंदी की मात्राएं
हिंदी में अक्षरों को जोड़ने के लिए मात्राएं होती हैं। मात्रा दो प्रकार की होती हैं, छोटी और बड़ी मात्राएं। बोलने के तरीके से दोनों के अंतर को समझा जा सकता है। जैसे भारत-पाकिस्तान के उच्चारण से पता चलता है कि भ, प, त में आ की मात्रा का उपयोग हुआ है। वहीं पाकिस्तान के क में छोटी ई की मात्रा लगेगी। बच्चों को हिंदी पढ़ाते समय मात्राओं पर ध्यान देते हुए उच्चारण करें ताकि वह मात्रा के अंतर को सीख सकें।
हिंदी की बिंदी
हिंदी में बिंदी का भी उपयोग होता है, लेकिन अक्सर लोग किसी शब्द में बिंदी के उपयोग को लेकर त्रुटी कर देते हैं। कहां बिंदी लगनी चाहिए और कहां नहीं, इसका पता भी उच्चारण से चल जाता है। जैसे- मैं, में और हैं, जैसे शब्दों में अक्सर लोग बिंदी नहीं लगाते हैं लेकिन सही हिंदी बोलने की आदत, त्रुटि रहित हिंदी लेखन में सहायक होती है।