हिमालय की गोद बसा है सिखों का यह पवित्र धार्मिक स्थल, बर्फ से जम जाती है झील
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हेमकुंड संस्कृत शब्द है। इसका मतलब होता है बर्फ का कुंड। हेमकुंड में झील के किनारे सिखों का प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। गुरुद्वारे के पास ही लक्ष्मण मंदिर है। बर्फ की ऊंची-ऊंची चोटियों से घिरे होने की वजह से यहां का वातावरण बेहद शांत है। प्रकृति की गोद में बसे इस गुरुद्वारे में माथा टेकने के लिए भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हर साल सिख श्रद्धालु आते हैं। अगली स्लाइड में पढ़िए कैसें जाएं?
श्रद्धालु हेमकुंड साहिब सड़क और हवाई रास्ते से जा सकते हैं। अगर आप सड़क के रास्ते से जा रहे हैं तो आपको ऋषिकेश – बदरीनाथ मोटर मार्ग से जाना होगा। यहां जाने के लिए श्रद्धालुओं को पांडुकेश्वर से दो किलोमीटर पहले गोविंद घाट में उतरना पड़ेगा। गोविंद घाट से करीब 20 किलोमीटर से ज्यादा पैदल यात्रा करनी पड़ती है। गोविंद घाट अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। गोविंदघाट से ऊपर को खड़ी चढ़ाई पड़ती है। कैसे पहुंचे गोविंद घाट?
गोविंदघाट पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को झूलते हुए ब्रिज के जरिए अलखनंदा नदी पार करनी पड़ेगी। यहां से आगे पुलना गांव आएगा। इसके बाद की चढ़ाई और मुश्किल हो जाती है क्योंकि रास्ता बहुत पथरीला है। इसके बाद घांघरिया बेस कैंप आता है और यहां हेमकुंड साहिब की दूरी करीब 7 किलोमीटर है। अगली स्लाइड में पढ़ें हवाई मार्ग और ट्रेन से कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से जाने के लिए आपको जॉली ग्रांट एयरपोर्ट उतरना होगा। यह एयरपोर्ट देहरादून में है। यहां से गोविंदघाट जाना होगा जिसकी दूरी करीब 292 किलोमीटर है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब की दूरी करीब 19 किलोमीटर है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं तो आपको ऋषिकेश उतरना होगा। यहां से गोविंदघाट 273 किलोमीटर है और आप बस और टैक्सी के जरिए यहां पहुंच सकते हैं। गोविंदघाट तक पहुंचने के लिए आपको श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, चमोली और जोशीमठ पार करना होगा। गोविंदघाट से चढ़ाई चढ़कर आप इस पवित्र स्थल में पहुंच जाएंगे। यहां जाने के लिए सबसे अच्छा वक्त मार्च से लेकर जून के बीच है।