दूरदर्शन पर एक धारावाहिक आता था- चंद्रकांता। देवकीनंदन खत्री के मशहूर उपन्यास चंद्रकांता पर नीरजा गुलेरी ने यह धारावाहिक बनाया था, जो बहुत लोकप्रिय हुआ। आपने भी यह धारावाहिक जरूर देखा होगा और नहीं देखा होगा तो इसके बारे में सुना तो जरूर ही होगा। कहा जाता है कि लेखक खत्री ने यह उपन्यास चुनार का किला और इसके आसपास की जगहों से प्रभावित होकर लिखा था। चुनार का किला का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसके बारे में जानने को, यहां घूमने और करने को और भी काफी कुछ है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
गौरवशाली इतिहास से रूबरू होना है तो घूम आएं चुनार का किला, उपन्यास 'चंद्रकांता' से है गहरा संबंध
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उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास एक शहर है मिर्जापुर। यहां से 35 किलोमीटर की दूरी पर गंगा तट पर स्थित है चुनार। टैकोर इलाके में स्थित चुनार किला आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। भगवान विष्णु के वामन अवतार जैसे पौराणिक कथानकों से इसका संबंध बताया जाता है, जबकि प्राचीन साहित्य में चरणाद्रि, नैनागढ़ आदि नामों से यहां का उल्लेख मिलता है। गंगा तट पर बना ऐतिहासिक पहाड़ी भव्य किला यहां का प्रमुख आकर्षण है।
बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई राजा भर्तृहरि के लिए इस किले को बनवाया था। किले के अंदर 52 खंभों की छतरी और सूर्य घड़ी भी बनी हुई है। जलवायु की दृष्टि से चुनार को आदर्श स्थान बताया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तो जब भी बाढ़ आई, तब इसी किले में लोगों ने शरण ली।
गंगा से सटे होने की वजह से दुर्ग से टकराकर धारा उत्तरामुखी हो जाती है और इसके बाद गंगा सीधे काशी की ओर चली जाती है। हजारों वर्ष पुराने इस दुर्ग का उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने जीर्णोद्धार कराया था। इसका संदर्भ पुराण में वर्णित राजा भर्तृहरि से है। इस किले का जिक्र अकबर कालीन इतिहासकार शेख अबुल फजल के आइने अकबरी में भी मिलता है। कहा है कि देवकीनंदन खत्री ने अपने लोकप्रिय उपन्यास 'चंद्रकांता' में रहस्य, रोमांच और ऐयारी की पृष्ठभूमि इन्हीं इलाकों से प्रभावित होकर दी थी।
कैसे पहुंचें:
- हवाई मार्ग: यहां जाने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा वाराणसी है, जहां से सड़क मार्ग से चुनार किला पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: मिर्जापुर नेशनल हाइवे से कई शहरों से जुड़ा हुआ है। वाराणसी से बसें भी चलती है।
- रेल मार्ग से: मिर्जापुर रेलवे मार्ग से देश के कई प्रमुख स्टेशनों से जुड़ा हुआ है, जहां उतरकर आप चुनार किला देखने पहुंच सकते हैं।