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Ganesh Utsav: मध्य प्रदेश के इस गांव में नहीं होती गणेशजी की स्थापना, जानें क्या है इसके पीछे की वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 01 Sep 2022 05:10 PM IST
सार
Ganesh Utsav: मध्य प्रदेश के इस गांव में नहीं होती गणेशजी की स्थापना, जानें क्या है इसके पीछे की वजह Ganesh Utsav: Establishment of Ganesh ji is not done in this village of Madhya Pradesh, know what is the reason behind it
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ग्राम बाचावानी के तिल गणेश, मान्यता है कि ये हर साल तिल बराबर बढ़ते हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
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मध्य प्रदेश में दस दिवसीय गणेशोत्सव की धूम है। कई दिनों पहले से गणेशजी को लाने की तैयारी होने लगती है। वहीं प्रदेश का एक गांव ऐसा है, जहां भगवान गणेशजी की स्थापना नहीं की जाती।
हम बात कर रहे हैं होशंगाबाद अब नर्मदापुरम जिले के गांव बाचावानी की। जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर बसा ये गांव गांव में विराजित चार शताब्दी पुराने मंदिर में ही गणेशजी की आराधना करते हैं। यहां गणेशजी की स्थापना नहीं की जाती, इसके पीछे यहां के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से कोई बड़ी विपदा का सामना करना पड़ता है। अपनी बातों को बल देते हुए वे कुछ उदाहरण भी बताते हैं।
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माघ महीने की तिल गणेश चतुर्थी को गणेश धाम में मेला लगता है।
- फोटो : सोशल मीडिया
गांववाले बताते हैं कि एक बार एक परिवार ने घर में गणेशप्रतिमा स्थापित कर ली थी। अचानक उस घर में आग लग गई और बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया गया था। फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंचती तो पूरा गांव आग की चपेट में आ जाता। तब से इस बात को और अधिक बल मिल गया और कोई भी गांव में गणेश स्थापना नहीं करता।
ऐसा नहीं है कि यहां के लोग गणेश उत्सव नहीं मनाते। वे गांव में ही चार शताब्दी पुराने तिल गणेश में पूजन-अर्चन करते हैं। तिल गणेश के बारे में भी कहानी है। बताया जाता है कि ये गणेश प्रतिमा हर साल तिल बराबर बढ़ रही है। पुजारी मनोहरदास बैरागी ने बताया कि इस मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण एक ही पत्थर से किया गया है। जिस पर ऋद्धि, सिद्धि, मूषक व शुभ लाभ भी बने हुए हैं।
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पुजारी मनोहरदास बैरागी ने बताया कि 400 साल पहले यह प्रतिमा यहां खेत में मिली थी।
- फोटो : सोशल मीडिया
गांव के एक बुजुर्ग बाबूलाल बड़कुर ने बताया कि मेरा जन्म इसी गांव में हुआ है। मैंने बचपन में प्रतिमा को छोटा स्वरूप में देखा था। लेकिन अब यह प्रतिमा बढ़ी हो गई है। पुजारी बैरागी ने बताया कि 400 साल पहले यह प्रतिमा यहां खेत में मिली थी। तभी से यहां मदिंर बनवाकर इस मूर्ति की स्थापना कराई गई। तब से लेकर अब तक माघ महीने की तिल गणेश चतुर्थी को गणेश धाम में मेला लगता है।
वहीं ग्राम बाचावानी के लोगों का मानना है कि श्री गणेश उनकी प्राकृतिक विपदाओं से रक्षा करते हैं। ग्रामीणों ने दावा किया कि बाचावानी के खेतों में ओलों से कभी नुकसान नहीं हुआ। यहां ओले गिरते ही नहीं हैं और यदि कभी गिरने भी लगें तो तो मंदिर का घंटा बजाते ही बंद हो जाते हैं।
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