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Vijay Diwas 2024: हर भारतीय के लिए बेहद खास है 16 दिसंबर का दिन, जानें इसका इतिहास और महत्व

Mon, 16 Dec 2024 08:56 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Mon, 16 Dec 2024 08:56 AM IST
सार

हर साल 16 दिसंबर के दिन भारत बड़ी ही शान से विजय दिवस मनाता है। इस दिन का भारत के इतिहास में काफी खास महत्व है। आइए आपको भी इस बारे में बताते हैं। 

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Vijay Diwas 2024 Date History Know Why and How Vijay Diwas Celebrated in India
हर भारतीय के लिए बेहद खास है 16 दिसंबर का दिन - फोटो : अमर उजाला

Vijay Diwas 2024: हर साल 16 दिसंबर को भारत में विजय दिवस मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस जीत की वजह से बांग्लादेश को अपना खुद का बजूद मिला था। कई दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों और बांग्लादेशी मुक्ति वाहिनी ने अपनी जी जान लगा दी थी, इसी वजह से इसकी जीत भारत के पक्ष में रही। ऐसे में 16 दिसंबर के दिन को उन वीर सैनिकों और नागरिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने इस युद्ध में अपनी जान कुर्बान कर दी। 

Vijay Diwas 2024 Date History Know Why and How Vijay Diwas Celebrated in India
ऐसे हुई थी युद्ध की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

ऐसे हुई थी युद्ध की शुरुआत

बंटवारे के बाद पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से, जिसे अब बांग्लादेश कहते हैं, उसमे सांस्कृतिक और राजनीतिक भेदभाव के कारण तनाव बढ़ गया था। पूर्वी हिस्से में नरसंहार, बलात्कार और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने में पाकिस्तान ने सारी हदें पार कर दी थी। इसी के चलते  26 मार्च, 1971 को पहली बार वहां के लोगों ने स्वतंत्रता की मांग की, लेकिन पाकिस्तान ने इसपर दमनकारी नीति अपनाई। ऐसे में मानवता के खातिर भारत ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन किया, जो पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में बदल गया।

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विजय दिवस - फोटो : Amar Ujala

3 दिसंबर को, 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू हुआ और 13 दिनों तक चला। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना और बांग्लादेशी मुक्ति वाहिनी के सामने ढाका में आत्मसमर्पण कर दिया। इस युद्ध के अंत में लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया, जो इतिहास में किसी युद्ध में सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जाता है।

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विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

16 दिसंबर की शाम ही जनरल नियाजी ने आत्मसमर्पण के कागजों पर हस्ताक्षर किए थे। जब नियाजी ने आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, तब उन्होंने अपनी रिवाल्वर जनरल अरोड़ा के हवाले कर दी। इस दौरान नियाजी की आंखों में आंसू थे। 

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विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

क्या रही भारत की भूमिका

इस युद्ध के बाद भारत ने न केवल बांग्लादेश को सैन्य सहायता प्रदान की, बल्कि लाखों शरणार्थियों को भी शरण दी, जो पाकिस्तान की सेना द्वारा की गई हिंसा से बचकर आए थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने निर्णायक भूमिका निभाई थी।

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