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Women Sunday Routine : रविवार की प्लानिंग ऐसे करें कि महिलाओं को भी मिले सुकून और समय
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Sun, 06 Jul 2025 01:24 AM IST
सार
Sunday Planning For Women : महिलाओं का रविवार कई हिस्सों में बंटा होता है। इसमें कुछ हिस्सा पति के नाम, कुछ बच्चों के नाम तो बाकी का बचा हिस्सा घर की साफ-सफाई में चला जाता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि रविवार आपके हिस्से में ही कम क्यों आता है?
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रविवार की प्लानिंग ऐसे करें कि महिलाओं को भी मिले सुकून और समय
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“तो कल की क्या प्लानिंग है?” रुचि ने दफ्तर के कामों को समेट रही सानिया के पास बैठते हुए पूछा।
“वही जो पहले थी। सुबह देर से सोकर उठना। फिर कुछ फटाफट बनाकर, खिलाकर मॉल आ जाऊंगी। तुम लोगों को जॉइन कर लूंगी।” सानिया ने प्लानिंग बताई। तभी उसके मोबाइल पर एक के बाद एक ढेर सारे मैसेज आने लगे। उसने बात के बीच में मैसेज चेक किए तो मुस्कुरा उठी। बच्चों ने अपनी फेवरेट जगहों की लिस्ट भेजी थी, जहां वे रविवार को जाना चाहते थे। साथ ही फेवरेट डिशेज के नाम भी, जो उन्हें रविवार को मम्मी के हाथों से बने ही चाहिए थे। उनकी लिस्ट देख सानिया सोच में पड़ गई, क्योंकि उसने भी रविवार को अपने लिए कुछ प्लान कर रखा था। थोड़ा सोच-विचारकर अंत में उसने अपनी प्लानिंग कैंसिल कर दी और रुचि से कहा, “सॉरी यार, मैं तुम्हें जॉइन नहीं कर पाऊंगी।”
रविवार! जिसका इंतजार सभी बेसब्री से करते हैं। फिर चाहें वह गृहिणी हो या कामकाजी महिला, पुरुष हो, बच्चे हों या बुजुर्ग। इसलिए सबके अपने-अपने कुछ प्लान होते हैं। इस दिन सभी अपने रूटीन से थोड़ा अलग हटकर आजादी से जीना चाहते हैं। सुबह अलार्म बंद कर थोड़ी देर अधिक सोना चाहते हैं। अब ऐसे में सुबह उठते ही आप पूरे दिन बस सबकी फरमाइशें पूरी करने में लगी रहें तो वीकेंड थोड़ा एकतरफा तो हो ही जाएगा। आपको भी तो ब्रेक चाहिए, उतना ही जितना परिवार के बाकी सदस्यों को मिल रहा है। सच है कि अक्सर महिलाओं के लिए रविवार अन्य दिनों की तरह या कहें, उससे भी ज्यादा काम और जिम्मेदारियों से भरा होता है। हालांकि कुछ महिलाएं इसे अपने लिए या परिवार के साथ आनंद लेने के लिए उपयोग करती हैं, लेकिन एक रविवार केवल आपके नाम तो होना ही चाहिए।
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थोड़ा मुश्किल तो है
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थोड़ा मुश्किल तो है
भारतीय समाज में महिलाओं पर कुछ पारंपरिक भूमिकाएं निभाने का दबाव होता है, जिससे वे अपनी पसंद की गतिविधियों में शामिल होने या अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने में हिचकिचाती हैं। वहीं, कई परिवार महिलाओं को घर और परिवार की देखभाल करने वाली ‘केयरटेकर’ के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि महिलाएं व्यक्तिगत विकास के कई अवसरों से वंचित रह जाती हैं। कितनी ही बार काम के दबाव के कारण वे अपने प्लान स्थगित कर देती हैं, बिल्कुल सानिया की तरह।
