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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: CM मोहन भगवान कृष्ण के पौराणिक स्थलों पर जाएंगे, 700 वर्ष पुराने मंदिर में करेंगे पूजा
Sat, 16 Aug 2025 07:44 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 16 Aug 2025 07:44 AM IST
सार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में कार्यक्रम के आयोजन होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगवान कृष्ण-कन्हैया के रायसेन में 700 वर्ष पुराने मंदिर में पूजा करेंगे। साथ ही श्रीकृष्ण के मध्य प्रदेश में अन्य गौरवशाली अतीत से जुड़े स्थालों का भ्रमण करेंगे। मुख्यमंती निवास में श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा सीएम भोपाल केंद्रीय जेल में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
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उज्जैन स्थित सांदीपनी आश्रम
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों का भ्रमण करेंगे। भगवान श्रीकृष्ण के गौरवशाली इतिहास के महत्वपूर्ण प्रसंगों का स्मरण करते हुए जन्माष्टमी के अवसर पर सीएम ने इन स्थलों पर जाने का निर्णय किया है। अपने कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री शनिवार को रायसेन जिले के महलपुर पाठा, धार जिले के अमझेरा और इंदौर जिले के जानापाव जाएंगे। साथ ही विभिन्न प्राचीन कृष्ण मंदिरों में दर्शन करेंगे। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम, गोपाल मंदिर के अलावा महिदपुर के निकट स्थित नारायणा धाम, भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का साक्षी रहा है। प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए न्यास भी गठित किया गया है। ऐसे स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन स्थलों के भ्रमण का उद्देश्य आज की पीढ़ी को समृद्ध इतिहास के अध्याय से परिचित करवाना है। ऐसे ऐतिहासिक महत्व के स्थानों को स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियो को भी इतिहास की जानकरी देने के लिए शैक्षणिक भ्रमण में शामिल किया जाता रहा है।
धार का अमझेरा स्थित अमका झमका मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
धार के अमझेरा में मिले थे श्रीकृष्ण रुक्मिणी जी से
सीएम धार के अमझेरा स्थित अमका-झमका मंदिर भी जाएंगे। बताया जाता है कि श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी जी का अमका-झमका मंदिर से ही हरण किया था। रुक्मिणी हरण के बारे में बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रसंग मका-झमका मंदिर से जुड़ा है। यह प्रसिद्ध प्रसंग भागवत पुराण और अन्य हिन्दू धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। रुक्मिणी जी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं, वह श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती थी। रुकमणि के भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे। रुक्मिणी जी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे विवाह करने का आग्रह किया। तब श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का अमझेरा में मिलना तय हुआ। जब शिशुपाल बारात लेकर विदर्भ पहुंचा, तो श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया और उन्हें द्वारका ले गए, जहां उन्होंने उनसे विवाह किया।
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जानापाव में मिला था सुदर्शन चक्र
सीएम इंदौर जिले में स्थित जानापाव भी जाएंगे। जानापाव को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। इस स्थान पर ही भगवान परशुराम ने भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र पदान किया था। इसका उल्लेख शास्त्रों में हैं। वहीं, भोपाल में मुख्यमंत्री निवास में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बड़ा कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, जिसमें सीएम शामिल होंगे। वहीं, मुख्यमंत्री भोपाल केंद्रीय जेल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
ये भी पढ़ें- MP News: सीएम डॉ. यादव बोले- ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब दिया
सीएम धार के अमझेरा स्थित अमका-झमका मंदिर भी जाएंगे। बताया जाता है कि श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी जी का अमका-झमका मंदिर से ही हरण किया था। रुक्मिणी हरण के बारे में बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रसंग मका-झमका मंदिर से जुड़ा है। यह प्रसिद्ध प्रसंग भागवत पुराण और अन्य हिन्दू धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। रुक्मिणी जी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं, वह श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती थी। रुकमणि के भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे। रुक्मिणी जी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे विवाह करने का आग्रह किया। तब श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का अमझेरा में मिलना तय हुआ। जब शिशुपाल बारात लेकर विदर्भ पहुंचा, तो श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया और उन्हें द्वारका ले गए, जहां उन्होंने उनसे विवाह किया।
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जानापाव में मिला था सुदर्शन चक्र
सीएम इंदौर जिले में स्थित जानापाव भी जाएंगे। जानापाव को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। इस स्थान पर ही भगवान परशुराम ने भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र पदान किया था। इसका उल्लेख शास्त्रों में हैं। वहीं, भोपाल में मुख्यमंत्री निवास में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बड़ा कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, जिसमें सीएम शामिल होंगे। वहीं, मुख्यमंत्री भोपाल केंद्रीय जेल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
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उज्जैन स्थित नारायणा धाम
- फोटो : अमर उजाला
सांदीपनि आश्रम और गोपालपुर मंदिर भी जाएंगे
मुख्यमंत्री उज्जैन के गोपालपुर मंदिर और सांदीपनि आश्रम भी जाएंगे। गोपालपुर नगर के दूसरा सबसे बड़ा मंदिर हैं। इस मंदिर के द्वार सोमनाथ मंदिर के द्वार हैं। इस द्वार को 11वीं सदी में महमूद गजनी ने मंदिर पर हमला कर लूट लिया था। महमूद गजनी इसे अपने साथ विदेश ले गया था, जो भारत वापस लाया गया। मराठा शैली में निर्मित यह मंदिर प्राचीन गौरवगाथा बयान करता है। इसका मुख्य द्वार चांदी का है। गोपालपुर मंदिर को 19 वीं सदी में सिंधिया शासकों द्वारा निर्मित करवाया गया। इसके अलावा, सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने अध्ययन प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने गुरू सांदीपनि से 16 विद्याएं,18 पुराण और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित किया था। इस स्थान पर जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन होते हैं। मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण पाथेय के विकास में इन स्थानों के महत्व का उल्लेख करते हुए इनके समुचित विकास की योजना क्रियान्वित करने को कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जन्माष्टमी पर प्रदेश के 20 से अधिक स्थानों और विशेष कार्यक्रमों के आमंत्रण मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव चयनित स्थानों का भ्रमण करेंगे।
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मुख्यमंत्री उज्जैन के गोपालपुर मंदिर और सांदीपनि आश्रम भी जाएंगे। गोपालपुर नगर के दूसरा सबसे बड़ा मंदिर हैं। इस मंदिर के द्वार सोमनाथ मंदिर के द्वार हैं। इस द्वार को 11वीं सदी में महमूद गजनी ने मंदिर पर हमला कर लूट लिया था। महमूद गजनी इसे अपने साथ विदेश ले गया था, जो भारत वापस लाया गया। मराठा शैली में निर्मित यह मंदिर प्राचीन गौरवगाथा बयान करता है। इसका मुख्य द्वार चांदी का है। गोपालपुर मंदिर को 19 वीं सदी में सिंधिया शासकों द्वारा निर्मित करवाया गया। इसके अलावा, सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने अध्ययन प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने गुरू सांदीपनि से 16 विद्याएं,18 पुराण और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित किया था। इस स्थान पर जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन होते हैं। मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण पाथेय के विकास में इन स्थानों के महत्व का उल्लेख करते हुए इनके समुचित विकास की योजना क्रियान्वित करने को कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जन्माष्टमी पर प्रदेश के 20 से अधिक स्थानों और विशेष कार्यक्रमों के आमंत्रण मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव चयनित स्थानों का भ्रमण करेंगे।
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