बच्चे जब बड़े होते हैं तो माता-पिता सबसे अधिक उनके लिए चिंतित होते हैं। उन्हें हर पल यह डर सताता है कि कहीं उनकी परवरिश में कोई गलती तो नहीं हो रही है। परवरिश जब बेटी की हो तो दायित्व तो माता और पिता दोनों का ही होता है लेकिन मां के ऊपर जिम्मेदारी थोड़ी अधिक इसलिए भी होती है क्योंकि कई सारी बातें ऐसी होती हैं जो मां और बेटी के बीच ही सहज होती है इसलिए बहुत जरूरी है कि युवावस्था की दहलीज पर कदम रख चुकी बेटी को आप दोस्त बनकर कुछ समझाइशें दें। अगली स्लाइड्स से जानिए किन बातों को आपको अपनी युवा बेटी को जरूर समझाना चाहिए।
युवावस्था की दहलीज पर कदम रख रही बिटिया को जरूर समझाएं ये बातें, नहीं सताएगी चिंता
पर्सनल हाइजीन की बातें
बच्ची अब बड़ी हो रही है और मां-बेटी का रिश्ता ही ऐसा होता है जिसमें वे एक-दूजे से हर तरह की बातें साझा कर सकती हैं इसलिए यह आपकी ही जिम्मेदारी है कि आप बच्ची को सही ढंग से यह बता सकें कि अपने शरीर का ध्यान किस तरह से रखना है। किन अंगों को किस तरह से रखा जाए ताकि बेटी को कोई शारीरिक समस्या न हो।
परिवर्तनों के बारे में बताएं
बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई सारे बदलाव होते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप अपनी बेटी को पहले से ही समझा दें कि आने वाले समय में उसके साथ कब- किस तरह के परिवर्तन हो सकते हैं और इन परिवर्तनों से घबराना नहीं है क्योंकि यह सभी शारीरिक और मानसिक परिवर्तन आवश्यक होने के साथ ही खूबसूरत भी हैं।
व्यवहारिकता पर जोर दें
बढ़ते बच्चे चिढ़चिढ़े होने के साथ ही अकेला रहना भी पसंद करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि कोई उन्हें समझ ही नहीं रहा है। इस उम्र में जो विचार उनके दिमाग में आते हैं उसके लिए कई बार उनके हार्मोंस भी जिम्मेदार होते हैं। इसलिए इस उम्र में बहुत जरूरी है कि आप उन्हें व्यवहारिक बनाने पर जोर दें। लोगों से मिलना-जुलना, बात आदि करना उन्हें सिखाएं।
बढ़ती बेटी हो या बेटा काम करना तो सभी को सिखाना ही चाहिए लेकिन कभी भी बेटी को काम करने के लिए यह न कहे कि वो लड़की है इसलिए उसे यह काम करना होगा, उसे समझाएं कि यह उसकी काबिलियत है कि वह हर काम को अच्छे से कर सकती है इसलिए घर और बाहर सभी के काम करना उसे सीखना चाहिए और काम का तरीका काम चलाऊ न होकर अपने आप में श्रेष्ठ हो।