शहरी महिलाओं को तो फिर भी काफी हद तक कामों से स्वतंत्रता मिल जाती है और वे अपनी पसंद की गतिविधियों में शामिल हो जाती हैं, लेकिन गांवों में महिलाओं पर पारंपरिक भूमिकाएं निभाने का अधिक दबाव होता है, जिस कारण उनके लिए यह विचार तो लगभग संभव है। हालांकि आज घर के कामों को आसान बनाने के लिए कई तरह के उपकरण मौजूद हैं, जिन्हें घर के बाकी सदस्य भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सभी महिलाओं को ये सुविधाएं मुहैया नहीं हो पातीं या फिर उपकरण आ भी जाएं तो उन्हें भी महिलाओं को ही इस्तेमाल करना पड़ता है, बाकी के सदस्य खुद को किनारे ही रखते हैं।
वहीं, एक कारण सीमित आमदनी भी है। कई महिलाओं की आमदनी सीमित होती है या वे आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं होतीं, जिससे वे वीकेंड पर बाहर जाने, घूमने या मनोरंजन के लिए पैसे खर्च करने से हिचकिचाती हैं। इसका साफ कारण भी अपनी जरूरतों से पहले परिवार की जरूरतों को पूरा करना ही होता है। वहीं, कई भारतीय परिवारों में महिलाओं की मर्जी से ज्यादा परिवार को महत्व दिया जाता है। उनका अकेले या दोस्तों के साथ बाहर जाना अच्छा नहीं माना जाता, जिससे वे चाह कर भी अपनी मर्जी से वीकेंड प्लान नहीं कर पाती हैं। ऐसे में वे व्यक्तिगत गतिविधियों को त्याग कर परिवार के साथ समय बिताने के एकमात्र विकल्प को चुनती हैं।
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साथ और तालमेल से बनेगी बात
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साथ और तालमेल से बनेगी बात
कुल मिलाकर, रविवार महिलाओं के लिए ‘छुट्टी का दिन’ कम और ‘सबके लिए सब कुछ संभालने का दिन’ ज्यादा बन जाता है। लेकिन आपसी समझ, तालमेल, आर्थिक स्वतंत्रता और पारिवारिक सहयोग से यह स्थिति बदली जा सकती है। इसके लिए हफ्ते भर में कम से कम रविवार को एक घंटा खुद के लिए निकालें। किताब पढ़ें, टहलें, संगीत सुनें, डांस करें या जो अच्छा लगे, वो करें। इससे आपको सुकून मिलेगा और आप तरोताजा अनुभव करेंगी। साथ ही सोमवार का दिन आपको ऊर्जा से भरा हुआ लगेगा।
दोपहर के बाद कम से कम एक घंटे तक फोन/स्क्रीन से दूर रहें। कुछ ऐसा करें, जो आपको पसंद है, फिर चाहे वो कुछ नया करना हो, पेंटिंग हो, कढ़ाई हो या बस ऐसे ही लेटे रहना। उसके बाद परिवार के साथ समय बिताने के लिए कोई मूवी देखें, गेम खेलें या वॉक पर जाएं। रविवार का मजा आपको भी तो मिलना चाहिए, इसलिए खुद को दोषी न समझें। याद रखें, आप ही अपने छोटे-छोटे कदमों से रविवार को ‘अपना’ और ‘खुशी’ से भरा बना सकती हैं।
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रविवार की तैयारी शनिवार को
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रविवार की तैयारी शनिवार को
