बचपन में भाई-बहनों के बीच झगड़ा होना आम बात है।कभी पढ़ाई तो कभी खेल-कूद और खानपान किसी भी मामले में घर के भीतर और बाहर भाई-बहनों में छोटे-मोटे झगड़े होते ही हैं। माता-पिता से कोई फरमाईश हो या फिर कोई शैतानी, अक्सर भाई-बहन आपस में झगड़ते हैं। ऐसे में अगर आपके बचपन की प्रतियोगिता अगर बड़े होने पर प्रतिद्वंदिता में बदल गई है तो आपको इस पर विचार करने की जरूरत है क्योंकि यह रिश्तों के लिए ठीक नहीं है। अपने भाई बहन के साथ बचपन की कड़वी यादों को भुलाकर जरूरत है कि आप फिर से रिश्ते को मधुर बनाएं। इस रक्षाबंधन के त्योहार पर आप भी अपनी पुरानी बातों को छोड़कर इन उपायों को जरूर अपनाएं।
अगर भाई- बहनों के साथ आपकी नहीं बनती है तो इन कोशिशों से ऐसे करें पहल
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बातें हैं जरूरी
अगर आपने बड़े या छोटे भाई बहन से बहुत दिनों से बात नहीं की है तो सबसे पहले तो बात करना शुरू करें। बात करने से ही दिल के मैल धुलेंगे। बचपन की अच्छी यादों को आपस में बैठकर याद करें।
क्या आपका ईगो आड़े आ रहा है?
क्या भाई- बहन के साथ बात न करने या फिर मिलने में आप खुद ही रोड़ा बन रहें हैं तो इस आदत को बदलिए। उनकी किसी भी बात का बुरा मानने के बजाय ये सोचें कि उन्होने ऐसा शायद अपना समझकर बोला होगा। किसी बात के बुरा लगने पर माफी मांगने के लिए कहें। भले ही कोई आपसे माफी न मांगे लेकिन कहने से आपका दिल जरूर हल्का हो जाएगा। भाई बहन की कामयाबी से जलने की बजाय खुश होने की कोशिश करें। उनसे ईर्ष्या की भावना न रखें।
बचपन की सिखाई बात को न याद करें
बचपन में जब आप पढ़ाई नहीं करते थे तो आपके पिता हमेशा दूसरे भाई- बहन की तारीफ करते थे। तब आपको बहुत बुरा लगता था, लेकिन वो सब सिर्फ आपको पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कहा जाता था। जब कक्षा में ज्यादा अंक आने से खुश होकर पिता ने छोटे भाई को नई साइकिल दिलायी थी तो आपको बहुत बुरा लगा होगा।। लेकिन ये सब बातें पुरानी हो गई है और इन बातों को वर्तमान संबंधों पर हावी न होने दें। जीवन में नई शुरूआत करने के लिए रिश्तों में पहल करें और सकारात्मक कदम उठाएं।