श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में अलग-अलग आयोजन हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी जन्माष्टमी पर बड़े स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण का मध्य प्रदेश से खास संबंध है। भगवान की आठ पटरानियां थीं– रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिति (या सत्या), भद्रा और लक्ष्मणा। इनमें से तीन का मध्य प्रदेश से विशेष संबंध है– रुक्मिणी का धार के अमझेरा से, जाम्बवती का रायसेन से और मित्रविंदा का उज्जैन से। यानी रायसेन भी भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि श्रीकृष्ण का विवाह रायसेन जिले के बरेली के पास स्थित जामगढ़ की गुफा में रहने वाले जामवंत की पुत्री जाम्बवती से हुआ था। इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। यहां पर प्राचीन मूर्तियां भी मिली थीं।
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Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण की आठ में से तीन पटरानियां MP से, रायसेन में भी ससुराल, जानें कहां-किससे हुआ विवाह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 16 Aug 2025 09:14 AM IST
सार
भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से तीन का संबंध मध्य प्रदेश से हैं। रुक्मिणी जी का धार के अमझेरा, जाम्बवती का रायसेन के बरेली स्थित जामगढ़ और मित्रविंदा का उज्जैन से संबंध है।
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धार स्थित अमझेरा का अमका-झमका मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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अमझेरा स्थित रुक्मिणी हरण स्थल
- फोटो : अमर उजाला
धार के अमझेरा में हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का मिलन
धार जिले के अमझेरा से भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था। यहां पर अमका-झमका मंदिर बना हुआ है। भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी भगवान कृष्ण से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया। रुक्मिणी ने संदेश भेजकर कृष्ण से विवाह का अनुरोध किया। तय योजना के अनुसार, दोनों की मुलाकात अमझेरा में हुई। जब शिशुपाल बारात लेकर विदर्भ पहुंचा, तब श्रीकृष्ण रुक्मिणी को साथ लेकर द्वारका चले गए। इसलिए अमझेरा को भगवान की ससुराल कहा जाता है।
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अवंतिका के राजा जयसेन की पुत्री थीं मित्रविंदा
मित्रविंदा अवंतिका (उज्जैन) के राजा जयसेन की पुत्री थीं। उनके भाइयों के नाम विन्द और अनुविन्द थे। दोनों भाई मित्रविंदा का विवाह दुर्योधन से कराना चाहते थे, लेकिन मित्रविंदा श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती थीं। भाइयों ने स्वयंवर का आयोजन किया और उन्हें दुर्योधन के गले में वरमाला डालने को कहा। जब श्रीकृष्ण को पता चला कि बलपूर्वक वरमाला डलवाई जाएगी तो उन्होंने मित्रविंदा का हरण कर लिया और भाइयों को युद्ध में पराजित कर दिया। बाद में श्रीकृष्ण मित्रविंदा को द्वारका ले गए और उनसे विवाह किया।
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चमत्कारिक स्यमंतक मणि की तलाश में मिली थीं जाम्बवती
रायसेन जिले के बरेली स्थित जामगढ़ की गुफा में जामवंत रहते थे। उनकी पुत्री का नाम जाम्बवती था। श्रीकृष्ण से युद्ध में हारने के बाद जामवंत ने अपनी पुत्री का विवाह उनसे करा दिया। दरअसल, द्वारका के सत्राजित नामक व्यक्ति के पास चमत्कारिक स्यमंतक मणि थी, जिसकी विशेषता यह थी कि वह प्रतिदिन 20 तोला सोना देती थी। श्रीकृष्ण ने सत्राजित से कहा कि यदि वह मणि राजकोष में दे देंगे तो राज्य व्यवस्था में धन का उपयोग किया जा सकेगा। लेकिन, सत्राजित ने देने से इनकार कर दिया। एक दिन सत्राजित का भाई प्रसेनजित बिना बताए मणि लेकर जंगल चला गया, जहां शेर ने उसे मार डाला और मणि गिर गई। सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर चोरी का आरोप लगा दिया। इस कलंक को मिटाने के लिए श्रीकृष्ण मणि की खोज में जंगल गए। वहां उन्हें पता चला कि मणि जामवंत के पास है। दोनों में युद्ध हुआ, जिसके बाद जामवंत ने मणि श्रीकृष्ण को सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह भी उनसे कर दिया। बाद में श्रीकृष्ण ने वह मणि सत्राजित को लौटा दी।
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धार जिले के अमझेरा से भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था। यहां पर अमका-झमका मंदिर बना हुआ है। भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी भगवान कृष्ण से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया। रुक्मिणी ने संदेश भेजकर कृष्ण से विवाह का अनुरोध किया। तय योजना के अनुसार, दोनों की मुलाकात अमझेरा में हुई। जब शिशुपाल बारात लेकर विदर्भ पहुंचा, तब श्रीकृष्ण रुक्मिणी को साथ लेकर द्वारका चले गए। इसलिए अमझेरा को भगवान की ससुराल कहा जाता है।
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अवंतिका के राजा जयसेन की पुत्री थीं मित्रविंदा
मित्रविंदा अवंतिका (उज्जैन) के राजा जयसेन की पुत्री थीं। उनके भाइयों के नाम विन्द और अनुविन्द थे। दोनों भाई मित्रविंदा का विवाह दुर्योधन से कराना चाहते थे, लेकिन मित्रविंदा श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती थीं। भाइयों ने स्वयंवर का आयोजन किया और उन्हें दुर्योधन के गले में वरमाला डालने को कहा। जब श्रीकृष्ण को पता चला कि बलपूर्वक वरमाला डलवाई जाएगी तो उन्होंने मित्रविंदा का हरण कर लिया और भाइयों को युद्ध में पराजित कर दिया। बाद में श्रीकृष्ण मित्रविंदा को द्वारका ले गए और उनसे विवाह किया।
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चमत्कारिक स्यमंतक मणि की तलाश में मिली थीं जाम्बवती
रायसेन जिले के बरेली स्थित जामगढ़ की गुफा में जामवंत रहते थे। उनकी पुत्री का नाम जाम्बवती था। श्रीकृष्ण से युद्ध में हारने के बाद जामवंत ने अपनी पुत्री का विवाह उनसे करा दिया। दरअसल, द्वारका के सत्राजित नामक व्यक्ति के पास चमत्कारिक स्यमंतक मणि थी, जिसकी विशेषता यह थी कि वह प्रतिदिन 20 तोला सोना देती थी। श्रीकृष्ण ने सत्राजित से कहा कि यदि वह मणि राजकोष में दे देंगे तो राज्य व्यवस्था में धन का उपयोग किया जा सकेगा। लेकिन, सत्राजित ने देने से इनकार कर दिया। एक दिन सत्राजित का भाई प्रसेनजित बिना बताए मणि लेकर जंगल चला गया, जहां शेर ने उसे मार डाला और मणि गिर गई। सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर चोरी का आरोप लगा दिया। इस कलंक को मिटाने के लिए श्रीकृष्ण मणि की खोज में जंगल गए। वहां उन्हें पता चला कि मणि जामवंत के पास है। दोनों में युद्ध हुआ, जिसके बाद जामवंत ने मणि श्रीकृष्ण को सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह भी उनसे कर दिया। बाद में श्रीकृष्ण ने वह मणि सत्राजित को लौटा दी।
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