फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

सेक्स एजुकेशनः क्या आप भी बोलते हैं बच्चों से ये झूठ?

Mon, 04 Nov 2019 11:01 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Mon, 04 Nov 2019 11:01 PM IST
sex education and talking to child about relationship
- फोटो : pixabay

"बच्चों! आज हमारी *** एजुकेशन की क्लास है!" ये कहते हुए टीचर डस्टर उठाता है और ब्लैकबोर्ड पर लिखा 'सेक्स' शब्द मिटा देता है। बचता है तो सिर्फ़..."एजुकेशन" ब्लैकबोर्ड पर महिला और पुरुष के चित्र बने हैं और उनके जननांगों की जगह ख़ाली डिब्बा सा बना दिया गया है। कुछ ऐसा ही दृश्य है 'ईस्ट इंडिया कॉमेडी' के बनाए एक वीडियो का। वीडियो बड़े ही मज़ाक़िया लहजे में भारत में सेक्स एजुकेशन व्यवस्था पर तंज़ करता है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उदाहरण अभी बाक़ी हैं मेरे दोस्त! हमारे स्कूल में सेक्स एजुकेशन जैसी कोई चीज़ ही नहीं थी। दसवीं में 'प्रजनन तंत्र' का चैप्टर था तो जरूर लेकिन वो क्लास में कभी पढ़ाया नहीं गया।


-प्रिया सिंह (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
मिसालों की लिस्ट क़ायम है!

बच्चे का सवाल -"मम्मा, बच्चे कहां से आते हैं?"

उत्तर- "बेटा, आसमान से एक सुंदर सी परी आती है और बच्चों को मम्मा के पास रखकर चली जाती है।"

बच्चे का सवाल -"डैडी, वो हिरोइन प्रेगनेंट कैसे हो गई?"उत्तर-"बेटा, हीरो ने हिरोइन को किस किया ना। इसलिए वो प्रेगनेंट हो गई।" भारतीय घरों में ऐसी बातचीत सुनने को मिले तो हमारे कान ज़रा भी खड़े नहीं होते क्योंकि ये बिल्कुल आम है। लेकिन इस 'आम बातचीत' का नतीजा कितना ख़तरनाक हो सकता है इसका अंदाज़ा डॉक्टर शारदा विनोद कुट्टी की एक फ़ेसबुक पोस्ट से बख़ूबी लगाया जा सकता है।


 

sex education and talking to child about relationship

"आज मेरे पास 17 साल की एक लड़की आई। वो काफ़ी ग़रीब परिवार से थी। उसने मुझे बताया कि बॉयफ़्रेंड से सेक्स करने के बाद उसने आईपिल (गर्भ निरोधक दवा) ले ली है। वो बहुत घबराई हुई थी और मेरे सामने शर्मिंदा महसूस कर रही थी। वो मुझसे बार-बार कह रही थी ये बस एक बार हुई ग़लती है और दोबारा ये ग़लती नहीं होगी। मैं उसे ये समझाने की कोशिश करती रही कि ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है। हर इंसान सेक्स करता है अगर इस मामले में कुछ ज़रूरी है तो वो है सुरक्षा। हमने अपनी बातचीत जारी रखी और आख़िरकार उसनें मुझे बताया कि उसे असल में पता ही नहीं है कि सेक्स होता कैसे है। उसे ये भी नहीं पता था कि एक पुरुष का जननांग दिखता कैसा है। इसके बाद मैंने उसे सारी चीज़ें विस्तार से समझाई और चित्र बनाकर दिखाया कि असल में सेक्स कैसे होता है। सच्चाई ये थी कि उस लड़की ने सेक्स किया ही नहीं था। उसने अपने बॉयफ़्रेंड को सिर्फ़ किस किया था। हमारे यहां सेक्स एजुकेशन की स्थिति इतनी ख़राब है कि उसे लगा कि किस करने से वो प्रेगनेंट हो जाएगी।


 
sex education and talking to child about relationship

यहां तक कि उसने प्रेगनेंसी रोकने के लिए उसने गर्भनिरोधक दवा भी खा ली। ज़रा सोचिए कि हमने अपने बच्चों को किस क़दर अकेला छोड़ दिया है। सोचिए कि वो लड़की कितना बेहतर महसूस करती अगर उसके पास सही जानकारी होती और अगर वो एक ऐसे समाज में रह रही होती जहां उसे ग़लत न समझा जाता।" डॉ। शारदा की ये पोस्ट सोशल मीडिया पर छा गई और इसे 1,500 से ज़्यादा लोगों ने शेयर किया। सेक्स को लेकर बच्चों में इतनी हड़बड़ाहट क्यों'?सेक्स शब्द सुनते ही असहज हो जाते हैं लोग' बीबीसी से बातचीत में डॉ। शारदा ने कहा कि अगर मैं अपने मरीज़ों से ज़रूरत पड़ने पर उनकी 'सेक्स लाइफ़' के बारे में पूछती हूं तो कई बार वो सेक्स शब्द सुनते ही नज़रें चुराने लगते हैं। यहां तक कि शादीशुदा लोग भी खुलकर इस बारे में बात नहीं कर पाते। डॉ। शारदा का मानना है कि स्कूल-कॉलेजों में सेक्स एजुकेशन के नाम पर ख़ाना-पूर्ति और सेक्स को अनैतिक समझने की भूल इसकी दो बड़ी वजहें हैं।




