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Repot Plants: पौधे का गमला बदलते समय रखें इन बातों का ध्यान, न करें ये गलतियां

Mon, 14 Aug 2023 10:58 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Mon, 14 Aug 2023 10:58 AM IST
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How To Repot Plants Without Killing Them Know Repotting Plants Process in hindi
Plant - फोटो : pexel

डॉ. कुलदीप कुमार विश्नोई,


कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ 

छोटे से बड़े गमले या गमले से जमीन में पौधों को शिफ्ट करना अक्सर मुश्किल भरा होता है, क्योंकि कई बार पौधे सूख जाते हैं। लेकिन मौसम बरसात का हो, तो फिर कोई दिक्कत नहीं। कई पौधों को छोटे गमले या स्थान से हटाकर बड़े गमले, क्यारी या बगीचे में लगाना बहुत जरूरी होता है। जिस प्रकार हम अपने किचन या टेरेस गार्डन में छोटे-छोटे गमलों में बीज या पौधे लगाते हैं, उस गमले या स्थान से बड़े हो गए पौधों को किसी दूसरे स्थान पर ट्रांसफर यानी री-पॉटिंग करना भी उतना ही जरूरी होता है। इसके लिए वर्षा ऋतु, शरद ऋतु की शुरुआत में और वसंत ऋतु, तीनों मौसम अच्छे माने गए हैं। 15 जुलाई के बाद पूरे अगस्त, फिर अक्तूबर और उसके बाद फरवरी माह में यह कार्य अच्छी सफलता देता है। लेकिन यह कार्य री-पॉटिंग करने वाले के तजुर्बे पर अधिक निर्भर करता है, क्योंकि री-पॉटिंग एक कुशलता भरा कार्य है।

How To Repot Plants Without Killing Them Know Repotting Plants Process in hindi
डॉ. कुलदीप कुमार विश्नोई, कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ  - फोटो : Amar Ujala

री-पॉटिंग का तरीका

री-पॉटिंग करते समय पौधों को गमले से निकालने से पहले न्यूट्रिएंट्स के घोल से नहलाया जाता है। फिर गमले से मिट्टी को निकाला जाता है। मिट्टी में कार्बनिक खादों को मिलाने के बाद हल्के हाथ से बड़े गमले में भरकर दबाया जाता है। ट्रांसप्लांटिंग शॉक से बचाने के लिए पौधों को पानी दिया जाता है।

How To Repot Plants Without Killing Them Know Repotting Plants Process in hindi
Plant - फोटो : pexel

ट्रांसप्लांटिंग शॉक क्या होता है

ट्रांसप्लांटिंग शॉक एक ऐसी प्रक्रिया है, जो किसी भी उस पौधे में होती है, जब उसको नर्सरी, पौधशाला या एक से दूसरे स्थान अथवा गमले में ट्रांसफर किया जाता है। इस दौरान कुछ पौधों में पत्तियों का मुरझाना, पीला पड़ना, गिर जाना, बढ़वार न होना और पानी लगाने के बाद भी पौधे का मुरझाना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं। ट्रांसप्लांटिंग शॉक एक फिजियोलॉजिकल एडेप्टेशन प्रोसेस यानी शारीरिक अनुकूलन प्रक्रिया है, जो पौधे की जड़ों को पानी की कम आपूर्ति के कारण पैदा होती है। यह अस्थायी प्रक्रिया है, जो दो से तीन दिन में ठीक हो जाती है, जिसके बाद पौधे में तेज गति से बढ़वार और विकास शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाकर आप ढेर सारी सब्जियों की पौध को क्यारियों या गमलों में ट्रांसप्लांट कर सकती हैं।

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How To Repot Plants Without Killing Them Know Repotting Plants Process in hindi
plant - फोटो : pexel

री-पॉटिंग प्रक्रिया से पहले क्या करें

री-पॉटिंग की प्रक्रिया में सबसे पहले जिस गमले से पौधे को निकालना है, उसमें पानी देना बंद कर देते हैं। इसके दो से तीन दिन बाद गमले की मिट्टी किनारों से हटनी प्रारंभ हो जाती है। फिर पौधे को मृदा सतह के पास से पकड़कर गमले को पलट लेते हैं और उसको हाथ की हल्की-हल्की चोट से मिट्टी से अलग करते हैं। यदि गमला क्षतिग्रस्त है या प्लास्टिक का है तो वह आसानी से हट जाता है, अन्यथा उसे तोड़कर भी हटाया जा सकता है। वैसे, आपको प्लास्टिक प्रदूषण से बचने का प्रयास करना चाहिए। इसके बाद जब पौधों की जड़ें मिट्टी के साथ गमले के बाहर आ जाती हैं तो जड़ों का एक बड़ा झुंड आपको नजर आता है। इसको थोड़ा-सा हाथ से थपथपाकर मिट्टी को हटाएं और उन महीन जड़ों को कुछ कम करने का कार्य हाथ से ही करें। इसके बाद प्रूनिंग हुईं यानी छंट चुकीं जड़ों वाले पौधे को बड़े गमले या मिट्टी में बने गड्ढे में इस प्रकार रखें कि उसकी जड़ सीधी रहे।

दो भाग मिट्टी में एक भाग कार्बनिक खाद, जैसे कि गोबर, मछली, मुर्गी की बीट से बनी खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें और इसको गमले या गड्ढे में चारो तरफ से भर दें। फिर हल्के हाथ से दबाकर पानी लगाएं। पानी पहले दिन थोड़ा ज्यादा लगाएं, जिससे मिट्टी सेट होकर बैठ जाए। उसके बाद पौधे की आवश्यकता और मिट्टी की दशा देखकर पानी लगाती रहें।

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plant - फोटो : iStock

पौधे की कटाई-छंटाई के बाद क्या करें

यदि आपके पौधे का आकार अत्यधिक बड़ा हो गया है तो उसकी कटाई-छंटाई करने के कुछ दिन बाद ही री-पॉटिंग का कार्य करें, जिससे जड़ों पर कम भार पड़े और पौधे की बढ़वार ट्रांसप्लांटिंग शॉक के बाद तेजी से शुरू हो सके। अधिकांश औषधीय, फूल वाले और सब्जियों के पौधों की री-पॉटिंग सफलतापूर्वक की जा सकती है, बस तीन-चार बातों का विशेष ध्यान रखें। मसलन, जड़ों की कटाई-छंटाई करते समय उनका मूल भाग पूरा न काटें। गमले में रखते समय कार्बनिक खाद और मिट्टी के मिश्रण को सेट होने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी लगाएं। मौसम में नमी, जैसे बरसात के दिनों या अक्तूबर एवं फरवरी माह में री-पॉटिंग का कार्य करने से पौधों में किसी प्रकार की समस्या नहीं आती है।

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