Independence Day 2025: देश की पहचान भारत का राष्ट्रीय ध्वज है जो कि तीन रंगों का होने के कारण तिरंगा कहलाता है। यह देश की एकता, गर्व और बलिदान का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस समेत राष्ट्रीय पर्वों व आयोजनों में ध्वजारोहण किया जाता है। 15 अगस्त और अन्य विशेष अवसरों पर तिरंगा फहराते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है, जिन्हें "भारतीय ध्वज संहिता" में तय किया गया है। आइए जानते हैं ध्वजा रोहण और झंडा फहराने में अंतर और तिंरगा फहराने के सरकारी नियम।
Independence Day 2025: तिरंगे के सम्मान से जुड़ी 10 अहम बातें, जानिए ध्वजारोहण और झंडा फहराने में क्या है अंतर
Independence Day 2025: 15 अगस्त और अन्य विशेष अवसरों पर तिरंगा फहराते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है, जिन्हें "भारतीय ध्वज संहिता" में तय किया गया है। आइए जानते हैं ध्वजा रोहण और झंडा फहराने में अंतर और तिंरगा फहराने के सरकारी नियम।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ध्वजारोहण के नियम कानून
- ध्वजारोहण करते समय झंडे को आधा झुकाकर नहीं फहराना चाहिए। बिना आदेश तिरंगे को आधा नहीं फहराया जा सकता।
- राष्ट्रीय ध्वज में किसी तरह की तस्वीर, पेंटिंग या फोटोग्राफ का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
- फटा हुआ और मैला झंडा प्रदर्शित नहीं कर सकते। ध्वज के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
- किसी को सलामी देने के लिए तिरंगे को झुकाया नहीं जा सकता।
- सूर्योदय और सूर्यास्त तक ही ध्वजारोहण कर सकते हैं। सूर्यास्त यानी शाम होने के बाद तिरंगे को उतार देना चाहिए। तिरंगे को हमेशा ऐसी जगह पर फहराना चाहिए, जहां से वह स्पष्ट दिखाई दे सके।
झंडा फहराने का समय
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर सुबह 8:30 बजे के आसपास झंडा फहराया जाता है। आम नागरिक सूर्योदय से सूर्यास्त तक तिरंगा फहरा सकते हैं।
ध्वज संहिता का पालन क्यों जरूरी है?
ध्वज के प्रति सम्मान, देश के प्रति सम्मान का प्रतीक है। नियमों का पालन कर हम अपने राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखते हैं।
ध्वजारोहण और झंडा फहराने में अंतर
ध्वजारोहण क्या होता है?
हर साल 15 अगस्त के दिन ध्वजारोहण किया जाता है। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा नीचे से ऊपर की तरफ खींचते हुए फहराया गया। इसी को ध्वजारोहण कहते हैं। हर साल देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण करते हैं, जिसमें झंडे को रस्सी की मदद से नीचे से ऊपर की तरफ खींचा जाता है। ध्वजारोहण किसी नए राष्ट्र के उदय का प्रतीक होता है।
झंडा फहराना क्या है?
जहां 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाता है, वहीं 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया जाता है। इस दिन झंडा पहले से ऊपर बंधा रहता है, जिसे बस रस्सी की मदद से फहराया जाता है। 26 जनवरी को राष्ट्रपति राजपथ पर झंडा फहराते हैं।