 
विज्ञापन
sex education and talking to child about relationship

अपनी बात समझाने के लिए डॉक्टर शारदा अपने स्कूल के दिनों का एक क़िस्सा साझा करती हैं। उन्होंने बताया, "मैं केरल से हूं जो भारत के सबसे शिक्षित राज्यों में से है। वहां भी हमें रिप्रोडक्टिव सिस्टम (प्रजनन तंत्र) के बारे में विस्तार से नहीं पढ़ाया गया। इतना ही नहीं, जब प्रेगनेंसी के बारे में पढ़ाए जाने की बारी आई तो लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग कमरों में ले जाया गया।"यानी सेक्स और प्रेगनेंसी ऐसे विषय माने गए जिसके बारे में लड़कों और लड़कियों से एक साथ बात नहीं की जा सकती। डॉ। शारदा कहती हैं, "ये कितनी बड़ी विडंबना है कि जो दो समूह सेक्स की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होते हैं, उन्हें अलग-अलग ले जा कर इसकी दी जा रही है।"

दूसरी वजह पर आते हुए डॉ। शारदा कहती हैं, "मेरी उम्र 30 साल से ज़्यादा है और मेरी मां आज भी मेरी सेक्स लाइफ़ को कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं क्योंकि मेरी शादी नहीं हुई है और इसकी वजह भी सेक्स को नैतिकता से जोड़कर देखा जाना है।" यानी सेक्स के बारे में बात न होने की दूसरी वजह ये माना जाना है कि शादी के बाद, बंद कमरों में बत्तियां बुझाने के बाद ही इस बारे में सोचा जा सकता है। यही कारण है कि स्कूलों में अधिकतर शिक्षक बच्चों को सही और विस्तृत जानकारी देने से हिचकिचाते हैं। शिक्षकों को न तो ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने की ट्रेनिंग मिली है और न ही वो इस समाज के बाहर से आते हैं। ज़ाहिर है, वो भी चीज़ों को उसी चश्मे से देखते हैं जैसे बाक़ी लोग।

 

sex education and talking to child about relationship
- फोटो : social media

सेक्स एजुकेशन: अनुभव और ख़ामियां
ऋषिजा सिंह (रिसर्च स्कॉलर, जेएनयू)

सेक्स के बारे में पहली जानकारी मुझे स्कूल से मिली ही नहीं। जहां तक मुझे याद है कि मैंने सेक्स के बारे में कुछ पत्रिकाओं में पढ़ा था। इसके बाद शायद आठवीं या नौंवी क्लास में मेरी एक दोस्त ने मुझे बताया कि सेक्स कैसे होता है। मुझे याद है, मैं ये सब सुनकर बुरी तरह डर गई थी। अगर स्कूल की बात करें तो दसवीं में हमें बायोलोजी (जीव विज्ञान) की क्लास में वो चैप्टर पढ़ाया गया। किताब में सेक्स के बारे में जो कुछ भी लिखा जाता है वो बहुत ही कठिन और तकनीकी भाषा में लिखा गया होता है।
 

सेक्स एक जैविक प्रक्रिया है जिससे इंसान अपनी असल ज़िंदगी में मुख़ातिब होता है लेकिन स्कूल में इसे कुछ ऐसे पढ़ाया जाता है जैसे हल्दीघाटी और प्लासी का युद्ध। ऐसे कि बस रट्टा मार लो और परीक्षा में कुछ सवालों के जवाब लिख दो। रियल लाइफ़ में तुम्हारा इससे कभी पाला पड़ेगा ही नहीं। मुझे लगता है कि सेक्स को लेकर इस हिचकिचाहट की वजह हमारा सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचा है। भारतीय परिवारों में बच्चों को असेक्शुल मानकर बड़ा किया जाता है। माता-पिता ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे उनके बच्चे आम इंसान नहीं हैं और न ही उनमें कोई सेक्शुअल भावनाएं हैं। सेक्स छोड़िए, हम तो अपने घरों में मासिक धर्म तक के बारे में बात नहीं करते!इसलिए इस बारे में कभी कोई बात ही नहीं होती। फिर एक दिन अचानक वही मां-बाप बेटे-बेटियों की किसी अजनबी से शादी करा देते हैं और उम्मीद करते हैं कि शादी के अगले साल उन्हें पोते-पोती भी मिल जाएं। ये सब अपने आप में कितना विरोधभासी है! क्या हम कभी सोचते हैं कि हमारे बच्चों को सेक्स के बारे में पता कैसे चलेगा? चलेगा भी क्या सही जानकारी मिलेगी?

अगली फोटो गैलरी देखें

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed