आज 'वर्ल्ड स्लीप डे' है, हर साल मार्च महीने के तीसरे शुक्रवार को यह खास दिन मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को अच्छी नींद को लेकर जागरूक करना और इससे होने वाले फायदों के बारे में बताना है। डॉक्टर्स कहते हैं, रात में 6-8 घंटे की निर्बाध नींद सभी के लिए आवश्यक है, शारीरिक-मानसिक दोनों तरह की सेहत को ठीक रखने के लिए इसे आवश्यक माना जाता है। जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है। इतना ही नहीं अगर आप अच्छी नींद नहीं ले रहे हैं तो आपमें लॉन्ग कोविड की समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
World sleep day 2023: अच्छी नींद नहीं लेते हैं तो वैक्सीनेशन के बाद भी हो सकते हैं लॉन्ग कोविड के शिकार
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नींद की कमी और कोविड का खतरा
नींद की समस्या किस प्रकार से आपमें कोविड की जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है, इसके बारे में जानने के लिए हांगकांग के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए 'गुड गाइफस्टाइल' में अच्छी नींद को शामिल किया जाना आवश्यक है।
अक्सर लोगों को लगता है कि सोना, समय की बर्बादी है क्योंकि आप उस दौरान कुछ भी नहीं कर रहे होते हैं। लेकिन अध्ययनों ने इंगित किया है कि सोना महत्वपूर्ण है, विशेषकर रात की नींद अच्छी लेना आपको सेहतमंद रखने में मदद करती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
चाइनीज यूनिवर्सिटी (सीयूएचके) के शोधकर्ताओं ने नींद और लॉन्ग कोविड के संबंधों को समझने के लिए 17 हजार से अधिक ऐसे लोगों पर अध्ययन किया जो कोरोना संक्रमित रह चुके थे। इन प्रतिभागियों ने mRNA वैक्सीन की दो खुराक भी ली थी।
मेडिकल जर्नल ट्रांसलेशनल साइकेट्री में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को वैक्सीन की दो खुराक मिली थी, उनमें लॉन्ग कोविड विकसित होने की आशंका, एक डोज या बिना वैक्सीनेशन वालों की तुलना में 21 प्रतिशत कम थी। बावजूद इसके, इनमें से जिन प्रतिभागियों ने रोजाना 6 घंटे से कम की नींद ली उनमें लॉन्ग कोविड की समस्याओं के विकसित होने का जोखिम 2 गुना तक अधिक पाया गया।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
अध्ययनकर्ता प्रोफेसर डॉ राचेल चैन नगन-यिन कहते हैं, "टीकाकरण लॉन्ग कोविड के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन जिन लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है, उनमें टीके भी ज्यादा असरदार नहीं पाए गए हैं। असल में नींद हमारी प्रतिरक्षा को बढ़ाती है। अगर हम कम सोते हैं, तो वायरस से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है और इस तरह यह आपमें पोस्ट कोविड की जटिलताओं को बढ़ाने वाली समस्याओं का भी कारण बन सकती है।
सुनिश्चित करें अच्छी नींद
लॉन्ग कोविड के लक्षणों में, वायरस के संपर्क में आने के तीन महीने बाद तक लोगों में सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द और सूंघने की क्षमता कम होने जैसी दिक्कतें देखी जा रही हैं। विश्वविद्यालय में मनोरोग विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विंग युन-क्वोक कहते हैं, नींद में कमी सिर्फ कोविड की जटिलताओं को ही नहीं बढ़ाती है, इसके कारण मेटाबॉलिज्म संबंधी बीमारियों, सूजन और हृदय रोगों का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। सभी उम्र वालों के लिए रोजाना रात की अच्छी नींद बहुत आवश्यक है।
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स्रोत और संदर्भ
Persistent short nighttime sleep duration is associated with a greater post-COVID risk in fully mRNA-vaccinated individuals
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