हमेशा ही घरेलू कामों में सबकी भागीदारी की बात की जाती है, लेकिन अमल शायद ही हो पाता है। फिर लौटकर सारे काम महिला के हिस्से ही आते हैं। इसलिए कोशिश करें कि रविवार को घर के काम सिर्फ आपके हिस्से में न हों। पति और बच्चों को भी छोटा-मोटा काम दें, जैसे- नाश्ता बनाना, बर्तन धोना, कपड़े समेटना। बिखरे हुए घर को समेटने में बच्चे भी आपकी मदद कर सकते हैं। इससे मानसिक और शारीरिक रूप से आपको आराम मिलता है। वहीं अगर कुछ काम शनिवार को निपटा लिए जाएं, जैसे- सब्जी काटना और कपड़े धोना आदि, तो रविवार को थोड़ा हल्का महसूस होता है। हो सके तो साप्ताहिक ग्रॉसरी लिस्ट बनाकर थोड़ी खरीदारी भी कर लें।
रविवार को सभी घर में रहेंगे तो काम तो ज्यादा हो जाएगा, इसलिए घर की बेसिक सफाई (झाड़ू-पोंछा) शनिवार को ही कर लें, ताकि रविवार को इनके लिए आपकी ऊर्जा और समय की बर्बादी न हो। इसके लिए अपनी थकान और जरूरतों को परिवार के सामने रखें, क्योंकि जब तक आप बताएंगी नहीं, सामने वाला समझेगा कैसे? इसलिए कोशिश करें कि सुबह का खाना थोड़ा हल्का और साझा जिम्मेदारी के साथ बने, जैसे कि बच्चे सैंडविच बनाने में मदद कर सकते हैं। कुछ अतिरिक्त नाश्ता बनाना हो तो पति या बड़े बच्चे को मदद करने के लिए कहे। बर्तन धोने का काम जो सदस्य खाना नहीं बना रहा है, उसे दे सकती हैं। इसी तरह कपड़े तह करना वगैरह भी बांट दें। इससे हंसते-खेलते समय बीत जाएगा और आपको थकान नहीं होगी।
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‘नो किचन डे’
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‘नो किचन डे’
हर दिन रसोई में घंटों बिताना महिलाओं की एक आम दिनचर्या है, लेकिन खुद को समय देना भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में महीने में एक रविवार ऐसा जरूर तय करें, जब आप खाना न बनाएं। उस दिन बाहर से खाना ऑर्डर करें या घर के बाकी सदस्य कुछ खास तैयार करें। इससे न सिर्फ आपको आराम मिलेगा, बल्कि परिवार के बाकी सदस्यों की भी रसोई में भागीदारी बढ़ेगी।
आजकल बच्चों को ‘नो फायर कुकिंग’ के जरिए कुकिंग की शुरुआती ट्रेनिंग दी जाती है। इस तकनीक में बिना आग जलाए हेल्दी और टेस्टी खाना बनाना सिखाया जाता है, जैसे- फ्रूट सलाद, सैंडविच, बिस्किट पिज्जा, मॉकटेल्स आदि। आप इस मौके पर बच्चों और पति देव को इस एक्टिविटी में शामिल कर सकती हैं। इससे वे न केवल खाना बनाना सीखेंगे, बल्कि घर के कामों की कद्र भी करेंगे। ऐसी छोटी-छोटी पहल परिवार में साझेदारी और सहयोग की भावना को मजबूत करती हैं। बच्चे जब खुद ही कुछ बनाते हैं तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे आत्मनिर्भर बनना सीखते हैं।
वहीं, आपको भी एक दिन आराम मिलता है, जो मानसिक और शारीरिक रूप से जरूरी होता है। इस एक रविवार को थोड़ा हटकर, हल्का-फुल्का और सभी के लिए खास बनाएं। यह न केवल आपकी थकान को कम करेगा, बल्कि परिवार को एक-दूसरे के और करीब लाने का जरिया भी बनेगा। जब हर कोई थोड़ा योगदान देगा, तभी रविवार के दिन को आप पूरी तरह अपना समझ पाएंगी।
रविवार आपका भी हो सकता है। बस खुद को एक ब्रेक दें। रविवार तो बस चौबीस घंटों में बीत जाएगा, उससे कुछ पल अपने लिए चुरा लें। घर वालों के साथ आनंद लें, लेकिन कभी-कभी अपने हिस्से का रविवार अपने अंदाज में भी जी कर देखें। यकीन मानिए, आपको अच्छा लगेगा!
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