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Bhopal News: जेपी अस्पताल में मरीजों की जेब पर बड़ा वार, जनरल वार्ड और आईसीयू में भर्ती का अब रोज लगेगा चार्ज
Thu, 13 Aug 2026 07:08 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:08 PM IST
सार
जेपी अस्पताल में एपीएल मरीजों पर नया आर्थिक बोझ बढ़ गया है। अब जनरल वार्ड में 50 और आईसीयू में 100 रुपए प्रतिदिन बेड शुल्क देना होगा। रोगी कल्याण समिति के बजट का हवाला देकर शुल्क की मंजूरी ली गई है। प्रदेश के अन्य जिला अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था नहीं होने से फैसले पर सवाल उठे हैं।
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जेपी अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी के जेपी अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों पर अब नया आर्थिक बोझ पड़ने जा रहा है। अस्पताल में भर्ती एपीएल मरीजों को अब सिर्फ इलाज और दवाइयों से जुड़ा खर्च ही नहीं, बल्कि अस्पताल के बेड का भी रोजाना शुल्क देना होगा। रोगी कल्याण समिति की बैठक में बजट का हवाला देकर जनरल वार्ड और आईसीयू में भर्ती मरीजों से प्रतिदिन शुल्क लेने का प्रस्ताव रखा गया। सिविल सर्जन ने इस प्रस्ताव के लिए कलेक्टर से अनुमति ली और इसके बाद आदेश जारी कर दिया गया। नए आदेश के मुताबिक एपीएल कार्डधारक मरीज को जनरल वार्ड में भर्ती रहने पर 50 रुपए प्रतिदिन और आईसीयू में 100 रुपए प्रतिदिन देने होंगे। बीपीएल और आयुष्मान कार्डधारकों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है। जेपी अस्पताल में अब तक भर्ती के समय सामान्य वार्ड के लिए 25 रुपए और आईसीयू के लिए 50 रुपए की रसीद एक बार काटी जाती थी। अब व्यवस्था बदल गई है। मरीज जितने दिन अस्पताल में भर्ती रहेगा, उतने दिन का शुल्क देना होगा।
प्रदेश के दूसरे जिला अस्पतालों में नहीं है ऐसी व्यवस्था
इस फैसले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश के अन्य जिला अस्पतालों में भर्ती मरीजों से सामान्य वार्ड या आईसीयू के लिए इस तरह प्रतिदिन बेड शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जेपी अस्पताल में यह व्यवस्था क्यों शुरू की गई, इस पर सवाल उठ रहे हैं। जेपी अस्पताल प्रदेश के सरकारी जिला अस्पतालों की व्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए यहां लिए गए इस फैसले का असर दूसरे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
रोगी कल्याण समिति की बैठक में रखा प्रस्ताव
भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार रोगी कल्याण समिति की बैठक में सिविल सर्जन की ओर से बेड शुल्क का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें रोगी कल्याण समिति के बजट और जरूरतों का हवाला दिया गया। प्रस्ताव पर कलेक्टर की मंजूरी मिलने के बाद शुल्क लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। यानी अस्पताल में बेड शुल्क लगाने का आधार रोगी कल्याण समिति के बजट को बनाया गया है।
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कलेक्टर बोले- मामले की करेंगे समीक्षा
वहीं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मामले पर अलग रुख सामने रखा है। उनका कहना है कि अस्पताल अधीक्षक ने बेड शुल्क की मांग उनके सामने रखी थी और उन्होंने अनुमति दी थी। बाद में जब उन्हें बताया गया कि प्रदेश में किसी अन्य सरकारी अस्पताल में सामान्य वार्ड का बेड शुल्क नहीं लिया जाता, तो उन्होंने मामले की समीक्षा करने की बात कही। कलेक्टर के अनुसार सिविल सर्जन से बात की जाएगी और यदि नियम के विपरीत शुल्क लिया जा रहा है तो आदेश निरस्त भी किया जा सकता है।
एक्स-रे से ईको और दांतों की पिलिंग तक पर शुल्क
जेपी अस्पताल में मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने का यह अकेला मामला नहीं है। जानकारी के अनुसार रोगी कल्याण समिति के नाम पर पहले निःशुल्क मिलने वाली कुछ सुविधाओं के लिए भी शुल्क लिया जा रहा है। जिसमें एक्स-रे, ईको जांच और दांतों की पिलिंग के लिए मरीजों से पैसे लिए जा रहे हैं। मेडिकल बोर्ड की फीस भी 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए किए जाने की जानकारी सामने आई है। ईको जांच के लिए 500 रुपए शुल्क लिया जा रहा है।
21 कर्मचारियों की सेवाएं खत्म करने के बाद अब मरीजों पर शुल्क
जेपी अस्पताल प्रबंधन पहले भी रोगी कल्याण समिति से जुड़े कर्मचारियों को लेकर विवादों में रहा है। हाल ही में समिति के 21 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। अब इसी समिति के बजट का हवाला देकर मरीजों से बेड शुल्क लेने की व्यवस्था शुरू होने से सवाल और गहरे हो गए हैं। एक तरफ समिति के कर्मचारियों की सेवाएं खत्म की गईं, दूसरी तरफ समिति के मद में राशि बढ़ाने के लिए मरीजों पर शुल्क का बोझ डाला जा रहा है। इसी वजह से अस्पताल प्रबंधन के फैसलों को लेकर मरीजों और कर्मचारियों दोनों के स्तर पर नाराजगी की स्थिति बन रही है।
यह भी पढ़ें- 6 दिन से नर्सिंग छात्रों का आंदोलन: हर तरीके से विरोध के बाद भी नहीं हुई सुनवाई, अब काउंसिल की निकाली अर्थी
सरकार खर्च उठा रही तो मरीजों से वसूली क्यों?
