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क्या बिना स्मार्टफोन के नहीं पल सकते बच्चे?

Mon, 08 Jul 2019 03:59 PM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Mon, 08 Jul 2019 03:59 PM IST
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How do you raise a child without phones
बच्चे और स्मार्टफोन - फोटो : pixabay

छोटे बच्चों के हाथों में स्मार्टफोन थमाना इनदिनों आम बात हो गई है। बच्चों की जरा-सी शैतानी और रोने पर अभिभावक उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। गेम लगाकर या फिर यूट्यूब पर वीडियो चलाकर बच्चों को दे देते हैं ताकि वे मोबाइल पर रमे रहे। लेकिन इस बीच अभिभावक यह भूल जाते हैं कि छोटे बच्चों के लिए मोबाइल जितना मनोरंजन का साधन है, उससे कई ज्यादा खतरनाक भी है। स्मार्टफोन से निकलने वाले खतरनाक रेडिएशन बच्चों की परवरिश पर असर डालती हैं। ये खतरनाक किरणें, बच्चों को कई तरह की बीमारियां भी दे सकती हैं।

 

How do you raise a child without phones
स्मार्टफोन चलाते बच्चे - फोटो : pixabay

एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत भूमिका कहती हैं कि आधुनिक जीवनशैली में परिवार एकल हो गए हैं। ऐसे में अक्सर नए-नए अभिभावक बने कपल्स बच्चों को सही से नहीं संभाल पाते हैं। वह बच्चों की जरा-सी शैतानी और रोने को भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, ऐसे में वह या तो बच्चों को खेल लगाने के लिए लाउड म्यूजिक चला देते हैं या फिर उनके हाथ में स्मार्टफोन थमा देते हैं। पेरेंट्स यह भूल जाते हैं कि स्मार्टफोन की किरणें न सिर्फ बच्चों की आंखों के लिए हानिकारक हैं बल्कि स्वास्थ्य पर भी इनका घातक दुष्परिणाम होता है।

How do you raise a child without phones
स्मार्टफोन

दरअसल, एक बार अगर बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन दे दिया गया तो वह काफी देर तक उसमें ही रमे रहते हैं। इससे बच्चों को धीरे-धीरे मोबाइल फोन की लत लग जाती है। बच्चों घंटे मोबाइल फोन में या तो गेम खेलते रहते हैं या फिर उसकी स्क्रीन पर आंख गड़ाए रहते हैं। ऐसे में बच्चों की आंखें बचपन से ही कमजोर हो सकती हैं। भूमिका कहती हैं कि स्मार्टफोन की लत की वजह से बच्चों को कान और दिमाग का ट्यूमर होने का भी खतरा रहता है। 

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How do you raise a child without phones
parents - फोटो : parents
कई शोधों में यह बात बताई गई है कि ज्यादा फोन यूज करने पर बच्चों के ब्रेन की एक्टिविटी पर असर पड़ता है। लेकिन अक्सर अभिभावक इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। फोन बच्चों की एकेडमिक परफॉर्मेंस पर भी असर डालता है, अभिभावकों को यह बात नहीं भूलना चाहिए। भूमिका कहती हैं कि बच्चे बिना स्मार्टफोन के भी पल सकते हैं। बच्चों को रोने दें और शैतानी करने दे, लेकिन झट से उनके हाथ में मोबाइल फोन न थमाएं। 

 
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