सावन के आखिरी सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की शाही सवारी निकाली गई। पालकी में सवार होकर बाबा महाकाल ने चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में बाबा महाकाल प्रजा के बीच पहुंचे और हाल जाना। सावन माह के आखिरी सोमवार पर आखिरी सवारी निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त बाबा की सवारी में उमड़े और दर्शन किए। सोमवार होने की वजह से सुबह भस्म आरती से लेकर भोग आरती तक महाकाल धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल का जलाभिषेक और पूजन अर्चन करने पहुंचे। आज सावन माह की आखिरी सवारी निकाली गई, अब भादो माह में बाबा महाकाल की दो सवारियां निकलेंगी। पहली सवारी 15 अगस्त और दूसरी सवारी 22 अगस्त को निकलेगी।
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महाकाल मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
- फोटो : सोशल मीडिया
महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार शाम को 4 बजे मंदिर से शाही सवारी निकाली गई। बाबा महाकाल ने भक्तों को पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव और नंदी पर उमामहेश के रूप में दर्शन दिए। इस दौरान सुरक्षा की सृष्टि से बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वहीं मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने बाबा महाकाल को सलामी दी।
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चंद्रमौलेश्वर रूप में बाबा महाकाल
- फोटो : सोशल मीडिया
बाबा महाकाल की सवारी महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी कोटमोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर पहुंची। प्रशासन ने सवारी मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। भीड़ को दखते हुए स्कूली बच्चों को सोमवार का अवकाश घोषित दिया गया था।
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