मरीजों से ली जा रही राशि की रसीद रोगी कल्याण समिति के मद में काटी जा रही है। इसी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि जब सरकारी अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली कई मूलभूत सुविधाओं का खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाता है, तो उनके लिए रोगी कल्याण समिति के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त पैसा क्यों लिया जा रहा है। रोगी कल्याण समिति का उद्देश्य अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना और व्यवस्थाओं में सुधार करना है। ऐसे में इसी मद को बढ़ाने के लिए मरीजों से शुल्क लेने की व्यवस्था पर आपत्ति जताई जा रही है।
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प्रदेश के दूसरे जिला अस्पतालों में नहीं है ऐसी व्यवस्था
इस फैसले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश के अन्य जिला अस्पतालों में भर्ती मरीजों से सामान्य वार्ड या आईसीयू के लिए इस तरह प्रतिदिन बेड शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जेपी अस्पताल में यह व्यवस्था क्यों शुरू की गई, इस पर सवाल उठ रहे हैं। जेपी अस्पताल प्रदेश के सरकारी जिला अस्पतालों की व्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए यहां लिए गए इस फैसले का असर दूसरे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
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रोगी कल्याण समिति की बैठक में रखा प्रस्ताव
भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार रोगी कल्याण समिति की बैठक में सिविल सर्जन की ओर से बेड शुल्क का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें रोगी कल्याण समिति के बजट और जरूरतों का हवाला दिया गया। प्रस्ताव पर कलेक्टर की मंजूरी मिलने के बाद शुल्क लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। यानी अस्पताल में बेड शुल्क लगाने का आधार रोगी कल्याण समिति के बजट को बनाया गया है।
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कलेक्टर बोले- मामले की करेंगे समीक्षा
वहीं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मामले पर अलग रुख सामने रखा है। उनका कहना है कि अस्पताल अधीक्षक ने बेड शुल्क की मांग उनके सामने रखी थी और उन्होंने अनुमति दी थी। बाद में जब उन्हें बताया गया कि प्रदेश में किसी अन्य सरकारी अस्पताल में सामान्य वार्ड का बेड शुल्क नहीं लिया जाता, तो उन्होंने मामले की समीक्षा करने की बात कही। कलेक्टर के अनुसार सिविल सर्जन से बात की जाएगी और यदि नियम के विपरीत शुल्क लिया जा रहा है तो आदेश निरस्त भी किया जा सकता है।
एक्स-रे से ईको और दांतों की पिलिंग तक पर शुल्क
जेपी अस्पताल में मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने का यह अकेला मामला नहीं है। जानकारी के अनुसार रोगी कल्याण समिति के नाम पर पहले निःशुल्क मिलने वाली कुछ सुविधाओं के लिए भी शुल्क लिया जा रहा है। जिसमें एक्स-रे, ईको जांच और दांतों की पिलिंग के लिए मरीजों से पैसे लिए जा रहे हैं। मेडिकल बोर्ड की फीस भी 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए किए जाने की जानकारी सामने आई है। ईको जांच के लिए 500 रुपए शुल्क लिया जा रहा है।
21 कर्मचारियों की सेवाएं खत्म करने के बाद अब मरीजों पर शुल्क
जेपी अस्पताल प्रबंधन पहले भी रोगी कल्याण समिति से जुड़े कर्मचारियों को लेकर विवादों में रहा है। हाल ही में समिति के 21 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। अब इसी समिति के बजट का हवाला देकर मरीजों से बेड शुल्क लेने की व्यवस्था शुरू होने से सवाल और गहरे हो गए हैं। एक तरफ समिति के कर्मचारियों की सेवाएं खत्म की गईं, दूसरी तरफ समिति के मद में राशि बढ़ाने के लिए मरीजों पर शुल्क का बोझ डाला जा रहा है। इसी वजह से अस्पताल प्रबंधन के फैसलों को लेकर मरीजों और कर्मचारियों दोनों के स्तर पर नाराजगी की स्थिति बन रही है।
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सरकार खर्च उठा रही तो मरीजों से वसूली क्यों?
मरीजों से ली जा रही राशि की रसीद रोगी कल्याण समिति के मद में काटी जा रही है। इसी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि जब सरकारी अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली कई मूलभूत सुविधाओं का खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाता है, तो उनके लिए रोगी कल्याण समिति के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त पैसा क्यों लिया जा रहा है। रोगी कल्याण समिति का उद्देश्य अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना और व्यवस्थाओं में सुधार करना है। ऐसे में इसी मद को बढ़ाने के लिए मरीजों से शुल्क लेने की व्यवस्था पर आपत्ति जताई जा रही है।
