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हाशिए पर इंदौर पार्ट 3: दस वर्षों में न एयरपोर्ट का विस्तार हुआ, न कान्ह नदी की हो सकी सफाई

Fri, 03 Jul 2026 06:31 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 03 Jul 2026 06:31 AM IST
सार

इंदौर में पिछले एक दशक से कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं अधूरी हैं। एयरपोर्ट विस्तार, पश्चिमी बायपास, कान्ह नदी शुद्धिकरण और नर्मदा परियोजना जैसी योजनाएं धीमी गति से चल रही हैं। विशेषज्ञों ने विभागों के बीच तालमेल की कमी, दूरदृष्टि के अभाव और योजनाओं में देरी को शहर के विकास में बड़ी बाधा बताया।

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Indore : In ten years, neither the airport was expanded nor the Kanh river could be cleaned.
इंदौर में विकास की धीमी रफ्तार - फोटो : अमर उजाला
शहर के विकास की रफ्तार धीमी होने से कई परियोजनाएं वर्षों से पूरी नहीं हो पा रही हैं। या तो वे फाइलों में कैद हैं, या उनके लिए बजट ही मंजूर नहीं हो पाया है। इंदौर में ऐसे कई काम हैं, जो बीते दस वर्षों में पूरे नहीं हो सके, जबकि उनकी आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।


वर्ष 2010 तक इंदौर शहर के विकास की जो रफ्तार थी, वह अब नजर नहीं आती। तब जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत सीवरेज, सड़कें, 15 से अधिक फीडर रोड, यशवंत सागर गहरीकरण योजना, सीवरेज प्रोजेक्ट, मल्टीलेवल पार्किंग सहित कई कार्य एक साथ शुरू हुए थे। इसके अलावा बीआरटीएस बना और नर्मदा परियोजना का तीसरा चरण भी उसी दौरान शुरू हुआ। लेकिन बीते 10 वर्षों में नए ब्रिज, सड़कों के चौड़ीकरण, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और मेट्रो ट्रेन के अलावा कोई बड़ी सौगात शहर को नहीं मिली। जो बीआरटीएस बनाया गया था, उसे भी हाल ही में तोड़ दिया गया।

एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन नहीं
इंदौर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मिल चुका है, लेकिन पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण उड़ानों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाई। एयरपोर्ट विस्तार के लिए राज्य सरकार से जमीन मांगी गई थी, लेकिन अब तक वह एयरपोर्ट प्राधिकरण को नहीं मिल सकी है। शिवराज सरकार के समय से इसके लिए कवायद शुरू हुई थी, लेकिन अब मामला ठंडे बस्ते में है। दूसरी ओर, उज्जैन में एयरपोर्ट बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।

 
Indore : In ten years, neither the airport was expanded nor the Kanh river could be cleaned.
इंदौर में विकास की धीमी रफ्तार - फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी बायपास का काम शुरू नहीं
शहर में पूर्वी बायपास वर्ष 2000 में बनकर तैयार हो गया था, लेकिन पश्चिमी बायपास का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि इस परियोजना को आठ वर्ष पहले मंजूरी मिल चुकी थी। अब तक भूमि अधिग्रहण भी पूरा नहीं हो सका है। करीब 60 किलोमीटर लंबे इस बायपास के बनने से हाईवे का ट्रैफिक सुगम होगा और शहर पर यातायात का दबाव कम होगा।

500 करोड़ खर्च होने पर भी कान्ह गंदी
पिछले 20 वर्षों में कान्ह नदी की सफाई पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। नालों का गंदा पानी नदी में जाने से रोकने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन इसके बावजूद गंदा पानी नदी में बह रहा है। छह से अधिक स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनका असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है। दस वर्ष पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नमामि गंगे परियोजना के तहत कान्ह-शिप्रा नदी के लिए योजना तैयार करने को कहा था, लेकिन यह काम आगे नहीं बढ़ सका। अब उज्जैन में कान्ह नदी के गंदे पानी को डायवर्ट करने के लिए डेढ़ हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा रही है।

 
Indore : In ten years, neither the airport was expanded nor the Kanh river could be cleaned.
इंदौर में विकास की धीमी रफ्तार - फोटो : अमर उजाला

योजनाएं अधूरी न छोड़ें
इंदौर में योजनाओं को पूरा करने के लिए दूरदृष्टि की जरूरत है। पहले बीआरटीएस के कारण मेट्रो का रूट एबी रोड पर तय नहीं किया गया। अब बीआरटीएस को हटा दिया गया और मेट्रो के लिए ऐसा रूट चुना गया है, जहां यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहेगी।
- मुकेश चौहान, पूर्व चीफ इंजीनियर, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण

प्लान देरी से बनते हैं
भविष्य की जरूरतों के हिसाब से जिन योजनाओं पर समय रहते काम शुरू होना चाहिए, उन्हें बनने में ही वर्षों लग जाते हैं। इस बार शहर में जल संकट सामने आया। नर्मदा परियोजना के चौथे चरण का काम चार माह पहले शुरू हुआ, जबकि बढ़ती आबादी को देखते हुए यह अब तक पूरा हो जाना चाहिए था। मास्टर प्लान में हो रही देरी भी भविष्य में परेशानी खड़ी करेगी।
- शिवाजी मोहिते, सामाजिक कार्यकर्ता


 
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इंदौर में विकास की धीमी रफ्तार - फोटो : अमर उजाला

तालमेल का अभाव
विकास योजनाओं में विभागों के बीच तालमेल का अभाव है। पहले सड़क बनाई जाती है, फिर पाइपलाइन या अन्य लाइनें बिछाने के लिए उसे खोद दिया जाता है। जनता की मेहनत की कमाई का इस तरह उपयोग उचित नहीं है। कान्ह नदी पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन नतीजा सबके सामने है।
- रामेश्वर गुप्ता, अध्यक्ष, अभ्यास मंडल

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