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नवरात्र के दौरान पति-पत्नी को क्यों नहीं आना चाहिए एक दूसरे के करीब

Sat, 13 Oct 2018 10:14 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 13 Oct 2018 10:14 AM IST
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Navratri 2018: Do you know sexual relationship during navratri is allowed or not
नवरात्र का हिंदु धर्म में बहुत बड़ा महत्व है।मान्यता है कि इस समय माता आदि शक्ति अपने नौ रूपों के साथ धरती पर निवास करती हैं। व्यक्ति इस समय अपनी आध्यामिक ऊर्जा का विकास करता है। इतना ही नहीं इस समय सात्विक भोजन करने की सलाह के साथ  यौनाचार्य को वर्जित माना जाता है। पर क्या आप इसके पीछे छिपे कारण को जानते हैं। अगर नहीं तो पढ़ें ये खबर।    

 
Navratri 2018: Do you know sexual relationship during navratri is allowed or not
अध्यात्म
अध्यात्म की नजर से देखें तो जिस घर में नवरात्रि पूजन किया जाता है उस घर में दंपति को इस खास समय यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि जो लोग इस नियम का पालन नहीं करते हैं उनका मन मां की अराधना में नहीं लगता है। ऐसा करने वाले लोगों का मन विचलित रहता है। जिसकी वजह से उनकी साधना अपूर्ण रह जाती है। 
Navratri 2018: Do you know sexual relationship during navratri is allowed or not
धर्म के साथ विज्ञान भी
नवरात्र के दौरान जो लोग व्रत रखते हैं उनके शरीर की ऊर्जा में कमी आ जाती है। जिसकी वजह से वो मानसिक और शारीरिक तौर पर यौनाचरण के लिए तैयार नहीं रहता है। यही वजह है कि इस खास समय में लोगों को खुद पर संयम रखने के लिए कहा जाता है। 
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Navratri 2018: Do you know sexual relationship during navratri is allowed or not
धार्मिक दृष्टिकोण
धार्मिक दृष्टिकोण की बात करें तो नवरात्र के दिनों में माता रानी धरती पर वास करती हैं। माना जाता है कि माता का अंश हर स्त्री में मौजूद होता है। यही वजह है कि इस समय सुहागन महिलाओं को सुहाग सामग्री देने की भी परंपरा है। जिसकी वजह से नवरात्र में व्यक्ति को खुद पर संयम और ब्रह्म्चर्य का पालन करने के लिए कहा जाता है।   

 
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Navratri 2018: Do you know sexual relationship during navratri is allowed or not
विज्ञान कहता है
हर साल दो बार नवरात्र के दौरान आश्विन और चैत्र के समय ऋतु परिवर्तन होता है। आश्विन नवरात्र के साथ शीत ऋतु का आगमन होता और चैत्र नवरात्र के साथ ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है। यही वो मौसम होता है जब सबसे ज्यादा संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने आने वाले मौसम के लिए अपने शरीर को तैयार करने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इन नौ दिनों व्रत और साधना करने का विधान बताया है। जिसमें यौनाचरण से भी बचने कि लिए कहा गया है।  


 
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