Independence Day 2025: भारत का स्वतंत्रता संग्राम सिर्फ किताबों में पढ़ी जाने वाली कहानी नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास है जिसके प्रमाण लगभग देश के हर शहर में देखने को मिल सकते हैं। देश में कई ऐसी जगहें हैं जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए मार्ग खोले और 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी दिलाने में विशेष योगदान दिया। इन फ्रीडम ट्रेल्स में हर पत्थर, हर सड़क और हर इमारत आजादी की दास्तान कहता है। आजादी का पर्व आने वाला है। ऐसे में इस स्वतंत्रता दिवस 2025 पर क्यों न एक ऐसी यात्रा की जाए जो आपको गर्व से भर दे? इस स्वतंत्रता दिवस, सिर्फ झंडा फहराने और भाषण सुनने तक ही सीमित न रहें। एक आजादी की मार्ग की यात्रा आपको इतिहास, संस्कृति और देशभक्ति की गहराई से जुड़ने का मौका देगी।
Independence Day 2025: अमृतसर से दांडी तक, इस रास्तों पर चलकर महसूस करें आजादी का असली स्वाद
Independence Day 2025: इस स्वतंत्रता दिवस, सिर्फ झंडा फहराने और भाषण सुनने तक ही सीमित न रहें। एक आजादी की मार्ग की यात्रा आपको इतिहास, संस्कृति और देशभक्ति की गहराई से जुड़ने का मौका देगी।
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जलियांवाला बाग, अमृतसर
1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड आज भी हमारी स्मृतियों में ताजा है। यहां की दीवारों पर गोलियों के निशान आज़ादी की कीमत याद दिलाते हैं। यहां पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा 12 किमी दूर अमृतसर एयरपोर्ट है। वहीं अमृतसर जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग दो किमी दूर जलियांवाला बाग स्थित है, जहां आप ऑटो, रिक्शा या पैदल 10 से 15 मिनट में पहुंच सकते हैं। चंडीगढ़, दिल्ली, लुधियाना और अन्य शहरों से अमृतसर तक रोडवेज और निजी बस सेवाओं के जरिए पहुंच सकते हैं।
जलियांवाला बाग में क्या-क्या घूमें?
जलियांवाला बाग जाएं तो शहीद स्मारक, शहीद कुआं, संग्रहालय और गैलरी व उद्यान की सैर कर पाएंगे। इन सभी स्थानों पर अंग्रेजों की बर्बरता और स्वतंत्रता संग्राम के निशान नजर आते हैं। जलियांवाला बाग से 500 किमी दूर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर है। देशभक्ति की राह में निकलें तो स्वर्ण मंदिर भी यात्रा भी कर सकते हैं। पास में ही पार्टिशन म्यूज़ियम है जो कि भारत-पाक विभाजन के इतिहास को समर्पित संग्रहालय है। सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक अकाल तख्त जा सकते हैं। लगभग 30 किमी दूर वाघा बॉर्डर भी देखने जा सकते हैं। शाम को यहां बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी देखने लायक होती है।
साबरमती आश्रम, अहमदाबाद
महात्मा गांधी का यह आश्रम सत्य, अहिंसा और स्वावलंबन का प्रतीक है। यहां से दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी जिसने ब्रिटिश हुकूमत को हिला दिया था। साबरमती आश्रम से लगभग 7 से 8 किमी दूर सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो कि नजदीकी एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से टैक्सी, ऑटो या कैब से 20–25 मिनट में पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से यात्रा करने वाले अहमदाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन आश्रम से लगभग 6 किमी दूर है। स्टेशन से ऑटो/कैब से 15–20 मिनट में पहुंच सकते हैं।
साबरमती आश्रम में क्या देखें?
