Peacock Parenting Kya Hai? आज के समय में परवरिश सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सोशल मीडिया, प्रतिस्पर्धा और आधुनिक जीवनशैली से भी प्रभावित हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में परवरिश की कई नई शैलियों की चर्चा रही है, जिनमें हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग, जेलीफिश पेरेंटिंग और टाइगर पेरेंटिंग के बाद अब पीकाॅक पेरेंटिंग तेजी से सुर्खियां बटोर रही है।
Peacock Parenting: पीकाॅक पेरेंटिंग क्या है? बच्चों की परवरिश का यह नया ट्रेंड क्यों हो रहा वायरल
Peacock Parenting क्या है?
पीकाॅक पेरेंटिंग एक ऐसी पेरेंटिंग शैली है, जिसमें माता-पिता अपने बच्चों की उपलब्धियों, प्रतिभा और सफलताओं को दूसरों के सामने प्रमुखता से प्रदर्शित करते हैं। यदि इसमें संतुलन न रखा जाए, तो बच्चों पर प्रदर्शन का दबाव और तुलना की भावना बढ़ सकती है।
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क्या है पीकाॅक पेरेंटिंग?
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पीकाॅक पेरेंटिंग में माता-पिता अपने बच्चों की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रदर्शित करते हैं।
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इसका उद्देश्य अक्सर बच्चे की सफलता को दूसरों के सामने दिखाना होता है।
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सोशल मीडिया इस पेरेंटिंग स्टाइल को बढ़ावा देने वाला बड़ा माध्यम बन गया है।
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स्कूल, खेल, डांस, संगीत या अन्य गतिविधियों की उपलब्धियों को लगातार साझा किया जाता है।
यह जरूरी नहीं कि हर उपलब्धि साझा करना गलत हो, लेकिन संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
बच्चों में बढ़ सकता है प्रदर्शन का दबाव
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बच्चे को लग सकता है कि उसे हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
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हर सफलता के बाद अगली उपलब्धि का दबाव बढ़ सकता है।
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असफलता की स्थिति में बच्चे को निराशा अधिक महसूस हो सकती है।
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बच्चे अपनी पहचान को केवल उपलब्धियों से जोड़ने लगते हैं।
ऐसी स्थिति में आत्मविश्वास की जगह प्रदर्शन आधारित सोच विकसित हो सकती है।
तुलना की भावना हो सकती है मजबूत
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बच्चे खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं।
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"मुझे हमेशा सबसे बेहतर बनना है" जैसी मानसिकता विकसित हो सकती है।
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प्रतियोगिता स्वस्थ होने के बजाय तनावपूर्ण बन सकती है।
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सोशल मीडिया पर तुलना की संस्कृति बच्चों को प्रभावित कर सकती है।
लगातार तुलना बच्चे की भावनात्मक सेहत पर असर डाल सकती है।
पीकाॅक पेरेंटिंग के कुछ फायदे भी
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सही संतुलन के साथ बच्चों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
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उनकी उपलब्धियों की सराहना आत्मविश्वास बढ़ा सकती है।
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बच्चे अपनी मेहनत का महत्व समझ सकते हैं।
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परिवार और समाज से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर प्रेरणा मिल सकती है।
इसलिए समस्या उपलब्धियों को साझा करने में नहीं, बल्कि उसकी अति में होती है।