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Krishi Manthan Workshop: CM Yadav said – Agriculture is the basic foundation of Indian culture and way of life
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कृषि मंथन कार्यशाला: सीएम यादव बोले- कृषि आजीविका का साधन ही नहीं, भारतीय संस्कृति और जीवन पद्धति का मूल आधार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Wed, 08 Apr 2026 07:49 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने कृषि मंथन कार्यशाला में किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया। 23 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। गेहूं समर्थन मूल्य बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन विस्तार और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है।
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जबलपुर में सीएम मोहन यादव ने लोकार्पण किया।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों को सह अस्तित्व की दृष्टि से बड़े सम्मान के साथ देखा गया है। समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश की थीम के साथ पूरे वर्ष प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। कृषि के माध्यम से हमें प्रकृति के साथ जीने का अवसर मिलता है। देश में कृषि की परंपरा लाखों साल पुरानी है। भीम बैठिका में पुरातन काल से कृषि की परंपरा के शैलचित्र देखने को मिलते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों से कृषि के साथ जीने का मार्ग दिखाया है।
ये बातें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा गौमाता का पूजन कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय किसान, जय जवान में जय विज्ञान जोड़ा गया था, वर्तमान दौर में हम, इसमें जय अनुसंधान भी जोड़ रहे हैं। प्रदेश में किसानों को हम केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बेहतर मार्केट लिकेंजेस से भी सशक्त बना रहे हैं। कृषि मंथन कार्यशाला किसानों के अनुभव, विज्ञान के नवाचार, सरकार की नीतियों और बाजार की संभावनाओं को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त प्रयास है।
सौगातों की लगाई झड़ी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उन्नत बीज प्रसंस्करण, औषधीय पौध प्रजाति, खाद्य प्रसंस्करण एवं उन्नत कृषि फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 23 करोड़ 21 लाख की लागत के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण कर विकास की सौगाते दी। इनमें प्रमुख रूप से 13 करोड़ रुपये की लागत से बने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन, 1.11 करोड़ रुपये लागत के बोहानी गन्ना अनुसंधान केन्द्र के प्रशासनिक भवन, 1 करोड़ रुपये लागत के बालाघाट जिले के कृषि महाविद्यालय वारासिवनी के कौशल विकास केन्द्र के साथ ही जबलपुर में 1.26 करोड़ रुपये से बने स्वचालित तरल जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र का लोकार्पण किया। साथ ही किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की 4 करोड़ 92 लाख रुपये से निर्मित 4 इकाइयों का भी लोकार्पण किया गया, इसमें रीवा एवं शहडोल के ज्ञान प्रसार केन्द्र शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित 10 स्टार्ट-अप्स को 10 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृति आदेश का वितरण किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष में हमें और आगे बढ़ना है। प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए परंपरागत बीजों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे हमारी कृषि उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। राज्य सरकार पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक यंत्र सभी को साथ जोड़कर किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य है। बाबा महाकाल के प्रसाद में रागी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। राज्य सरकार दूध उत्पादन से किसान की आय बढ़ा रही है। शासकीय स्कूलों में पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन की अलग-अलग योजना पर कार्य कर रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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जबलपुर में सीएम यादव ने हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चेक सौंपे
- फोटो : अमर उजाला
सरसों की फसल पर भी भावांतर का लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक नई किस्मों के विकास में पोषकता पर विशेष जोर दे रहे हैं। प्रदेश में गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड बना है। मध्यप्रदेश ने गेहूं उत्पादन में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में गेहूं का उपार्जन 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है। इसे 2700 रुपए तक पहुंचाने के लिए हम संकल्पित है। प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ मिला है। अब सरसों की फसल पर भी भावांतर का लाभ किसानों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान की कल्पना की थी। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। मध्यप्रदेश, देश में कृषि क्षेत्र में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला राज्य बना है। इसमें माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद शामिल है।
कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कृषि मंथन कार्यशाला में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, कृषि स्टार्ट-अप, एफपीओ एवं किसान बंधु शामिल हुए हैं। यह मंच कृषि के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश अनेक कृषि फसलों में देश में नंबर-1 है। कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए गेहूं, सोयाबीन और चना सहित अनेक नई फसलों की किस्में तैयार की हैं। विश्वविद्यालय ने बालाघाट के चिन्नौर चावल और रीवा के सुंदरजा आम के लिए जीआई टैग प्राप्त किए हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के साथ किया संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में देश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विकास दर को गति देने के लिए क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर गतिविधियों को सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिए। वैज्ञानिकों ने पशुधन और पशुचारे के प्रबंधन के माध्यम से किसानों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर भी अपने विचार साझा किए।
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