मकर संक्रांति का पावन पर्व देशभर में बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को देशभर में अलग- अलग तरह से मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पीछे कई तरह की पौराणिक मान्यताएं हैं। मकर संक्रांति का धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी होता है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे मकर संक्रांति का पावन पर्व क्यों मनाया जाता है। अगली स्लाइड्स में जानिए इस पर्व से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं...
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Makar Sankranti 2021: जानिए क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व और सबसे पहले किसने रखा था इस दिन व्रत
Wed, 13 Jan 2021 05:21 PM IST
योगेश जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Wed, 13 Jan 2021 05:21 PM IST
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मकर संक्रांति 2021
- फोटो : अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर
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सूर्य और शनि के मुलाकात के रूप में मनाया जाता है पर्व
- ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व सूर्य और शनि की मुलाकात के रूप में मनाया जाता है। आपको बता दें शनि देव सूर्य भगवान के पुत्र हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य जब मकर राशि यानी शनिदेव की राशि में प्रवेश करते हैं तो ऐसा माना जाता है कि भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर जाते हैं।
गंगा जी
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मकर संक्रांति के दिन गंगाजी समुद्र में जाकर मिल गईं थी
- धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे- पीछे चलकर कपिल मुनी के आश्रम से होते हुए सागर में मिल गईं थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस पावन दिन भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण भी किया था। यही वजह है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का काफी अधिक महत्व होता है।
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भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के पावन दिन ही अपने प्राण त्याग दिए थे
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भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही प्राण त्याग दिए थे
- भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के पावन दिन ही अपने प्राण त्याग दिए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य के उत्तरायण के समय देह त्याग करने या मृत्यु को प्राप्त होने वाले लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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lord vishnu
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विष्णु भगवान ने मकर संक्रांति के दिन किया था असुरों का अंत
- धार्मिक कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का अंत किया था। इस दिन को बुराइयों और नकारात्मकता के अंत का दिन भी कहा जाता है।