साबरमती आश्रम आने वाले महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी का निवास स्थान हृदय कुंज देखने जा सकते हैं। आप यहां गांधी संग्रहालय देखने जा सकते हैं, जहां गांधीजी के जीवन, आंदोलनों और सिद्धांतों से जुड़े दस्तावेज़, तस्वीरें और वस्तुएं देखने को मिलती हैं। इसके अलावा विनोबा मीरा कुटीर जाएं जो कि विनोबा भावे और मीराबेन के लिए बनाया गया था। उद्योग भवन घूमने जाएं, जहां चरखा और गांधीजी के स्वावलंबन आंदोलन से जुड़े उपकरण हैं। साबरमती नदी के किनारे स्थित प्रार्थना स्थल घूम सकते हैं जहां गांधीजी प्रार्थना सभाएं करते थे।
कांकरीया झील घूमने जाएं। यह बोटिंग, जू और गार्डन के साथ फैमिली आउटिंग के लिए बेहतरीन स्थल है। इतिहास प्रेमी अदलज बावड़ी जा सकते हैं, जहां ऐतिहासिक सीढ़ीदार कुआं, 15वीं सदी की वास्तुकला का नमूना देखने को मिलता है। साथ ही आप गुजरात के हैंडलूम, हस्तशिल्प और पारंपरिक परिधानों की खरीदारी के लिए लॉ गार्डन मार्केट जा सकते हैं और अहमदाबाद का प्रसिद्ध नाइट फूड मार्केट मणेक चौक घूमने भी जा सकते हैं।
दांडी पथ, गुजरात
अहमदाबाद से दांडी तक 390 किलोमीटर का यह मार्ग नमक सत्याग्रह की कहानी कहता है। आज भी आप इस पथ पर यात्रा कर गांधीजी के संघर्ष को महसूस कर सकते हैं। फ्लाइट से आने वाले यात्रियों के लिए सूरत एयरपोर्ट सबसे नजदीक है जो दांडी गांव से लगभग 60–65 किमी दूर है। आगे का सफर सूरत से टैक्सी या कैब लेकर लगभग डेढ़ से दो घंटे में दांड़ी तक किया जा सकता है। रेल मार्ग से आने वाले यात्री नवसारी रेलवे स्टेशन उतरें, यहां से दांडी लगभग 16–18 किमी दूर है।
दांडी में क्या क्या घूमें
दांडी समुद्र तट पर ही 1930 में महात्मा गांधी और उनके साथियों ने नमक सत्याग्रह का ऐतिहासिक कार्य किया था। दांडी स्मारक गांधीजी और नमक सत्याग्रह को समर्पित विशाल मूर्तिकला है जिसमें आंदोलन के दृश्य दर्शाए गए हैं। आप नमक सत्याग्रह संग्रहालय जा सकते हैं। यहां गांधीजी की यात्रा, उनके विचार और नमक आंदोलन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज़ देख सकते हैं। दांडी के आसपास नवसारी शहर घूमने जा सकते हैं जो कि पारसी समुदाय की ऐतिहासिक बस्तियां और मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। सूरत में टेक्सटाइल मार्केट, स्ट्रीट फूड और ऐतिहासिक किले की सैर कर सकते हैं।
लाल किला, दिल्ली
हर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री का भाषण यहां से ही होता है। यह स्थान भारत के स्वतंत्रता दिवस का सबसे प्रमुख प्रतीक है। दिल्ली एयरपोर्ट से लाल किले की दूरी लगभग 20-22 किमी की है। एयरपोर्ट से मेट्रो सेवा भी है। चाहे तो टैक्सी या कैब ले सकते हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लाल किला लगभग चार से पांच किमी दूर है। चांदनी चाौक मेट्रो स्टेशन से पैदल या रिक्शा के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है।
लाल किले में क्या देखें
यहां घूमने आएं तो लाहौरी गेट, चट्टा चौक, दीवान ए आम, दीवान ए खास, रंग महल, मोती मस्जिद और संग्रहालय घूमने जा सकते हैं। आसपास घूमना चाहते हैं तो चांदनी चौक में स्ट्रीट फूड और खरीदारी का लुत्फ उठा सकते हैं। जामा मस्जिद, राजघाट, फतेहपुरी मस्जिद और दिंगबर जैन लाल मंदिर देखने जाएं।